लोकतंत्र अपनाओ–अराजकता हटाओ : संवैधानिक संस्थाओं की गरिमा पर प्रहार एवं देश में अराजकता फैलाने के प्रयासों के विरोध में अभाविप का प्रदर्शन

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लोकतंत्र अपनाओ–अराजकता हटाओ : संवैधानिक संस्थाओं की गरिमा पर प्रहार एवं देश में अराजकता फैलाने के प्रयासों के विरोध में अभाविप का प्रदर्शन


लोकतंत्र अपनाओ–अराजकता हटाओ : संवैधानिक संस्थाओं की गरिमा पर प्रहार एवं देश में अराजकता फैलाने के प्रयासों के विरोध में अभाविप का प्रदर्शन


गोरखपुर, 16 अक्टूबर (हि.स.)। अखिल भारतीय विद्यार्थी परिषद (अभाविप), गोरक्ष प्रांत द्वारा शुक्रवार को दीनदयाल उपाध्याय गोरखपुर विश्वविद्यालय में “लोकतंत्र अपनाओ–अराजकता हटाओ” के नारे के साथ व्यापक प्रदर्शन किया गया। दीक्षा भवन से सैकड़ों कार्यकर्ताओं की सहभागिता के साथ प्रारंभ हुई प्रदर्शन यात्रा कला संकाय एवं विश्वविद्यालय के मुख्य द्वार से होते हुए छात्रसंघ चौराहे पर संपन्न हुई। प्रदर्शन के माध्यम से अभाविप ने देश की संवैधानिक एवं लोकतांत्रिक संस्थाओं, विशेषकर निर्वाचन आयोग और न्यायालय की गरिमा को धूमिल करने, उनकी कार्यप्रणाली पर निराधार प्रश्नचिह्न खड़े करने तथा उनके प्रति जनमानस में अविश्वास उत्पन्न करने के प्रयासों की कड़ी निंदा की। अभाविप ने स्पष्ट किया कि राजनीतिक स्वार्थों की पूर्ति के लिए हिंसा एवं अराजकता का सहारा लेना किसी भी स्थिति में स्वीकार्य नहीं है।

अभाविप कार्यकर्ताओं ने कहा कि भारत का निर्वाचन आयोग एक स्वायत्त संवैधानिक संस्था है, जो संवैधानिक प्रावधानों एवं निर्धारित प्रक्रियाओं के अनुरूप देश में निष्पक्ष निर्वाचन संपन्न कराने के लिए उत्तरदायी है। निर्वाचन प्रक्रिया अथवा चुनावी सुधारों से संबंधित किसी भी प्रकार की आपत्ति के समाधान के लिए संविधान एवं कानून के अंतर्गत निर्धारित प्रक्रियाएं और वैधानिक मंच उपलब्ध हैं। एसआईआर (विशेष गहन पुनरीक्षण) जैसी प्रक्रिया के दौरान यदि किसी पात्र मतदाता का नाम मतदाता सूची में शामिल नहीं हो पाता है, तो नियमानुसार दावा प्रस्तुत करने एवं नाम जुड़वाने के लिए निर्धारित प्रक्रिया उपलब्ध है। लोकतंत्र में असहमति और आपत्ति दर्ज कराने का अधिकार सभी को है, लेकिन इसके लिए संवैधानिक एवं कानूनी प्रक्रियाओं का पालन किया जाना चाहिए। संवैधानिक संस्थाओं की कार्यप्रणाली पर निराधार आरोप लगाना और अराजकता के माध्यम से उन पर दबाव बनाने का प्रयास करना लोकतांत्रिक व्यवस्था में जनविश्वास को कमजोर करता है।

अभाविप का स्पष्ट मत है कि देश की संवैधानिक संस्थाओं की स्वायत्तता, निष्पक्षता एवं गरिमा की रक्षा करना प्रत्येक नागरिक का दायित्व है। चुनावी सुधारों की प्रक्रियाओं को लेकर स्वस्थ एवं तथ्यपरक चर्चा लोकतंत्र का अभिन्न अंग है, किंतु उन्हें राजनीतिक स्वार्थों की पूर्ति और संस्थाओं के प्रति अविश्वास फैलाने का माध्यम बनाना लोकतांत्रिक मर्यादाओं के विपरीत है। राजनीतिक असहमति के नाम पर हिंसा, अव्यवस्था एवं अराजकता को बढ़ावा देने वाले प्रयासों का विरोध आवश्यक है। अभाविप ने कहा कि भारत जैसे सशक्त लोकतंत्र में किसी भी विषय पर विरोध दर्ज कराने के लिए संवैधानिक एवं लोकतांत्रिक माध्यम उपलब्ध हैं और उनका ही उपयोग किया जाना चाहिए।

