गाय पशु नहीं , बल्कि सनातन संस्कृति की आधारशिला है : जगद्गुरु शंकराचार्य स्वामी अविमुक्तेश्वरानन्द

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गाय पशु नहीं , बल्कि सनातन संस्कृति की आधारशिला है : जगद्गुरु शंकराचार्य स्वामी अविमुक्तेश्वरानन्द


फर्रुखाबाद, 04 जून (हि.स.)। गौ माता को ‘राष्ट्रीय माता’ का दर्जा दिलाने की मांग को लेकर गुरुवार को फर्रुखाबाद में ज्योतिषपीठ के जगद्गुरु शंकराचार्य स्वामी अविमुक्तेश्वरानंद सरस्वती जी महाराज के नेतृत्व में जनजागरण यात्रा निकाली गई। इस यात्रा में बड़ी संख्या में सनातन धर्म प्रेमियों, संत-महात्माओं, सामाजिक कार्यकर्ताओं और गौभक्तों ने पूरे उत्साह के साथ भाग लिया।

इस अवसर पर आयोजित जनसभा को संबोधित करते हुए जगद्गुरु शंकराचार्य स्वामी अविमुक्तेश्वरानंद सरस्वती ने कहा कि भारतीय संस्कृति में गौ माता का स्थान सर्वोच्च और पूजनीय है। उन्होंने स्पष्ट शब्दों में कहा गौ केवल एक चौपाया पशु नहीं है, बल्कि वह हमारी सनातन संस्कृति की आधारशिला है। भारतीय कृषि, स्वास्थ्य, पर्यावरण और अध्यात्म की रक्षा गौ माता के बिना अधूरी है। इसलिए उन्हें राष्ट्र की आध्यात्मिक एवं सांस्कृतिक धरोहर के रूप मे सम्मान मिलना ही चाहिए।

शंकराचार्य ने केंद्र और राज्य सरकारों का आह्वान करते हुए कहा कि गौ माता को राष्ट्रीय माता घोषित करना समय की सबसे बड़ी मांग है। जो भी सरकार इस दिशा में साहसिक और ऐतिहासिक निर्णय लेगी, पूरा संत समाज और देश का करोड़ों सनातन धर्मावलंबी सदैव उस सरकार के साथ मजबूती से खड़ा रहेगा। इसके साथ ही उन्होंने देश में गौ हत्या पर पूर्ण प्रतिबंध लगाने तथा देश भर की गौशालाओं के सुदृढ़ीकरण और विकास के लिए प्रभावी कानूनी कदम उठाने की भी मांग की।

यह जनजागरण यात्रा के दाैरान जगह-जगह मंच और तोरण द्वार बनाकर सनातनियों ने संतों पर पुष्पवर्षा की तथा आरती उतारकर आशीर्वाद लिया। यात्रा में मुख्य रूप से अंकित तिवारी, राजेश मिश्रा, डॉ. आचार्य प्रदीप नारायण शुक्ला सहित प्रबुद्ध नागरिक, सामाजिक संस्थाओं के प्रतिनिधि, संत-महात्मा और श्रद्धालु उपस्थित रहे। इससे पहले जगद्गुरु अविमुक्तेश्वरानन्द ने शीतला देवी मंदिर पर माथा टेक आशीर्वाद प्राप्त किया।

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हिन्दुस्थान समाचार / Chandrapal Singh Sengar

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