हैदराबाद केंद्रीय विवि की भूमि नीलामी के विरोध में एबीवीपी ने पर्यावरण मंत्री को सौंपा ज्ञापन


नई दिल्ली, 03 अप्रैल (हि.स.)। अखिल भारतीय विद्यार्थी परिषद (एबीवीपी) के राष्ट्रीय सचिव श्रवण बी. राज और शिवांगी खारवाल के नेतृत्व में एक प्रतिनिधिमंडल ने गुरुवार को केंद्रीय पर्यावरण, वन और जलवायु परिवर्तन मंत्री भूपेंद्र यादव से मुलाकात की। हैदराबाद केंद्रीय विश्वविद्यालय की चार सौ एकड़ भूमि के अतिक्रमण व नीलामी के मुद्दे पर ज्ञापन सौंपा। प्रतिनिधिमंडल ने पर्यावरण मंत्रालय से तत्काल हस्तक्षेप की मांग की, ताकि विश्वविद्यालय की जैव विविधता, वनस्पतियों और जीवों को अतिक्रमण से बचाया जा सके।
इस संदर्भ में अभाविप ने एक प्रेस वार्ता आयोजित कर तेलंगाना के मुख्यमंत्री रेवंत रेड्डी के नेतृत्व वाली सरकार की मनमानी और छात्रों की आवाज को दबाने के प्रयासों की कड़ी निंदा की। परिषद ने स्पष्ट किया कि शिक्षा और अनुसंधान के लिए समर्पित इस भूमि का निजी कंपनियों को सौंपा जाना न केवल अनुचित और निंदनीय है बल्कि इससे क्षेत्र की पारिस्थितिकी संतुलन को भी गहरी क्षति पहुंचेगी।
यह चार सौ एकड़ भूमि घने हरित क्षेत्र, दुर्लभ वनस्पतियों और जीव-जंतुओं का आश्रय स्थल है। जहां 734 प्रकार की वनस्पतियां, 220 प्रकार की पक्षी प्रजातियां और संकटग्रस्त भारतीय स्टार कछुआ जैसे जीव पाए जाते हैं। इस क्षेत्र में मौजूद 'पीकॉक लेक' और 'बफैलो लेक' स्थानीय पारिस्थितिकी तंत्र को बनाए रखने में सहायक हैं। इसके अलावा हैदराबाद की भूवैज्ञानिक धरोहर का प्रतीक 'मशरूम रॉक' भी इसी भूमि का हिस्सा है।
अभाविप द्वारा सौंपे गए ज्ञापन में कई प्रमुख मांगें सम्मिलित हैं, जिनमें पर्यावरण मंत्रालय द्वारा त्वरित हस्तक्षेप कर जंगलों की कटाई से हो रहे भूमि क्षरण को रोकना, हैदराबाद की पारिस्थितिकी तंत्र का अभिन्न अंग मानी जाने वाली समृद्ध वनस्पतियों और जीवों का संरक्षण सुनिश्चित करना, विश्वविद्यालय परिसर में रहने वाली संकटग्रस्त प्रजातियों को बचाना और अवैध अतिक्रमण के खिलाफ सख्त कार्रवाई करना आदि उल्लेखित है। इस क्षेत्र को एक महत्वपूर्ण पर्यावरणीय संपत्ति के रूप में मान्यता देने की मांग भी उठाई गई।
अभाविप के राष्ट्रीय सचिव श्रवण बी. राज ने कहा कि रेवंत रेड्डी सरकार ने अपने स्वार्थों को पूरा करने के लिए विश्वविद्यालय की भूमि पर अतिक्रमण शुरू कर दिया है। निजी संस्थाओं को लाभ पहुंचाने के लिए अवैध कार्यों को अंजाम दे रही है। सरकार ने पहले ही बुलडोजर लगाकर शहरी जंगल को नष्ट करने का कार्य आरंभ कर दिया है। जिससे क्षेत्र की पारिस्थितिक संतुलन और पर्यावरणीय स्थिरता को गंभीर खतरा पैदा हो गया है।
बी.राज ने बताया कि आज हमारे प्रतिनिधिमंडल ने केंद्रीय पर्यावरण मंत्री भूपेंद्र यादव से मुलाकात कर इस अवैध अतिक्रमण को तत्काल रोकने और हैदराबाद क्षेत्र की समृद्ध जैव विविधता की रक्षा के लिए ठोस कदम उठाने की मांग की।
एबीवीपी की राष्ट्रीय मंत्री शिवांगी खारवाल ने कहा कि विश्वविद्यालय परिसर के भीतर स्थित प्राकृतिक आवास पारिस्थितिक संतुलन बनाए रखने में महत्वपूर्ण भूमिका निभाता है। ऐसे समय में जब पूरी दुनिया 'ग्लोबल वार्मिंग' और पर्यावरणीय क्षरण जैसी चुनौतियों का सामना कर रही है।
उन्होंने कहा कि इस हरित क्षेत्र का विनाश न केवल स्थानीय पारिस्थितिकी तंत्र को प्रभावित करेगा, बल्कि समाज और आने वाली पीढ़ियों के लिए भी गंभीर संकट पैदा करेगा।
शिवांगी खारवाल ने आरोप लगाते हुए कहा कि तेलंगाना सरकार ने विश्वविद्यालय की भूमि पर अतिक्रमण करने की साजिश रची है। इसलिए अखिल भारतीय विद्यार्थी परिषद लगातार इस मुद्दे पर संघर्षरत है। छात्र समुदाय की आवाज को बुलंद कर रही है। हम तब तक विरोध प्रदर्शन जारी रखेंगे, जब तक कि सरकार विश्वविद्यालय की भूमि और इस जंगल में रहने वाले निर्दोष जीव-जंतुओं को नष्ट करने की अपनी योजना को पूरी तरह छोड़ नहीं देती।
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हिन्दुस्थान समाचार / माधवी त्रिपाठी