कोरोना काल में मास्क बनाकर बनारस की बेटियां आत्मनिर्भर होने के साथ, लोगों को कर रहीं जागरुक

कोरोना काल में मास्क बनाकर बनारस की बेटियां आत्मनिर्भर होने के साथ, लोगों को कर रहीं जागरुक

वाराणसी। जिले में कोरोना संक्रमण की दूसरी लहर से लोगों को बचाने और सुरक्षित रखने के लिए शासन-प्रशासन हर संभव कोशिशें कर रही हैं। वहीं कोरोना से लड़ाई में बनारस की महिलाएं एवं बेटियों ने भी मोर्चा संभाला हैं। बनारस की बेटियां आत्मनिर्भर होने के साथ ही साथ लोगों के सुरक्षित जीवन के लिए न सिर्फ फेस मास्क बना रहीं हैं, बल्कि लोगों को मास्क लगाने, गर्म पानी, काढ़ा व भाप लेने के लिए भी जागरूक भी कर रहीं है।

 भारत सरकार के विज्ञान एवं प्रोद्योगिकी मंत्रालय के सहयोग से स्थापित एवं साई इंस्टिट्यूट ऑफ़ रूरल डेवलपमेंट,  वाराणसी द्वारा सेल्फ सस्टेन सेंटर “रूरल वुमेन टेक्नोलॉजी पार्क” बसनी एवं आईसीटी आधारित जरी जरदोजी केंद्र, लोहता में प्रशिक्षित महिलाएं एवं बेटियां ना सिर्फ केंद्र में बल्कि अपने निवास स्थानों पर कोरोना से लड़ाई में ढाल की भूमिका निभा रहीं हैं। 

यह महिलाएं फेस मास्क बना रही है और साथ ही साथ उन्हें बाज़ार में बेच कर अपने परिवार को आर्थिक सहायता भी दे रही हैं। कुछ महिलाएं मास्क बना कर केंद्र को ही बेच रही हैं, जिससे उन्हें उचित मूल्य की प्राप्ति हो रही है और केंद्र द्वारा उन फेस मास्क को क्षेत्र के आर्थिक तौर पर कमज़ोर लोगों में वितरित कर दिया जा रहा है। 

केंद्र निदेशक अजय सिंह ने कहा कि पिछले वर्ष कोरोना काल में उनकी भूमिका उन्हें इस वर्ष अनुभव के रूप में सहायता कर रही है।  इस वर्ष उन्हें और उनकी टीम को अपना अपना काम पता है और सब उसी दिशा में अपना अपना बहुमूल्य योगदान दे रही हैं| 

केंद्र द्वारा प्रशिक्षित यास्मिन कहती है कि हम सभी ने यही सोचा था के मार्च के अंत तक हालात संभल जायेंगे, पर अप्रैल के महीने में आई इस दूसरी लहर ने ये बता दिया के अभी आराम से बैठने का वक़्त नहीं है। कोरोना से युद्ध अभी जारी है।  केंद्र की प्रशिक्षित एवं आत्मनिर्भर महिला हजरा फातिमा कहती हैं के इस लड़ाई में सीखने वाली सारी चीज़े हमने पिछले वर्ष ही सीख ली थी। अब बस अपने हुनर को जन सुरक्षा में लगा कर अपना योगदान देना है। 

यास्मीन ने अपनी टीम की ओर से यह जानकारी साझा की है  की पिछले सात दिनों में उनकी 5 महिलाओं की टीम ने अब तक 800 से ज्यादा फेस मास्क बनाए हैं। जिन्हें उचित मूल्यों पर बाज़ार में दिया गया एवं जरूरतमंद लोगों को निशुल्क वितरण किया गया।  केंद्र निदेशक अजय सिंह ने बताया कि संस्थान द्वारा दोनों सेंटर बसनी एवं लोहता सेंटर पर महिलाएं मास्क बना रही हैं।

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