नकली और संदिग्ध दवाओं की सप्लाई चेन पर योगी सरकार की ताबड़तोड़ कार्रवाई

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11 जनपदों में 50 से अधिक औषधि विनिर्माण इकाइयों का सघन निरीक्षण

7 इकाइयों में गंभीर अनियमितताओं पर निर्माण व बिक्री पर तत्काल रोक

55 तैयार दवाओं और 30 कच्चे माल के नमूने भी जांच के लिए लिए गए

बंद और निष्क्रिय इकाइयों पर यूपी एफएसडीए कर रहा लाइसेंस निरस्तीकरण की तैयारी

लखनऊ, 26 अगस्त। प्रदेशवासियों को गुणवत्तापूर्ण और मानकों के अनुरूप औषधियां उपलब्ध कराने के लिए योगी सरकार ने औषधि विनिर्माण स्तर पर निगरानी और प्रवर्तन को और सख्त कर दिया है। खाद्य सुरक्षा एवं औषधि प्रशासन विभाग (एफएसडीए) की ओर से नकली, अधोमानक और संदिग्ध दवाओं की सप्लाई चेन पर प्रभावी नियंत्रण के लिए प्रदेशभर में विशेष अभियान चलाया गया। अभियान के दौरान 11 जनपदों में 50 से अधिक औषधि विनिर्माण प्रतिष्ठानों का सघन निरीक्षण किया गया। गंभीर अनियमितताएं मिलने पर 7 विनिर्माण इकाइयों के विरुद्ध औषधि एवं प्रसाधन सामग्री अधिनियम, 1940 की सुसंगत धाराओं के तहत निर्माण/बिक्री पर तत्काल रोक लगाई गई।

   नकली और संदिग्ध दवाओं की सप्लाई चेन पर योगी सरकार की ताबड़तोड़ कार्रवाई

जीएमपी और जीएलपी अनुपालन पर विशेष जोर
इस विशेष अभियान का उद्देश्य औषधि निर्माण इकाइयों में गुड मैन्युफैक्चरिंग प्रैक्टिसेस (जीएमपी), शेड्यूल-एम तथा गुड लैबोरेट्री प्रैक्टिसेस (जीएलपी), शेड्यूल-एल-1 के प्रावधानों का प्रभावी अनुपालन सुनिश्चित करना रहा।संयुक्त औषधि निरीक्षक टीमों ने निर्माण इकाइयों में कच्चे माल, पैकेजिंग सामग्री, तैयार उत्पाद, परीक्षण प्रयोगशालाओं, दस्तावेजीकरण, स्वच्छता, तापमान नियंत्रण, एचवीएसी/एएचयू सिस्टम और निर्माण प्रक्रिया की गहन जांच की।

11 जनपदों में व्यापक निरीक्षण
अभियान के तहत कानपुर में 17, मेरठ में 9, मुजफ्फरनगर में 8, सहारनपुर में 4, हापुड़ में 3, मथुरा में 3, मुरादाबाद में 2 तथा आगरा, कासगंज, रामपुर और बिजनौर में एक-एक विनिर्माण इकाई का निरीक्षण किया गया। गुणवत्ता सत्यापन के लिए 55 फिनिश्ड गुड्स और 30 रॉ मटेरियल्स/एपीआई एवं एक्सीपिएंट्स के नमूने भी प्रयोगशाला जांच के लिए संग्रहित किए गए हैं। इनके परीक्षण परिणामों के आधार पर आगे की नियमानुसार कार्रवाई की जाएगी।

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गंभीर कमियों पर 7 इकाइयों पर तत्काल कार्रवाई
निरीक्षण के दौरान क्रॉस-कंटेमिनेशन रोकने की पर्याप्त व्यवस्था न होना, माइक्रोबायोलॉजिकल परीक्षण की समुचित सुविधा का अभाव, रिकॉर्ड और वास्तविक स्टॉक में अंतर, आवश्यक परीक्षण उपकरणों की कमी, तापमान नियंत्रण की व्यवस्था न होना, एचवीएसी/एएचयू सिस्टम का काम न करना, जीएमपी मानकों के अनुरूप सुविधाओं का अभाव, स्वच्छता संबंधी गंभीर कमियां और आवश्यक तकनीकी कर्मचारियों की अनुपस्थिति जैसी अनियमितताएं सामने आईं। इन गंभीर कमियों के दृष्टिगत मेसर्स सेफकॉन आगरा लाइफ साइंसेज प्रा लि., आइडियल हेल्थकेयर लि., न्यू शक्ति फार्मास्युटिकल्स, मेसर्स विलियम ऑर्गेनिक, एस्ट्रोन फार्मास्युटिकल्स प्रा लि., मेसर्स पार फार्मास्युटिकल्स और कैथे हेल्थकेयर प्रा लि. के विरुद्ध तत्काल कार्रवाई की गई।

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जवाबदेही तय करने के साथ लाइसेंस निरस्तीकरण तक की कार्रवाई
विभाग ने स्पष्ट किया है कि निरीक्षण में बंद अथवा लंबे समय से निष्क्रिय मिली इकाइयों को कारण बताओ नोटिस जारी किया जाएगा। संतोषजनक जवाब और भौतिक सत्यापन न होने पर विनिर्माण लाइसेंस के निरस्तीकरण की संस्तुति की जाएगी। अस्थायी रूप से बंद मिली इकाइयों का रैंडम आधार पर पुनः निरीक्षण कराया जाएगा, जबकि जीएमपी/जीएलपी और शेड्यूल-एम/एल-1 के गंभीर उल्लंघन वाली सक्रिय इकाइयों के विरुद्ध नोटिस के साथ लाइसेंस निलंबन की कार्रवाई प्रस्तावित की जाएगी।

जांच रिपोर्ट में गड़बड़ी मिली तो न्यायालय में परिवाद
प्रयोगशाला में भेजे गए फिनिश्ड गुड्स और रॉ मटेरियल्स की जांच रिपोर्ट आने के बाद यदि कोई नमूना अधोमानक या नकली पाया जाता है तो संबंधित विनिर्माता के विरुद्ध सुसंगत धाराओं में माननीय न्यायालय में परिवाद दाखिल किया जाएगा।

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कच्चे माल से तैयार दवा तक पूरी सप्लाई चेन पर निगरानी
उल्लेखनीय है कि खाद्य सुरक्षा एवं औषधि प्रशासन विभाग ने औषधियों की गुणवत्ता को लेकर जीरो टॉलरेंस नीति को और प्रभावी किया है। प्रदेश की विनिर्माण इकाइयों के साथ ही उत्तराखंड एवं अन्य निकटवर्ती राज्यों से आने वाली दवाओं के स्रोतों और अंतरराज्यीय सप्लाई चेन पर भी निरंतर निगरानी रखी जा रही है। विभाग द्वारा संदिग्ध और डिफॉल्टर इकाइयों का श्रेणीबद्ध मूल्यांकन करते हुए औचक निरीक्षण एवं छापेमारी जारी रखी जाएगी। साथ ही कच्चे माल के स्रोत से लेकर तैयार दवा के वितरण तक पूरी श्रृंखला को अधिक पारदर्शी और जवाबदेह बनाने के लिए विनिर्माण इकाइयों का नियमित ऑडिट सुनिश्चित किया जाएगा।

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