भारत और नेपाल की संस्कृति एक : गोपाल

WhatsApp Channel Join Now
भारत और नेपाल की संस्कृति एक : गोपाल


भारत और नेपाल की संस्कृति एक : गोपाल


अयोध्या, 15 जनवरी (हि.स.)। पड़ोसी देश

नेपाल के पश्चिम क्षेत्र में बसने वाले थारू अनुसूचित जनजाति से जुड़े राना चौधरी व चौधरी समूह के लोगों ने गुरुवार को अयोध्या पहुंच कर श्रीराम लला के दर्शन किए।

श्रद्धालुओं के मिलन सत्र को सम्बोधित करते हुए विश्व हिन्दू परिषद के वरिष्ठ पदाधिकारी गोपाल ने आह्वान करते हुए कहा कि भारत और नेपाल की संस्कृति एक है। विधर्मी हमारे धर्म को चुनौती दे संस्कृति मिटाना चाहते हैं, पर हमारी भावी पीढ़ियों के प्रति सजगता और धर्म के प्रति भाव जाग्रत करने से इनके मंसूबे पूरे नहीं होंगे।

गोपाल ने सबसे पहले राम मन्दिर मुक्ति संघर्ष की चर्चा करते हुए कहा कि राम के जन्म स्थान को बाबर नाम के हमलावर ने ध्वस्त कर मस्जिद का निर्माण किया था। पर हिन्दू समाज कभी चुप नहीं बैठा, लगातार आन्दोलन होते रहे, शस्त्रों से लड़ाई की, साढ़े तीन हजार महिलाएं भी शस्त्र लेकर अपने धर्मस्थल के लिए उतर आईं। पराजय हुई पर संघर्ष निरंतर चलता रहा।

आजादी के बाद 1949 में 22 दिसम्बर को एक संत अपने साथ चार लोगों के साथ पहुंचे और जन्म स्थान पर राम लला को विराजित कर दिया तब से हिन्दू समाज का कब्जा हो गया। देश भर में आन्दोलन चला। 1990 में कारसेवा हुई। 1992 में ढांचा ढह गया, फिर कानून का आन्दोलन चला। सुप्रीम कोर्ट तक गया। 30 साल बाद 2019 में सुप्रीम कोर्ट ने राम मंदिर हिन्दुओं का है यह निर्णय दिया। उसके बाद सरकार ने मंदिर निर्माण के लिए ट्रस्ट बनाया। उस ट्रस्ट द्वारा मंदिर निर्माण पूर्ण हो गया। मंदिर निर्माण के लिए 11 करोड़ लोगों ने धन दिया। दुनिया के किसी मंदिर के लिए इतने लोगों से धन एकत्रीकरण नहीं किया गया। मंदिर निर्माण में पांच साल लगा। थोड़ा बहुत काम बचा है। गरिमा के अनुरूप बड़ा मंदिर बनाया गया है। इसके साथ ही परिसर में स्थापित अन्य मंदिरों की भी उन्होंने विस्तृत जानकारी दी। राम लला के विग्रह के विषय में पूरी जानकारी दी।

वरिष्ठ प्रचारक गोपाल ने कहा कि भारत एक आध्यात्मिक देश है, भगवान पर हमारा भरोसा है। धर्म के बारे में हमारी श्रद्धा है, हम धर्म नहीं छोड़ते, इसके लिए हम प्राण भी गंवाने के लिए तैयार हैं। यह भी देखना चाहिए कि राम का जीवन कैसा था। वह सभी को प्रेम देते थे। कभी अन्याय सहन नहीं किया। उसी तरह का देश हमारा भी बनना चाहिए। नेपाल और भरत अलग नहीं हैं। दोनों की संस्कृतियां एक हैं। हमें मिल कर राम की कल्पना को साकार करना है। भेदभाव विहीन समाज का निर्माण करना। सभी को प्रेम देना। वनवासियों, गिरिवासियों को गले लगाया। हमारे जीवन में भी इस बात को स्थान देना है। इसका प्रयास करना है। राम की तरह वचन के पक्के बनना। राम को राज्य मिल रहा था अथवा वनवास मिला दोनों को एक भाव से स्वीकार किया। ऐसा हमारी जीवन भी आदर्श होना चाहिए। आदर्श जीवन थोड़ा कठिन होता है। कठिनाई स्वीकारते हुए अगले पीढ़ी को धर्म की भवना सिखाना होगा। हिन्दू समाज में आलस्य बढ़ता जा रहा है। परिश्रमी कभी नहीं बिगड़ता।

समान्य तकनीकी काम के लिए हिन्दू लोग नहीं मिल रहे हैं। वे परिश्रम से दूर होते जा रहे हैं। घर में सभी एक साथ बैठने की आदत डालें। सप्ताह में एक बार पूरा परिवार साथ बैठक कर भगवान का स्मरण करें। तब परिवार अच्छा बनेगा। यहीं प्रयास करना है। बच्चों में मंदिर जाने की आदत डालना। तभी जीवन अच्छा चलेगा।

इस अवसर पर धनगढ़ी के दिलीप रोकाया, मनीराम चौधरी, राजाराम चौधरी, नेपाल प्रांत संगठन मंत्री धनुषधारी पाण्डेय, कारसेवक पुरम से वीरेंद्र, सुबोध मिश्र आदि मौजूद रहे। इस दौरान थारू समाज के प्रतिनिधि के रूप में दिलीप रोकाया ने गोपाल को नेपाल की टोपी व रुद्राक्ष की माला भेंट की।

हिन्दुस्थान समाचार / पवन पाण्डेय

Share this story