निजी विद्यालयों की मनमानी के खिलाफ सौंपा ज्ञापन

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निजी विद्यालयों की मनमानी के खिलाफ सौंपा ज्ञापन


--एनसीईआरटी की अनिवार्यता के बाद भी बेची जा रही है निजी प्रकाशकों की किताबें

हाथरस, 09 अप्रैल (हि.स.)। कस्बा, देहात में निजी विद्यालयों द्वारा एनसीईआरटी के स्थान पर महंगी निजी किताबें लागू करने और बिना मान्यता संचालित स्कूलों व कोचिंग सेंटरों के खिलाफ गुरुवार को एसडीएम मनीष चौधरी को एक ज्ञापन सौंपा गया। ज्ञापन तपन जौहर के नेतृत्व में प्रतिनिधिमंडल द्वारा मुख्यमंत्री, उत्तर प्रदेश शासन को सम्बोधित करते हुए दिया गया।

ज्ञापन में आरोप लगाया गया है कि शासन के स्पष्ट निर्देशों के बावजूद, क्षेत्र के अधिकांश निजी विद्यालय शिक्षा माफियाओं से मिलीभगत कर अभिभावकों को निजी प्रकाशकों की महंगी किताबें खरीदने के लिए मजबूर कर रहे हैं। इससे आम परिवारों पर अतिरिक्त आर्थिक बोझ पड़ रहा है और शासन की मंशा पर सवाल उठ रहे हैं।

प्रतिनिधिमंडल ने बताया कि कक्षा 1 से 12 तक एनसीईआरटी पाठ्यक्रम अनिवार्य है, फिर भी हर साल जानबूझकर किताबें बदल दी जाती हैं। इसका उद्देश्य पुराने सत्र की किताबों का दोबारा उपयोग रोकना और कमीशनखोरी को बढ़ावा देना है। ज्ञापन में कहा गया कि जहां केंद्र और राज्य सरकार के चुनाव पांच वर्ष में एक बार होते हैं, वहीं शिक्षा माफिया हर वर्ष नया कोर्स बदलकर आम जनता की जेब पर डाका डाल रहे हैं, जिससे सरकार की छवि भी प्रभावित हो रही है।

इसके अतिरिक्त, नगर और आसपास के क्षेत्रों में कई स्कूल तथा कोचिंग सेंटर बिना वैधानिक मान्यता के संचालित हो रहे हैं। ज्ञापन में उल्लेख किया गया कि ऐसे संस्थान विद्यार्थियों के भविष्य से खिलवाड़ कर रहे हैं और सरकार को राजस्व का भी नुकसान पहुंचा रहे हैं। प्रतिनिधिमंडल ने मांग की है कि एक जांच समिति गठित कर निजी स्कूलों में निजी प्रकाशकों की किताबों के बिक्री की जांच कराई जाए। साथ ही, बिना मान्यता संचालित स्कूलों और कोचिंग सेंटरों को चिन्हित कर तत्काल सील करने की कार्रवाई की जाए।

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हिन्दुस्थान समाचार / मदन मोहन राना

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