मिर्जापुर से सारनाथ तक 16 से 22 जनवरी तक आआपा निकालेगी “रोज़गार दो-सामाजिक न्याय दो” पदयात्रा

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मिर्जापुर से सारनाथ तक 16 से 22 जनवरी तक आआपा निकालेगी “रोज़गार दो-सामाजिक न्याय दो” पदयात्रा


लखनऊ, 03 जनवरी (हि.स.)। आम आदमी पार्टी (आआपा) ने उत्तर प्रदेश में बेरोज़गारी, पेपर लीक, आरक्षण में घोटालों और बढ़ते सामाजिक भेदभाव को लेकर तीसरे चरण की ‘रोज़गार दो–सामाजिक न्याय दो’ पदयात्रा की शुरुआत 16 से 22 जनवरी तक करेगी। यह जानकारी शनिवार को उत्तर प्रदेश की प्रभारी व राज्यसभा सांसद संजय सिंह ने दी।

प्रदेश पार्टी मुख्यालय में पत्रकारों को सम्बोधित करते हुए संजय सिंह ने बताया कि यह पदयात्रा मीरजापुर के शहीद उद्यान से काशी–वाराणसी के सारनाथ तक लगभग 90–100 किलोमीटर के रूट पर निकाली जाएगी। उन्होंने कहा कि पार्टी का स्पष्ट उद्देश्य युवाओं को नौकरी, वंचित वर्गों को संवैधानिक न्याय और सरकार को जनता के प्रति जवाबदेह बनाना। संजय सिंह ने कहा कि यात्रा से जुड़ने के लिए नंबर 7500040004 पर मिस्ड कॉल दें या मोबाइल नंबर 8588841358 पर कॉल करें।

सांसद संजय सिंह ने कहा कि उत्तर प्रदेश में रोजगार के नाम पर एक संगठित खेल चल रहा है। “कभी पेपर लीक, कभी हाईकोर्ट से स्टे, कभी सुप्रीम कोर्ट में सरकार की अपील—नतीजा यह कि नौजवान हाथ में फाइल और आंखों में सपने लिए दर-दर भटक रहा है।” उन्होंने कहा कि लेखपाल, दरोगा, सिपाही, पीसीएस-जे जैसी परीक्षाओं में बार-बार गड़बड़ियां कराकर युवाओं का भविष्य चौपट किया गया है।

संजय सिंह ने आरोप लगाया कि भर्ती प्रक्रियाओं में ओबीसी, एससी और एसटी के संवैधानिक आरक्षण को सुनियोजित तरीके से कमजोर किया गया। “69,000 शिक्षक भर्ती हो, बांदा विश्वविद्यालय, लखीमपुर कोऑपरेटिव बैंक या पशुधन विभाग—हर जगह आरक्षण के हक़ पर डाका पड़ा। यह आरक्षण भाजपा की देन नहीं, संविधान का अधिकार है, और इसी अधिकार को कुचला जा रहा है।” उन्होंने स्पष्ट किया कि सामाजिक न्याय का मुद्दा इसलिए केंद्रीय है क्योंकि नौकरी और सम्मान—दोनों छीने जा रहे हैं। उन्होंने कहा कि प्रदेश में सामाजिक अपमान की घटनाएं भी बढ़ी हैं, कभी किसी कथावाचक की चुटिया काटी जाती है क्योंकि वह पिछड़ी जाति से आता है तो कभी एक सीआरपीएफ के जवान को घोड़ी पर चढ़ने से रोका जाता है। “यह सब उत्तर प्रदेश की तस्वीर बन चुकी है और इसी तस्वीर को बदलने के लिए यह पदयात्रा है।”

संजय सिंह ने बताया कि बेरोज़गारी से त्रस्त बुनकर समाज, रेहड़ी–पटरी वाले जिनकी दुकानों पर बुलडोज़र चला, आशा–बहुएं, आंगनबाड़ी कार्यकर्ता, रोजगार सेवक, शिक्षामित्र, नियमितीकरण और पेंशन के लिए संघर्षरत कर्मचारी—हर उस वर्ग की आवाज़ यह यात्रा बनेगी जो अपने हक़ के लिए लड़ रहा है। उन्होंने जनता से अपील की कि इस आंदोलन से जुड़ें और सरकार पर नौकरियां देने का दबाव बनाएं।

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हिन्दुस्थान समाचार / मोहित वर्मा

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