रामनगरिया में आस्था के आगे बौनी दिखी शीतलहर, दिनभर गंगा स्नान और भजन पूजन
फर्रुखाबाद, 6 जनवरी (हि.स.)। गंगातट पर स्थित पांचाल घाट पर लगी रामनगरिया में आस्था के ज्वार के सामने कड़ाके की ठंड बौनी साबित हाे रही है। आज सकट चौथ पर्व के दिन बड़ी संख्या में कल्पवासियाें, श्रद्धालुओं के साथ संत महात्माओं ने गंगा स्नान
करने के बाद पूजन अर्चन कर पुण्य कमाया।
मेला रामनगरिया में पंच दशनामी अखाड़े के अध्यक्ष सत्यगिरी महाराज ने संतों को ध्यान, साधना के गुर बताए। सत्यगिरी महाराज ने कहा कि भीषण शीतलहर हम सबकी परीक्षा ले रही है। हमारी आस्था के आगे यह शीतलहर कभी हरिभजन में रोड़ा नही बन सकती। उन्होंने कहा कि संत कभी मरते नही, तभी तो कबीर ने कहा है कि हम न मरे मरीहैय संसारा। हम को मिला जियावन हारा। महात्मा ने कहा कि आत्मा अजर ,अमर अविनाशी है। वह न कभी जन्म लेती न कभी मरती है। इसी तरह मन भी कभी नही मरता।
सत्यगिरि महाराज ने कहा कि मनुष्य जब मर जाता है तो मरने के बाद तीन दिन तक आत्मा अपने पुराने शरीर में प्रवेश करने के लिए व्याकुल होती है, लेकिन उसे शरीर न मिलने के कारण वह बहुत परेशान होती है। इसके बाद वह अपने मूल रूप में आ जाती है।उन्हाेंने कहा कि आत्मा का आहार आनंद है। वह अपने आनंद को फिर प्राप्त हो जाती है। उन्हाेंने कहा कि जिस तरह दूध के अंदर मक्खन छुपा हुआ है। दूध के सामने कोई साधक हाथ जोड़कर बैठ जाए तो वह मक्खन नहीं बन सकता। दूध से मक्खन निकालने के लिए उसे मथानी से मथना पड़ता है। इसी तरह से अपने अंदर विराजमान परमात्मा को जानने के लिए ध्यान रूपी मथानी से मंथन करना पड़ता है। चिंतन करना पड़ता है। इसके बाद जो स्थिति आती है वह मैं ब्रह्म हूं की स्थिति होती है। साधकों को चाहिए कि वह अपने अंदर बैठे परमात्मा को जानने के लिए ध्यान रूपी मथानी से परमात्मा को मथें और आत्मिक आनंद मानसिक शांति की अनुभूति करें। यही सच्चा अध्यात्म है। इस मौके पर भारी संख्या में संत महात्माओं के अलावा श्रद्धालु मौजूद रहे।
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हिन्दुस्थान समाचार / Chandrapal Singh Sengar

