मलबा और कूड़े के ढेर से खेल अभ्यास योग्य नहीं बचा संपूर्णानंद संस्कृत विश्वविद्यालय खेल मैदान

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मलबा और कूड़े के ढेर से खेल अभ्यास योग्य नहीं बचा संपूर्णानंद संस्कृत विश्वविद्यालय खेल मैदान


वाराणसी, 19 जनवरी(हि.स.)। उत्तर प्रदेश के वाराणसी जनपद में संपूर्णानंद संस्कृत विश्वविद्यालय का खेल मैदान अब मलबा और कूड़े के ढेर से खेलने या अभ्यास योग्य नहीं बचा है। खेल मैदान में तीरंदाजी, क्रिकेट, रेसिंग, हॉकी जैसे खेलों का अभ्यास करने वाले खिलाड़ियों को मलबा आदि पड़ा हाेने से परेशानियां हो रही हैं।

संपूर्णानंद संस्कृत विश्वविद्यालय के खेल मैदान की दुर्दशा पर विश्वविद्यालय प्रशासन कुछ बोलने को तैयार नहीं है। वहीं, खिलाड़ियों की अपनी विवशता एवं पीड़ा सामने आ रही हैं। वाराणसी में क्रिकेट जगत के पुराने स्पिन गेंदबाज संजीव राय ने बताया कि संपूर्णानंद संस्कृत विश्वविद्यालय का खेल मैदान खिलाड़ियाें के अभ्यास की सबसे अच्छी जगह हुआ करती थी। आज खेल मैदान की दुर्दशा देखकर लोग अंदाजा लगा सकते हैं कि विश्वविद्यालय के क्रीड़ा अधिकारी एवं प्रशासनिक लोग वास्तव में कुछ करना नहीं चाहते।

महिला रेसिंग खिलाड़ी रंजू ने साेमवार काे कहा कि मैदान का वह पहले चार चक्कर लगाया करती थीं। आधे मैदान में ईट पत्थर, मलबा, कूड़ा और जला हुआ सामान फेंकने के चलते अब उन्हाेंने मैदान में जाना बंद कर दिया है। मैदान में दूसरे खिलाड़ियों को भी कूड़े से आने वाली दुर्गंध महसूस होती है और यह कूड़ा काफी समय से मैदान में फेंका हुआ पड़ा है।

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हिन्दुस्थान समाचार / शरद

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