फर्रुखाबाद : आंगनबाड़ी कार्यकत्री की घोर लापरपाही, केंद्र में बंद किया नौनिहाल बच्चा

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फर्रुखाबाद : आंगनबाड़ी कार्यकत्री की घोर लापरपाही, केंद्र में बंद किया नौनिहाल बच्चा


फर्रुखाबाद, 16 जुलाई (हि.स.)। उत्तर प्रदेश के फर्रुखाबाद जनपद में थाना मऊदरवाजा क्षेत्र अंतर्गत विकास खंड बढ़पुर की मॉडल ग्राम पंचायत गुतासी में आंगनबाड़ी केंद्र की कार्यकत्री की गंभीर लापरवाही का मामला सामने आया है। यहां करीब तीन वर्षीय मासूम अनिरुद्ध पुत्र अनिल प्रजापति आंगनबाड़ी केंद्र के अंदर बंद मिला है। काफी देर तक बच्चा अंदर रोता-बिलखता रहा। संयोगवश ग्राम प्रधान की सतर्कता से बच्चे की जान जोखिम में पड़ने से बच गई। घटना के बाद ग्रामीणों में भारी आक्रोश व्याप्त है और जिम्मेदार कर्मचारियों के खिलाफ कार्रवाई की मांग उठने लगी है।

प्राप्त जानकारी के अनुसार, ग्राम प्रधान आशीष मिश्रा किसी आवश्यक कार्य से गुरुवार को ग्राम पंचायत भवन गए थे। कार्य समाप्त करने के बाद जब वह वापस लौट रहे थे, तभी उन्हें आंगनबाड़ी केंद्र की ओर से एक छोटे बच्चे के लगातार रोने की आवाज सुनाई दी। पहले तो उन्हें लगा कि केंद्र के अंदर सामान्य गतिविधि चल रही होगी, लेकिन बच्चे की लगातार तेज आवाज सुनकर उन्हें संदेह हुआ। वह तत्काल आंगनबाड़ी केंद्र के पास पहुंचे और अंदर झांककर देखा तो करीब तीन वर्ष का मासूम अनिरुद्ध कमरे के अंदर अकेला बंद था और जोर-जोर से रो रहा था।

मौके का दृश्य देखकर ग्राम प्रधान भी हैरान रह गए। उन्होंने तत्काल आंगनबाड़ी कार्यकत्री ममता को फोन कर मामले की जानकारी दी और तुरंत केंद्र पहुंचने को कहा।

सूचना मिलने के बाद कार्यकत्री मौके पर पहुंचीं और केंद्र का ताला खोलकर बच्चे को बाहर निकाला। इसके बाद मासूम को सुरक्षित उसके परिजनों के सुपुर्द किया गया।

यह प्रकरण गांव में चर्चा का विषय बन गया कि आखिर एक मासूम बच्चा केंद्र के अंदर बंद कैसे रह गया। ग्रामीणों का कहना है कि आंगनबाड़ी केंद्र छोटे बच्चों की देखभाल और सुरक्षा के लिए संचालित किए जाते हैं। ऐसे में किसी बच्चे का केंद्र के अंदर बंद रह जाना और कर्मचारियों का वहां मौजूद न होना बेहद गंभीर लापरवाही है। लोगों का कहना है कि यदि समय रहते ग्राम प्रधान को बच्चे के रोने की आवाज सुनाई न देती, तो भीषण गर्मी, घुटन या किसी अन्य कारण से कोई बड़ा हादसा भी हो सकता था।

ग्रामीणों ने पूरे मामले की निष्पक्ष जांच कराने की मांग की है। उनका कहना है कि यदि जांच में आंगनबाड़ी कार्यकत्री या अन्य कर्मचारियों की लापरवाही सामने आती है तो उनके विरुद्ध विभागीय कार्रवाई की जानी चाहिए, ताकि भविष्य में ऐसी घटनाओं की पुनरावृत्ति न हो।

ग्राम प्रधान ने बताया कि उक्त मामला

आंगनबाड़ी केंद्रों में बच्चों की सुरक्षा व्यवस्था और निगरानी व्यवस्था पर भी गंभीर सवाल खड़े करती है। सरकार द्वारा बच्चों के पोषण, शिक्षा और सुरक्षा के लिए करोड़ों रुपये खर्च किए जा रहे हैं, लेकिन यदि केंद्रों पर इस प्रकार की लापरवाही होती रही तो इन योजनाओं का उद्देश्य प्रभावित होगा। इस मामले में बीएसए से मिलकर शिकायत की जाएगी।

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हिन्दुस्थान समाचार / Chandrapal Singh Sengar

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