विहिप ने अर्चक पुरोहित प्रशिक्षण वर्ग प्रारंभ किया

देवालयों में बैठे भगवान भी बैकुण्ठ जैसे विराजमान हैं : महंत मिथलेशनंदनी शरण
अयोध्या, 30 मार्च (हि.स.)। विश्व हिंदू परिषद ने गोलाघाट स्थित जानकी जीवन मंदिर में रविवार को अर्चक पुरोहित प्रशिक्षण वर्ग प्रारंभ किया।
प्रशिक्षण वर्ग में उपस्थित प्रशिक्षुओं को संबोधित करते हुये प्रसिद्ध मानस व्याख्याकार हनुमत निवास मंदिर के महंत मिथलेशनंदनी शरण महाराज ने कहा कि देवालयों में बैठे भगवान भी बैकुण्ठ जैसे विराजमान हैं। वह जिस प्रकार अपने बैकुण्ठ में विराजमान होकर समाज का कल्याण करते हैं। उसी प्रकार वह देवालयों/ मंदिरों में साक्षात विराजमान हैं, वह मूर्ति नहीं है यह बात अर्चक के मस्तिष्क में बैठनी चाहिए।
अर्चक की तप से ही ईश्वर का अवतरण मनुष्य में होता है। अर्चक को तेज सहने के लिये जागना पड़ता, अर्चना की निरंतरता, दृढ़ता बनाये रखना आवश्यक है। अनवरत प्रवाह देवालयों में बनी रहे इसके लिये अर्चकों की भूमिका महत्वपूर्ण हो जाती है। यह प्रशिक्षण वर्ग अपने लक्ष्य की सिद्धि को अवश्य प्राप्त करेगा।
इस दौरान श्रीराम जन्मभूमि तीर्थ क्षेत्र ट्रस्ट के महासचिव चम्पत राय, विश्व हिन्दू परिषद (विहिप) महामंत्री बजरंग लाल बांगड़ा, संयुक्त महामंत्री कोटेश्वर राव, प्रभारी अरूण नेटकर, रघुनाथ दास शास्त्री, प्रो. लक्ष्मीकांत सिंह, डा. विक्रमा पांडेय, शिव प्रसाद शुक्ल, धीरेश्वर वर्मा, संगठन मंत्री अभिषेक, प्रधानाचार्य अवनी पांडेय, शरद शर्मा, उमाशंकर मिश्र आदि उपस्थित रहे। प्रशिक्षण वर्ग का संचालन राजकुमार सिंह ने किया।
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हिन्दुस्थान समाचार / पवन पाण्डेय