भारतीय संस्कृति में नवरात्र का विशेष महत्व : महामंडलेश्वर संतोषी माता

श्री आद्यशक्ति पीठ मां संतोषी आश्रम में आध्यात्मिक प्रवचन
हिसार, 31 मार्च (हि.स.)। भारत एक धर्म परायण देश है और इसकी संस्कृति की सराहना
पूरे विश्व में की जाती है। भारतीय संस्कृति में नवरात्र का विशेष महत्व है। नवरात्र
में मां भगवती के नौ रूपों की पूजा व उपासना की जाती है। यह बात शक्ति उपासना ट्रस्ट हरिद्वार की संस्थापक अध्यक्ष महामंडलेश्वर संतोषी
माता ने सोमवार को मॉडल टाउन स्थित श्री आद्यशक्ति पीठ मां संतोषी आश्रम में नवरात्र
के द्वितीय दिवस पर आध्यात्मिक प्रवचन करते हुए कही। उन्होंने बताया कि ब्रह्मा जी
ने जब सृष्टि का निर्माण किया तो वर्ष के प्रथम नौ दिन मां भगवती के पूजन व पाठ के
लिए निर्धारित किए, जो कि संवतसर नवरात्र के नाम से विख्यात हैं। जिनमें जगत जननी जगदंबा
की उपासना करके समाज के सर्वसुख व संपन्नता की कामना की जाती है।
नवरात्र में व्रत
रखने के महत्व को समझाते हुए माता श्री ने बताया कि चैत्र व आश्विन के नवरात्र ऋतु
परिवर्तन के समय आते हैं। मौसम बदलने के समय मनुष्य शरीर में रक्त विकार उत्पन्न होते
हैं व कई बीमारियां जन्म लेने लगती हैं।उन्होंने
कहा कि मौसम बदलने के समय व्रत रखने अर्थात फलाहार करने से इन बीमारियों पर नियंत्रण
पाया जा सकता है। माता श्री ने बताया कि बेशक सृष्टि रचना की शक्ति ब्रह्मा जी के पास
है, रक्षा करने की शक्ति विष्णु जी के पास है और संहार करने की शक्ति शिवजी के पास
है, लेकिन यह सब कुछ करने व करवाने वाली असल में मां भगवती है।इससे पूर्व सुबह के समय
हरिद्वार से पहुंचे 11 वैदिक विद्वानों द्वारा नवरात्र पूजा पर बैठे 15 यजमानों को
विधि विधान से मां भगवती पूजन करवाया व संसार के कल्याण के लिए श्री दुर्गा सप्तसती
का पाठ किया।
माता श्री के व्यास पीठको सुशोभित
करने पर उद्योगपति एवं आश्रम कमेटी के उपप्रधान मदनलाल गोयल ने तिलक करके व माला अर्पण
करके माता श्री का स्वागत किया। इस अवसर पर दयानंद जिंदल, हेमराज यादव, कृष्णा गुप्ता,
सुनीता गर्ग व संतोष नारंग ने भी माता श्री को माला अर्पण करके आशीर्वाद ग्रहण किया।
इस दौरान राजमल काजल, लोकनाथ सिंगल, रमेश चुघ, सुभाष बंसल, अशोक बंसल, सुशील बुडाकिया,
अनिल मेहता व राकेश नारंग सहित सैकड़ों की संख्या में श्रद्धालुगण उपस्थित रहे।
हिन्दुस्थान समाचार / राजेश्वर