बड़े सपने देखना ही नहीं, उन्हें साकार करने का साहस भी जरूरी : प्रो. वंदना सिंह

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बड़े सपने देखना ही नहीं, उन्हें साकार करने का साहस भी जरूरी : प्रो. वंदना सिंह


बड़े सपने देखना ही नहीं, उन्हें साकार करने का साहस भी जरूरी : प्रो. वंदना सिंह


जौनपुर,12 जनवरी (हि.स.)। यूपी के जौनपुर स्थित वीर बहादुर सिंह पूर्वांचल विश्वविद्यालय के विवेकानंद केंद्रीय पुस्तकालय में राष्ट्रीय युवा दिवस पर सोमवार को विचार गोष्ठी में कुलपति प्रोफेसर वंदना सिंह ने युवाओं को स्वामी विवेकानंद के विचारों से प्रेरणा लेने का आह्वान किया। कार्यक्रम का शुभारम्भ उन्होंने परिसर में स्थापित स्वामी विवेकानंद की प्रतिमा पर माल्यार्पण कर किया।

गोष्ठी को सम्बोधित करते हुए कुलपति ने कहा कि केवल सपने देखने से लक्ष्य प्राप्त नहीं होता, बल्कि इसके लिए निरंतर परिश्रम, आत्मअनुशासन और दृढ़ संकल्प आवश्यक है। उन्होंने कहा कि स्वामी विवेकानंद का संदेश “बड़े सपने देखिए और उन्हें पूरा करने के लिए निरंतर प्रयास करते रहिए” आज के युवाओं के लिए मार्गदर्शक सिद्धांत है। युवाओं को अपने नैतिक कर्तव्यों को समझते हुए समाज और राष्ट्र के प्रति जिम्मेदार बनने की आवश्यकता है।

परीक्षा नियंत्रक डॉ. विनोद कुमार सिंह ने कहा कि स्वामी विवेकानंद की विचारधारा राष्ट्र निर्माण की आधारशिला है। उन्होंने युवाओं से राष्ट्रहित को सर्वोपरि रखने का आह्वान किया और कहा कि स्वामी विवेकानंद के अनुयायी आज विश्व भर में फैले हुए हैं।

विवेकानंद केंद्रीय पुस्तकालय के मानद पुस्तकालयाध्यक्ष प्रोफेसर राजकुमार ने अतिथियों का स्वागत करते हुए कहा कि स्वामी विवेकानंद युवाओं के लिए ऊर्जा, आत्मविश्वास और राष्ट्रचेतना के प्रतीक हैं। कार्यक्रम का संचालन उद्देश्य सिंह ने एवं धन्यवाद ज्ञापन जनसंचार विभाग के डॉ. दिग्विजय सिंह राठौर ने किया।इस अवसर पर प्रो. अजय द्विवेदी, डॉ. मनीष कुमार गुप्ता, डॉ. रसिकेश, डॉ. नृपेंद्र सिंह, प्रो. नरेंद्र, डॉ. मंगला प्रसाद यादव, डॉ. सुरेंद्र सिंह, डॉ. प्रशांत, डॉ. प्रवीण, सुशील प्रजापति, आदित्य कुमार सहित अनेक शिक्षकगण एवं गणमान्य लोग उपस्थित रहे।

हिन्दुस्थान समाचार / विश्व प्रकाश श्रीवास्तव

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