विद्या भारती के पुरातन छात्र संगठन के मजबूत स्तम्भ : डॉ हरेश प्रताप सिंह

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विद्या भारती के पुरातन छात्र संगठन के मजबूत स्तम्भ : डॉ हरेश प्रताप सिंह


-शिक्षा केवल व्यक्तिगत उन्नति के लिए नहीं, समाज के प्रति उत्तरदायित्व निभाने के लिए : यतीन्द्र

-ज्वाला देवी सरस्वती विद्या मन्दिर इण्टर कॉलेज में विवेकानन्द जयन्ती पर हुआ युवा रत्न सम्मान समारोह

प्रयागराज, 12 जनवरी (हि.स.)। विद्या भारती के पुरातन छात्र इस संगठन के एक मजबूत स्तम्भ है। यह देखकर बहुत गर्व होता है कि हमारे आचार्यो द्वारा निर्मित किये गये भैया आज समाज में विभिन्न प्रतिष्ठित पदों पर कार्य कर रहे हैं और साथ ही समाज के प्रति अपने उत्तरदायित्व भी ठीक से निभा रहे हैं।

उक्त विचार बतौर मुख्य अतिथि लोक सेवा आयोग सदस्य डॉ. हरेश प्रताप सिंह ने सोमवार को प्रो. राजेन्द्र सिंह (रज्जू भैया) शिक्षा प्रसार समिति द्वारा संचालित ज्वाला देवी सरस्वती विद्या मन्दिर इण्टर कॉलेज सिविल लाइन्स में स्वामी विवेकानन्द की जयन्ती पर व्यक्त किया। इस अवसर पर पुरातन छात्र सम्मेलन एवं युवा रत्न सम्मान समारोह कार्यक्रम का आयोजन किया गया। उन्होंने आगे कहा कि पुरातन छात्रों को अपने विद्यालय के विकास में सकारात्मक और रचनात्मक सहयोग देना चाहिए। जिस विद्यालय से पढ़कर हम किसी योग्य बने हैं, उसके प्रति हमारा कुछ दायित्व बनता है कि हम उसके विकास में अपना सहयोग प्रदान करेें।

कार्यक्रम की अगली कड़ी में आये पुरातन छात्रों का युवा रत्न सम्मान विभिन्न पदाधिकारियों द्वारा स्मृति चिन्ह देकर किया गया। पुरातन छात्रों ने अपने अनुभव साझा करते हुए कहा कि पुराने भवन में शिक्षा प्राप्त कर हमने सीखा है कि बिना सुविधाओं के भी आगे बढ़ा जा सकता है। शिक्षा से जो संस्कार हम अपने गुरुओं से प्राप्त करते है, वह हमारे सम्पूर्ण जीवन के कार्य में झलकता है। यही वे संस्कार हैं जो समाज में हमें प्रतिष्ठा दिलाते हैं। पुरातन छात्र एवं गुरुजन मिलकर अपने अनुभवों और गतिविधियों के समन्वय से शिक्षा और विद्यार्थियों के विकास के नये मानक स्थापित कर सकते हैं। अध्यक्ष के रुप में विद्या भारती अखिल भारतीय शिक्षण संस्थान के सह संगठन मंत्री यतीन्द्र का आशीर्वचन पुरातन छात्रों के प्रति गहरे गौरव और भावनात्मक जुड़ाव को व्यक्त करता है। उन्होंने कहा कि विद्या भारती से दीक्षित भैया-बहिन आज न केवल उच्च पेशेवर पदों पर आसीन हैं, बल्कि वे समाज में उन मानवीय मूल्यों और संस्कारों के जीवंत उदाहरण बन गए हैं जो उन्हें विद्यालय में प्राप्त हुए थे। आज ये छात्र एक निष्ठावान राष्ट्रभक्त की भूमिका निभाते हुए देश के उत्थान में सक्रिय योगदान दे रहे हैं, जो शिक्षा और संस्कारों के सफल समन्वय का प्रमाण हैं।

इसके पूर्व कार्यक्रम में आये अतिथियों का परिचय विद्यालय के प्रधानाचार्य विक्रम बहादुर सिंह परिहार ने कराया तथा कार्यक्रम की प्रस्ताविकी रखते हुए उन्होने बताया कि विद्या भारती द्वारा आयोजित होने वाले पुरातन छात्र सम्मेलन का मुख्य उद्देश्य यह है कि यह संगठन न केवल अपने वर्तमान छात्रों बल्कि अपने पुराने छात्रां के साथ भी अजीवन एक अटूट सबन्ध स्थापित करके रखना चाहता है। हमारे पुरा छात्र जब किसी विशिष्ट स्थान पर पदासीन होते हैं तो उससे सम्पूर्ण विद्यालय परिवार को एक सम्बल मिलता है।

विशिष्ट अतिथि के रुप में विद्या भारती पूर्वी उप्र के सह क्षेत्रीय संगठन मंत्री डॉ. राम मनोहर तथा भारतीय शिक्षा समिति काशी प्रान्त के प्रदेश निरीक्षक शेषधर द्विवेदी भी उपस्थित रहे। कार्यक्रम में सैकड़ों की संख्या में पुरातन स्वावलम्बी छात्र एवं अन्य गणमान्य अतिथिगण उपस्थित थे। अन्त में विद्यालय के व्यवस्था प्रमुख दीपक यादव ने सभी का आभार ज्ञापन किया।

हिन्दुस्थान समाचार / विद्याकांत मिश्र

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