भारत केवल एक देश नहीं, बल्कि भाषाई विविधता, परंपरा और संस्कृति का अनूठा उदाहरण : रमेश कुमार
-चैत्र शुक्ल प्रतिपदा पर आरएसएस के काशी महानगर के स्वयंसेवकों ने किया पथ संचलन
वाराणसी, 30 मार्च (हि.स.)। चैत्र शुक्ल प्रतिपदा पर रविवार को राष्ट्रीय स्वयंसेवक संघ (आरएसएस) ने संपूर्णानंद संस्कृत विश्वविद्यालय के खेल मैदान में वर्ष प्रतिपदा उत्सव का आयोजन किया। उत्सव में आद्य सरसंघचालक प्रणाम कार्यक्रम में संघ के काशी प्रांत प्रचारक रमेश कुमार ने कहा कि यह उत्सव मात्र एक परंपरागत पर्व नहीं, बल्कि भारत की प्राचीन एकात्मता के जागरण का अनुभव करने का एक महत्वपूर्ण अवसर है। आज के दिन, 5127 वर्ष पूर्व धर्मराज युधिष्ठिर का राज्याभिषेक हुआ था, जिसे हम आज युगाब्द संवत के रूप में जानते हैं। इसी दिन 2082 वर्ष पूर्व विक्रमादित्य ने विक्रम संवत की स्थापना की थी। प्रांत प्रचारक ने कहा कि हमारे प्राचीन काल गणना प्रणाली वैज्ञानिक रूप से सटीक हैं, जो सौर और चंद्र पर आधारित है। हालांकि, सदियों से हम विदेशी आक्रमणों और षड्यंत्रों के प्रभाव में अपने विश्व गुरु के गौरव को भूलते जा रहे हैं।
सनातन समाज और सांस्कृतिक विविधता
प्रांत प्रचारक रमेश कुमार ने आगे कहा, सनातन समाज में उत्सव हमारे पूर्वजों के प्रति कृतज्ञता व्यक्त करने का एक अद्वितीय अवसर होते हैं। भारत केवल एक देश नहीं, बल्कि भाषाई विविधता, परंपरा और संस्कृति का अनूठा उदाहरण है। यह राष्ट्र राम, कृष्ण, शिवाजी, महाराणा प्रताप, राणा सांगा की वीरता और संस्कृति का प्रतीक है।
उन्होंने महाकुंभ का उदाहरण देते हुए कहा कि विश्व ने देखा कि कैसे 66 करोड़ लोग बिना किसी भेदभाव के गंगा, यमुना और सरस्वती के संगम पर पुण्यसलिला में डुबकी लगाकर एकता और धार्मिक भावनाओं का प्रदर्शन करते हैं।
एकता और संघर्ष की विरासत
संघ के अखिल भारतीय प्रतिनिधि सभा में पारित प्रस्ताव पर चर्चा करते हुए उन्होंने कहा, बांग्लादेश के हिंदू भी हमारे ही भाई हैं। हमें उनकी समस्याओं के समाधान तक एकजुटता दिखानी चाहिए। इसी एकजुटता के कारण राम मंदिर का भव्य निर्माण संभव हुआ। उन्होंने कहा कि हमारी संगठन शक्ति ही भारत को 'सोने की चिड़िया' और विश्व गुरु बनाने में सहायक रही है। आज हमें उस आत्मशक्ति को पुनः जागृत कर भारत के खोए हुए मान, सम्मान और गौरव को पुनः स्थापित करने की आवश्यकता है।
संघ के 100 वर्षों की उपलब्धियाँ
प्रांत प्रचारक ने संघ के 100 वर्षों के इतिहास का उल्लेख करते हुए कहा कि संघ ने अपने अस्तित्व के 100 वर्षों में अनेक महत्वपूर्ण मुद्दों पर कार्य किया है—जैसे भारत-पाक युद्ध, भारत-चीन युद्ध, अमरनाथ श्राइन बोर्ड की स्थापना, गोवा मुक्ति आंदोलन आदि।
उन्होंने कहा कि आज के दौर में हर समस्या का समाधान संगठन है। हमारे पूर्वजों ने इस सत्य को सिद्ध किया कि 'एक और एक 11 होता है।
आरएसएस के 101वें वर्ष का स्वागत
प्रांत प्रचारक ने कहा कि 02 अक्टूबर 2025 को संघ अपने 101वें वर्ष में प्रवेश करेगा। उन्होंने सभी स्वयंसेवकों से आह्वान किया कि वे हिंदू समाज के गौरव और वैभव के साथ संघ के विस्तार के लिए अपने प्रयासों को और मजबूत करें।
इसके पहले काशी प्रांत प्रचारक एवं काशी विभाग के संघचालक जयप्रकाश लाल ने डॉ. केशव बलिराम हेडगेवार जी के चित्र पर पुष्पांजलि अर्पित की। अमृत वचन डॉ. सुजीत, एकल गीत रणवीर और प्रार्थना दिनेश ने प्रस्तुत किया। कार्यक्रम का संचालन सह विभाग कार्यवाह आशीष ने किया।
काशी महानगर के स्वयंसेवकों ने किया पथसंचलन
कार्यक्रम में काशी महानगर के 3000 से अधिक स्वयंसेवकों ने पूर्ण गणवेश में दंड के साथ भव्य पथसंचलन किया। घोष दल ने संघ की विभिन्न रचनाओं का वादन किया, और पथ संचलन के मार्ग में नागरिकों ने स्वयंसेवकों पर पुष्प वर्षा की। संचलन के अग्रभाग में डॉ. केशव बलिराम हेडगेवार और द्वितीय सरसंघचालक परम पूज्य गुरु जी का चित्र अंकित सुसज्जित वाहन चल रहा था।
उत्सव में इनकी रही उपस्थिति
उत्सव में पूर्वी उत्तर प्रदेश क्षेत्र के क्षेत्र कार्यवाह वीरेंद्र , काशी प्रांत के सह प्रांत कार्यवाह डॉ. राकेश तिवारी, प्रांत कुटुंब प्रबोधन संयोजक शुकदेव , प्रांत संपर्क प्रमुख दीनदयाल , काशी विभाग के कार्यवाह राजेश, विभाग प्रचारक नितिन, काशी महानगर के तीनों भागों के पदाधिकारी व स्वयंसेवक मौजूद रहे।
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हिन्दुस्थान समाचार / श्रीधर त्रिपाठी