राज्यपाल ने ली जिला स्तरीय अधिकारियों की बैठक

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राज्यपाल ने ली जिला स्तरीय अधिकारियों की बैठक


जयपुर/टोंक, 24 मार्च (हि.स.)। राज्यपाल हरिभाऊ बागडे ने जिला परिषद सभागार टोंक में सोमवार को जिला स्तरीय अधिकारियों से संवाद कर विकास योजनाओं और जनहित के कार्यक्रमों की समीक्षा की। उन्होंने कहा कि सरकार की योजनाओं का लाभ अंतिम छोर पर बैठे पात्र व्यक्ति तक पहुंचे। बागडे ने अधिकारियों को निर्देश दिए कि वह आमजन की समस्याओं का प्राथमिकता से समाधान करें और उनके जीवन में सुधार लाने के लिए जनहित की योजनाओं को प्रभावी ढंग से लागू करें।

राज्यपाल ने जल संरक्षण को लेकर मुख्यमंत्री जल स्वावलंबन योजना में गांव का पानी गांव में, खेत का पानी खेत में संचित रखने पर विशेष जोर दिया। उन्होंने प्रधानमंत्री ग्राम सड़क योजना के तहत सुदूर गांवों और ढाणियों में सड़कों की बेहतर कनेक्टिविटी सुनिश्चित करने के निर्देश दिए। साथ ही, इस कार्य को प्राथमिकता से समयबद्ध सीमा में पूरा किया जाएं। जल जीवन मिशन में प्रत्येक परिवार को स्वच्छ पेयजल उपलब्ध कराएं। पीएम सूर्य घर योजना और पीएम कुसुम योजना का लाभ लेने के लिए लोगों को प्रेरित करें।

राज्यपाल ने महिलाओं को आर्थिक रूप से आत्मनिर्भर बनाने पर विशेष जोर देते हुए कहा कि राजीविका योजना के माध्यम से स्वयं सहायता समूहों के उत्पादों की उचित मार्केटिंग की व्यवस्था की जाएं। उन्होंने किसानों के लिए चलाई जा रही योजनाओ की समीक्षा करते हुए प्रधानमंत्री किसान सम्मान निधि योजना, पीएम कृषि सिंचाई योजना, पीएम फसल बीमा योजना, राष्ट्रीय बागवानी मिशन, सॉयल हेल्थ कार्ड योजना को लेकर संबधित विभाग के अधिकारियों को काश्तकारो को अधिकारिक जानकारी प्रदान कर लाभांवित करने के निर्देश प्रदान किए।

राज्यपाल ने आंगनबाडी केन्द्रों पर बच्चों के शारीरिक व मानसिक विकास तथा बालिकाओं की उपस्थिति एवं पोषण को लेकर विशेष प्रयास करने के निर्देश दिए। प्रधानमंत्री आवास योजना (ग्रामीण) में पूर्व में इस योजना के लाभ से वंचित लोगों को जोडने के निर्देश दिए। डेयरी विभाग के अधिकारियों को जिले में डेयरी उत्पाद के विकास की संभावनाओ पर कार्य करने पर बल दिया।

राज्यपाल बागडे ने प्रधानमंत्री टीबी मुक्त भारत अभियान की समीक्षा करते हुए कहा कि टोंक जिले को टीबी मुक्त बनाने के लिए बेहतर कार्य योजना बनाकर कार्य करें। उन्होंने शिक्षा विभाग के अधिकारियों को निर्देश दिए कि घुमुंन्तु जातियों एवं भिक्षावृति का कार्य करने वाले बालको को सतत प्रयास कर नियमित शिक्षा से जोडा जाएं, ताकि उनकी आने वाली पीढियां शिक्षित होकर सक्षम बन सकें।

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हिन्दुस्थान समाचार / दिनेश

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