चैत्र नवरात्र में चमत्कारिक सिद्धपीठ श्री फलौदी माता मंदिर पर अलौकिक दर्शन

कोटा, 31 मार्च (हि.स.)। अ.भा.मेडतवाल (वैश्य) समाज की चमत्कारिक सिद्धपीठ मंदिर श्री फलौदी माताजी महाराज, खैराबाद में चैत्र नवरात्र महोत्सव पर नियमित 1400 से अधिक बच्चों के लिये सामूहिक कन्याभोज आयोजित किया जा रहा है। विभिन्न राज्यों से श्रद्धालु नवरात्र में इकलौते अष्टकोणीय देवी मंदिर के गर्भगृह में श्रीफलौदी माताजी के अलौकिक दर्शन व पूजा अर्चना करने पहुंच रहे हैं।
मंदिर श्री फलौदी माताजी महाराज समिति के नवरात्र पर्व संयोजक मोहनलाल चौधरी ने बताया कि चैत्र नवरात्र में इस पौराणिक सिद्धपीठ में 9 दिन तक 15 हजार से अधिक बच्चों का सामूहिक कन्याभोज धार्मिक आस्था, एकता व सद्भाव की अनूठी मिसाल है। सभी समुदायों के भक्त चमत्कारिक श्री फलौदी माताजी के दर्शन करने पहुंच रहे हैं। अष्टमी महापर्व पर विशेष महाआरती व दर्शन के लिये सैकडों श्रद्धालु सपरिवार यहां पहुंचते हैं। प्राचीन मान्यता है कि नवरात्र के 9 दिन मध्यरात्रि में माताजी स्वयं जलकुंड तक विचरण करती हैं।
नवरात्र पर्व व्यवस्था समिति के प्रभारी बालमुकुंद गुप्ता थानेदार, पुरूषोत्तम चौधरी, दिलीप गुप्ता जुल्मी वाले ने बताया कि मंदिर परिसर में नवरात्र स्थापना 30 मार्च से 6 अप्रैल रामनवमी तक समाजबंधुओं के सहयोग से खैराबाद कस्बे में सभी वर्गों के छोटे बच्चों के लिये कन्याभोज जारी है। मान्यता है कि नवरात्र में फलदायिनी मां फलौदी के दर्शन कर जो निर्धन कन्याओं को भोजन करवाते हैं, उनकी मनोकामनायें अवश्य पूरी होती है।
दुर्गा की द्धितीय ब्रह्मचारिणी है मां फलौदी-
मंदिर पुजारी पं.अशोक द्विवेदी ने बताया कि महादेवी श्रीफलौदी माताजी महाराज ‘अनेक रूप रूपाय महालक्ष्में नमोस्तुते’ के रूप में विराजित हैं। दुर्गा, सरस्वती, लक्ष्मी तीनों देवियों की शक्तियां मां फलौदी में अंतर्निहित हैं। मां फलौदी को दुर्गा की द्धितीय ब्रह्मचारिणी का रूप माना गया है। वे 6 ऐश्वर्य से सम्पन्न हैं, इसलिये देवी नाम के आगे ‘श्री’ लिखा जाता है। उनके एक उंचे हस्त में दुर्गा का वास और दूसरा हस्त नीचे वरद मुद्रा में हैं, जो लक्ष्मी स्वरूप है। गदा-पदम लक्ष्मी के पास होते हैं, इसलिये अनन्त फल देने वाली फलौदी माताजी को गदा पदमधारी माना गया है। श्रेष्ठ देवी स्वरूप होने से मां फलौदी को ‘महाराज’ कहकर पुकारा जाता है। दुर्गा ब्रह्मचारिणी रूप में चैत्र नवरात्र पर्व में 9 दिन यहां विशेष अनुष्ठान एवं कन्याभोज होता हैं। मां फलौदी मंदिर के गर्भगृह में सन 1960 से अखंड ज्योति प्रज्जवलित है। ‘दीपो मृत्यु विनाशनः’ अर्थात् यह अखंड ज्योति भक्तों के मृत्यु तुल्य कष्टों को नष्ट कर देती है।
मंदिर में पवित्र जलकुंड-
इस ऐतिहासिक सिद्धपीठ पर सभी राज्यों से विभिन्न जाति-वर्ग के श्रद्धालु वर्षपर्यंत दर्शन करने आते हैं। वैष्णव परंपरा से मंदिर में रोज मंगला दर्शन व भोग, श्रृंगार दर्शन, आरती, राजभोग व रात्रि में शयन आरती होती है। मंदिर का गर्भगृह स्वर्णिम आभा से आलोकित है। मंदिर में सोने, चांदी व कांच की दैदीप्यमान कारीगरी व चित्रांकन दर्शनीय है। गुम्बदों पर अनूठी वास्तुकला है। मंदिर प्रांगण में एक प्राचीन जलकुंड (बावड़ी) है, जिसके जल में दैविक शक्तियां का विचरण होता है।
हिन्दुस्थान समाचार / अरविन्द