संगम की रेती पर पौष पूर्णिमा से बह रही भक्ति और अध्यात्मिक बयार

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संगम की रेती पर पौष पूर्णिमा से बह रही भक्ति और अध्यात्मिक बयार


प्रयागराज, 04 जनवरी (हि.स.)। पौष पूर्णिमा स्नान पर्व से विश्व प्रसिद्ध संगम तट पर प्रत्येक वर्ष की भांति भक्ति और अध्यात्मिक ज्ञान की गूंज शुरू हो गई। देश के विभिन्न क्षेत्रों से एक माह के लिए कथा वाचक, साहित्याचार्य एवं शंकराचार्य अपने शिविर में भक्तों को धर्म से जुड़े अध्यामिक ज्ञान प्रदान करना शुरू कर दिया है।

प्रत्येक वर्ष लगने वाले माघ मेले के अंतर्गत माघ मास में सनातन से जुड़े धार्मिक ज्ञान प्रदान करने के लिए देश के विभिन्न क्षेत्रों से आने वाले संत, महात्मा, शंकराचार्य फिर से संगम की रेती पर तैयार अपने अपने शिविराें में भक्तों को धर्म एवं आध्यात्मिक ज्ञान देना शुरू कर दिया हैं। यह आध्यात्मिक ज्ञान यहां आने वाले लाेगाें काे खूब आनंद प्रदान कर रहा है।

अयोध्या निवासी साहित्याचार्य प्रभाशंकर पांडेय ने बताया कि मेरा यह दूसरा कल्पवास है। पौष पूर्णिमा स्नान के साथ ही कर्म छोर किया जाता है और स्नान के बाद संकल्प लेते हैं। संकल्प के बाद किसी भी दूसरे व्यक्ति का दिया हुआ भोजन नहीं ग्रहण किया जाता है। सूर्यास्त के पूर्व भोजन करना होता है। भोजन के बाद पूरे माह भक्ति भावना के साथ प्रवचन सुनते हैं।

बारह वर्ष के बाद कल्पवासी करते हैं सैयादान प्रभाशंकर पांडेय ने बताया कि कल्पवास का शुभारंभ दंपति करते हैं। यदि कल्पवास करने के दौरान पति या पत्नी में से किसी का स्वर्गवास हो जाता है तो एक ही व्यक्ति कल्पवास की 12 वर्ष की अवधि पूर्ण करता है। इसके बाद कल्पवासी सैयादान करते हैं, जिसके उपरांत कल्पवास पूर्ण माना जाता है ऐसी मान्यता है।

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हिन्दुस्थान समाचार / रामबहादुर पाल

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