तकनीक के विकास के साथ अपराधी भी खोज रहे नए रास्ते : जस्टिस राजीव सिंह
लखनऊ, 25 अक्टूबर (हि.स.)। उत्तर प्रदेश स्टेट इंस्टीट्यूट ऑफ फॉरेंसिक साइंस (यूपीएसआईएफएस), लखनऊ में आयोजित तीन दिवसीय अंतरराष्ट्रीय सेमिनार ‘टेक-संगम’ का रविवार को समापन हो गया। समापन सत्र में न्यायपालिका, पुलिस, शिक्षाविदों और तकनीकी विशेषज्ञों ने साइबर अपराध की बदलती चुनौतियों, वैज्ञानिक साक्ष्यों की विश्वसनीयता, डेटा संरक्षण और आधुनिक तकनीकों के प्रभावी इस्तेमाल पर विचार साझा किए। मुख्य अतिथि इलाहाबाद हाईकोर्ट की लखनऊ पीठ के जस्टिस राजीव सिंह ने कहा कि तकनीक के विकास के साथ अपराधी भी अपराध करने के नए रास्ते खोजते हैं। ऐसे में जांच एजेंसियों और फॉरेंसिक विशेषज्ञों को हमेशा अपराधियों से एक कदम आगे रहने की जरूरत है।
समापन समारोह की शुरुआत दीप प्रज्ज्वलन से हुई। संस्थान के संस्थापक निदेशक डॉ. जीके गोस्वामी ने जस्टिस राजीव सिंह को अंगवस्त्र और स्मृति चिह्न भेंट कर सम्मानित किया। इस दौरान सेमिनार में योगदान देने वाले प्रमुख प्रतिभागियों को भी सम्मानित किया गया।
कार्यक्रम में तकनीकी नवाचारों को न्यायिक प्रक्रिया और जमीनी पुलिसिंग से जोड़ने की आवश्यकता पर विशेष जोर दिया गया। जस्टिस राजीव सिंह ने कहा कि यूपीएसआईएफएस अब केवल एक शैक्षणिक संस्थान नहीं, बल्कि बहुआयामी चिंतन और नवाचार का महत्वपूर्ण मंच बन चुका है। संस्थान का अंतरराष्ट्रीय स्तर पर अपनी पहचान बनाना उसकी मेहनत और दूरदर्शिता का प्रमाण है। उन्होंने विद्यार्थियों को मिल रहे उत्कृष्ट कैंपस प्लेसमेंट और क्वांटम तकनीक तथा फॉरेंसिक विज्ञान जैसे आधुनिक क्षेत्रों में प्रशिक्षण की सराहना की।
डेटा संरक्षण कानून की व्यावहारिक व्याख्या जरूरी
जस्टिस राजीव सिंह ने डिजिटल पर्सनल डेटा प्रोटेक्शन (डीपीडीपी) अधिनियम का उल्लेख करते हुए कहा कि कानून लागू होने के बावजूद बाजार में उपलब्ध कानूनी व्याख्याओं में व्यावहारिक और सटीक विश्लेषण की कमी है। उन्होंने संस्थान के विशेषज्ञों से संसदीय बहसों, समिति की रिपोर्टों और विशेषज्ञों के विश्लेषण के आधार पर उच्च स्तरीय मानक कमेंट्री तैयार करने का आह्वान किया। ऐसी सामग्री न्यायपालिका और कानून प्रवर्तन एजेंसियों के लिए उपयोगी मार्गदर्शक बन सकती है।
तकनीक और जमीनी पुलिसिंग का समन्वय आवश्यक
संस्थान के संस्थापक निदेशक डॉ. जीके गोस्वामी ने कहा कि डिजिटल युग में साइबर अपराध और फॉरेंसिक जांच की चुनौतियां लगातार जटिल हो रही हैं। केवल सैद्धांतिक ज्ञान से इन चुनौतियों का सामना नहीं किया जा सकता। इसके लिए तकनीकी नवाचारों को जमीनी पुलिसिंग और न्यायालयों की व्यावहारिक जरूरतों से जोड़ना जरूरी है। उन्होंने कहा कि संस्थान विद्यार्थियों को विश्वस्तरीय अवसर उपलब्ध कराने के साथ पुलिस अधिकारियों को आधुनिक साइबर कानूनों और फॉरेंसिक साक्ष्यों का व्यावहारिक प्रशिक्षण भी दे रहा है। । उन्होंने आयोजन में योगदान देने वाले संकाय सदस्यों और प्रतिभागियों का आभार जताया।
हिन्दुस्थान समाचार / बृजनंदन