प्रदर्शन के दौरान अभाविप गोरक्ष प्रांत मंत्री शशिकांत मंगलम गुप्ता ने कहा कि, “देश की संवैधानिक संस्थाओं की स्वायत्तता और चुनावी सुधार प्रक्रियाओं पर निराधार प्रश्नचिह्न खड़े करना लोकतांत्रिक मर्यादाओं के सर्वथा विपरीत है। राजनीतिक असहमति की आड़ में देश में अराजकता एवं अव्यवस्था फैलाने का प्रयास अत्यंत निंदनीय है। विरोध के नाम पर भारत में नेपाल और बांग्लादेश जैसी अस्थिरता उत्पन्न करने की बात करना हमारे संविधान और लोकतंत्र की मूल भावना के विपरीत है। भारत का जागरूक युवा एवं विद्यार्थी समाज लोकतांत्रिक मूल्यों, राष्ट्रीय एकता और संवैधानिक व्यवस्था के प्रति प्रतिबद्ध है तथा ऐसी किसी भी गतिविधि का लोकतांत्रिक माध्यमों से दृढ़ता के साथ विरोध करेगा।चुनावी सुधारों की पारदर्शी प्रक्रियाओं को विवादित बनाकर तथा संवैधानिक संस्थाओं को निराधार आरोपों के आधार पर कठघरे में खड़ा करके देश में अविश्वास का वातावरण बनाना उचित नहीं है। भारत एक सशक्त लोकतांत्रिक राष्ट्र है, जहां प्रत्येक नागरिक को अपनी बात रखने और विरोध दर्ज कराने का अधिकार है, लेकिन यह अधिकार संवैधानिक मर्यादाओं एवं कानून के दायरे में ही है। देश की शांति, अखंडता और लोकतांत्रिक व्यवस्था को प्रभावित करने वाले किसी भी प्रयास का विरोध किया जाना चाहिए। भारत की छात्रशक्ति राष्ट्रहित एवं संवैधानिक मूल्यों की रक्षा के लिए सदैव सजग और प्रतिबद्ध रहेगी।”

अभाविप गोरक्ष प्रांत सह मंत्री शुभम गोविंद राव ने कहा कि, “लोकतंत्र में विरोध प्रदर्शन करना प्रत्येक नागरिक का अधिकार है, लेकिन इस अधिकार के साथ जिम्मेदारी, अनुशासन और संवैधानिक मर्यादाओं का पालन भी आवश्यक है। चुनावी सुधारों एवं एसआईआर जैसी प्रक्रियाओं पर तथ्यपरक चर्चा होनी चाहिए, न कि उन्हें भ्रम और अविश्वास फैलाने का माध्यम बनाया जाना चाहिए। संवैधानिक संस्थाओं पर निराधार प्रश्नचिह्न खड़े करने से लोकतंत्र मजबूत नहीं होता, बल्कि जनता का विश्वास कमजोर होता है। आज का यह प्रदर्शन लोकतांत्रिक मूल्यों, राष्ट्रीय हित और संवैधानिक संस्थाओं की गरिमा के प्रति अभाविप के दृढ़ संकल्प को अभिव्यक्त करता है।”

प्रदर्शन यात्रा में अभाविप की राष्ट्रीय कार्यकारिणी सदस्य संपदा द्विवेदी,प्रांत सह मंत्री निखिल गुप्ता, बृजभूषण उपाध्याय, अजय कुशवाहा एवं प्रांत संगठन मंत्री पुनीत अग्रवाल सहित सैकड़ों की संख्या में छात्र-छात्राओं की सहभागिता रही।

हिन्दुस्थान समाचार / प्रिंस पाण्डेय

Livevns.news Desk
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