यह युग स्वदेशी का है: डॉ. राजीव कुमार

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यह युग स्वदेशी का है: डॉ. राजीव कुमार


मुरादाबाद, 13 जनवरी (हि.स.)। यह युग स्वदेशी का है, जिस प्रकार वैश्विक परिदृश्य बदल रहा है। स्वदेशी एवं उद्यमिता से ही भारत आत्मनिर्भर बनेगा। भोजन, भाषा, भेष एवं शिक्षा पद्धति स्वदेशी होनी चाहिए। यह बातें स्वामी विवेकानंद जयंती के उपलक्ष्य में मंगलवार को स्वदेशी जागरण मंच एवं विभिन्न सामाजिक संगठनों द्वारा आयोजित हुई स्वदेशी संकल्प दौड़ रन फार स्वदेशी के मौके पर मंच के अखिल भारतीय विचार विभाग प्रमुख डाॅ. राजीव कुमार ने कही।

डाॅ. राजीव कुमार ने सिविल लाइन स्थित अंबेडकर पार्क से हरी झंडी दिखाकर स्वदेशी संकल्प दौड़ रन फार स्वदेशी का शुभारंभ किया। मंच के प्रांत संयोजक कपिल नारंग ने अपने संबोधन में कहा कि स्वदेशी ही राष्ट्र प्रेम की सबसे सशक्त अभिव्यक्ति है।

भाजपा के महानगर उपाध्यक्ष एवं कार्यक्रम के संयोजक राहुल शर्मा ने कहा कि हमारे प्रधानमंत्री भी स्वदेशी अपनाने की बात विभिन्न मंचों से करते रहे हैं, स्वाभिमान से जीने का रास्ता स्वावलंबन एवं स्वदेशी से ही निकलता है। कार्यक्रम का समन्वय कर रहे विभाग संयोजक प्रशांत शर्मा एवं जिला सहसंयोजक नीरज सोलंकी ने कहा स्वामी विवेकानंद के कथन उठो जागो और तब तक मत रुको जब तक लक्ष्य को प्राप्त न कर लो को युवाओं को अपने जीवन का मूल मंत्र बनाना चाहिए। युवाओं को स्वरोजगार एवं उद्यमिता का मार्ग अपनाना चाहिए, जिससे भारत आत्मनिर्भरता की ओर अग्रसर हो।

दौड़ में युवा एवं छात्र-छात्रा हाथों में स्वदेशी समर्थक नारों की तख्तियां ले कर भारत माता की जय, आज के आनंद की, जय विवेकानंद की तथा जब बाजार जाएंगे ,सामान स्वदेशी लायेंगे के नारे लगाते हुए दौड़ रहे थे।

हिन्दुस्थान समाचार / निमित कुमार जायसवाल

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