काशी को मांस-मदिरा मुक्त क्षेत्र बनाने की उठी मांग, गंगा आरती में विशेष संकल्प

वाराणसी। काशी में आयोजित विशेष गंगा आरती में काशी को मांस और मदिरा मुक्त क्षेत्र बनाने की मांग जोर-शोर से उठी। इस दौरान गंगा तट पर उपस्थित श्रद्धालुओं और सनातन धर्मावलंबियों ने उत्तर प्रदेश सरकार से यह आग्रह किया कि काशी में भी मांस और मदिरा की बिक्री पर पूर्ण प्रतिबंध लगाया जाए, जिससे यह पवित्र नगरी अपनी धार्मिक और सांस्कृतिक गरिमा को बनाए रख सके।
विशेष गंगा आरती के दौरान मध्य प्रदेश सरकार के हाल ही में लिए गए निर्णय की सराहना करते हुए, गंगोत्री सेवा समिति, सामाजिक संस्था आगमन और ब्रह्म सेना के सदस्यों ने विशेष पूजन कर उनका धन्यवाद अर्पित किया। मध्य प्रदेश सरकार ने उज्जैन, ओंकारेश्वर, महेश्वर, मैहर, चित्रकूट, दतिया, पन्ना सहित 17 धार्मिक नगरों में शराब की बिक्री पर पूर्ण प्रतिबंध लगाने का साहसिक निर्णय लिया है, जिससे काशी में भी इस दिशा में कदम उठाने की उम्मीद बढ़ गई है।
आगमन संस्था के संस्थापक डॉ. संतोष ओझा ने कहा कि काशी को भी एक पवित्र धार्मिक नगरी बनाए रखने के लिए उत्तर प्रदेश सरकार को इसी तरह का कदम उठाना चाहिए। उन्होंने दशाश्वमेध घाट पर आयोजित गंगा आरती के दौरान विशेष पूजन कर योगी सरकार से मांग की कि काशी के अंतरगृही क्षेत्र में मांस और मदिरा की बिक्री पूरी तरह से बंद की जाए। गंगोत्री सेवा समिति के पं. किशोरी रमन दुबे बाबू महाराज और दिनेश शंकर दुबे ने भी इस मांग का समर्थन किया और उपस्थित श्रद्धालुओं से दोनों हाथ उठाकर 'हर-हर महादेव' के जयघोष के साथ अपनी सहमति दर्ज कराने का आह्वान किया।
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ब्रह्म सेना के अध्यक्ष डॉ. गिरीश तिवारी ने भी योगी सरकार से आग्रह किया कि वे भी मध्य प्रदेश सरकार की तरह एक साहसिक निर्णय लें और काशी को पूर्णत: मांस-मदिरा मुक्त घोषित करें। गंगा आरती में देशभर से आए श्रद्धालुओं ने भी इस मांग का समर्थन किया और सरकार से इस दिशा में ठोस कदम उठाने का आग्रह किया।