बौद्धिक दासता से मुक्त होकर विकसित भारत की यात्रा में सहभागी बनेंः सुधांशु त्रिवेदी

नई दिल्ली, 2 अप्रैल (हि.स.)। विख्यात वक्ता और भारतीय जनता पार्टी के सांसद डॉ. सुधांशु त्रिवेदी का कहना है कि हमें बौद्धिक दासता से मुक्त होकर अपने गौरवशाली इतिहास पर गर्व करना चाहिए। विश्व की अनेक सत्ताओं ने षड्यंत्र रचकर हमारे इतिहास को विकृति किया, लोगों के मन में बैठाने का प्रयास किया कि भारत में जो कुछ भी अच्छा हुआ, वह मुगलों या अंग्रेजों के द्वारा किया गया। हम मैकाले और मार्क्स के रचित इतिहास से बाहर निकल रहे हैं और हम पाते हैं कि वे लुटेरे न केवल हमारी आर्थिक समृद्धि को लूटकर ले गए बल्कि हमें मानसिक रूप से भी गुलाम बना गए। प्रधानमंत्री मोदी के नेतृत्व में ऐसे सारे झूठ का पर्दाफाश हो रहा है और देशवासी सच को जान रहे हैं और अपनी प्राचीन ऐतिहासिक विरासत और ज्ञान-विज्ञान पर गर्व कर रहे हैं।
डॉ. सुधांशु त्रिवेदी बुधवार को इंदिरा गांधी राष्ट्रीय कला केन्द्र द्वारा आयोजित प्रो. देवेन्द्र स्वरूप स्मारक व्याख्यान को संबोधित रहे थे। समारोह की अध्यक्षता कला केन्द्र के अध्यक्ष पद्म भूषण रामबहादुर राय ने की। डॉ. त्रिवेदी ने अनेक संदर्भों का हवाला देते हुए सिद्ध किया कि किस तरह आक्रमणकारियों ने हमारे इतिहास के साथ छेड़छाड़ की। दुर्भाग्य से उनसे प्रभावित हमारे ही कुछ लोगों ने भारत की सनातन संस्कृति, सभ्यता और विरासत के साथ ही ज्ञान विज्ञान को भी कमतर आंकने के षड्यंत्र रचे। इतिहास के नाम पर कोरा झूठ पढ़ाया जा रहा था। इसका सबसे बड़ा उदाहरण दिल्ली का कुतुब मीनार ही है। एनसीईआरटी तक इसका प्रमाण नहीं दे पाई कि कुतुब मीनार किसने बनवाया। जबकि उसी मीनार के बगल में स्थित लौह स्तम्भ भारत की गौरवशाली विरासत है।
उन्होंने कहा कि हमें समृद्ध भारत के गौरवशाली इतिहास और परम्पराओं को जानना-समझना चाहिए, उसे लोगों तक पहुंचाना चाहिए। भारत को विकसित भारत बनाने के संकल्प जीवंत करने के लिए यह आवश्यक है कि हम प्रधानमंत्री मोदी के लालकिले की प्राचीर से किए गए आह्वान को अपना मंत्र बना लें। हमें गुलाम मानसिकता से मुक्ति, अपनी ऐतिहासिक विरासत पर गर्व करना होगा और देश के लिए जो कर्तव्य है वह सामूहिकता में पूरे करने होंगे।
इस अवसर पर प्रो. देवेन्द्र स्वरूप की विद्वता और इतिहास दृष्टि की विशिष्टता बताते हुए रामबहादुर राय ने कहा कि हमारे शास्त्रों में छिपे इतिहास पर वे अपने जीवन के अंतिमकाल तक शोध करते रहे। राष्ट्रीय स्वयंसेवक संघ का वास्तविक इतिहास लिखने और भारतीय ज्ञान परम्परा की गहराइयों को समझने के लिए वे बहुत अध्ययन करते थे। हमें उनके बचे हुए इस कार्य को पूरा करना है। -----------
हिन्दुस्थान समाचार / जितेन्द्र तिवारी