समरस समाज से ही राष्ट्र सशक्त बनेगा: प्रो.राजकुमार मित्तल
अम्बेडकर ने धर्म नहीं पाखण्ड का विरोध किया: राजकिशोर
लखनऊ, 10 अप्रैल (हि.स.)। बाबा साहब भीमराव अंबेडकर केन्द्रीय विश्वविद्यालय के एएसएसएस हाल में शुक्रवार को युवराष्ट्र संस्था की ओर से डा.भीमराव अंबेडकर के समरसता के विचार एवं राष्ट्र निर्माण की दृष्टि विषय पर संगोष्ठी का आयोजन किया गया। कार्यक्रम के मुख्य अतिथि बाबा साहब भीमराव अंबेडकर केन्द्रीय विश्वविद्यालय के कुलपति प्रो.राजकुमार मित्तल ने कहा कि समरस समाज से ही सशक्त राष्ट्र बनेगा। उन्होंने कहा कि बाबा साहब आम्बेडकर का राष्ट्र निर्माण केवल संवैधानिक ढ़ांचे तक सीमित नहीं था,बल्कि वह सामाजिक न्याय,स्वदेशी एवं सामाजिक समरसता के सिद्धान्तों पर आधारित था।
मुख्य वक्ता के रूप में संगोष्ठी को संबोधित करते हुए प्रान्त सामाजिक समरसता प्रमुख राजकिशोर ने कहा कि बाबा साहब भीमराव अम्बेडकर का चिंतन ही देश को एक रख सकता है। उन्होंने कहा कि बाबा साहब ने धर्म नहीं पाखण्ड का विरोध किया था। वह मुस्लिम तुष्टीकरण के खिलाफ थे। समाज को दिशा देने का काम बाबा साहब ने किया।
राजकिशोर ने कहा कि बाबा साहब ने पूरी दुनिया में भारत का मान बढ़ाया। बाबा साहब के जीवन में राष्ट्र प्रथम सदैव रहा। देश के ऊपर बाबा साहब का बहुत बड़ा ऋण है। प्रान्त सामाजिक समरसता प्रमुख ने कहा कि अपने समाज में विषमता का कोई स्थान नहीं है। सर्वे भवन्तु सुखिन: की हम बात करते हैं। उन्होंने कहा कि जब हमारे भगवान भेदभाव नहीं करते तो हम क्यों करते हैं। भगवान राम ने शबरी के बेर खाए,निषादराज को गले लगाया और पक्षीराज जटायु को अपनी गोद का आश्रय दिया।
संगोष्ठी की अध्यक्षता करते हुए बाबा साहब भीमराव अंबेडकर केन्द्रीय विश्वविद्यालय के कुलानुशासक प्रो. रामचन्द्रा ने कहा कि बाबा साहब भीमराव आम्बेडकर और समरसता दोनों एक दूसरे के पूरक हैं। उन्होंने कहा कि शिक्षा, संवाद, संस्कार, सम्मान, शालीनता युवाओं में होनी चाहिए। कार्यक्रम की प्रस्तावना राष्ट्रीय स्वयंसेवक संघ के सह विभाग प्रचार प्रमुख प्रो.भीम सोनकर ने रखी। संचालन अविनाश ने किया। इस अवसर पर राष्ट्रीय स्वयंसेवक संघ के प्रान्त शारीरिक शिक्षण प्रमुख भगवान सहाय, संघ के भाग प्रचारक दौलत, प्रो.दीपा द्विवेदी, डा.राजश्री, डा.अजय सिंह कुशवाहा युवराष्ट्र के सुमित अवस्थी, वाँछित सिंह, रितिक, दीपाशुं, विनीत प्रमुख रूप से उपस्थित रहे।-------------
हिन्दुस्थान समाचार / बृजनंदन

