संवेदनाओं की अभिव्यक्ति और जागरूकता का सशक्त माध्यम है रंगमंच : डॉ. राज कुमार त्रिपाठी

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संवेदनाओं की अभिव्यक्ति और जागरूकता का सशक्त माध्यम है रंगमंच : डॉ. राज कुमार त्रिपाठी


कानपुर, 29 मार्च (हि.स.)। रंगमंच केवल मनोरंजन का माध्यम नहीं, बल्कि यह सामाजिक संवाद, संवेदनाओं की अभिव्यक्ति और जागरूकता का सशक्त मंच है। इसके माध्यम से समाज के विभिन्न पहलुओं को प्रभावी ढंग से प्रस्तुत किया जा सकता है। विद्यार्थियों के लिए रंगमंच व्यक्तित्व विकास का महत्वपूर्ण साधन है और इससे रचनात्मक सोच को भी बढ़ावा मिलता है। ऐसे आयोजन कला और शिक्षा के समन्वय को मजबूत करते हैं। यह बातें रविवार को अकादमी के निदेशक डॉ. राज कुमार त्रिपाठी ने कहीं।

छत्रपति शाहू जी महाराज विश्वविद्यालय में स्वामी हरिदास संगीत एवं नाट्य अकादमी द्वारा आयोजित विश्व रंगमंच दिवस उत्सव का समापन सफलतापूर्वक हुआ। कार्यक्रम का आयोजन कुलपति प्रो. विनय कुमार पाठक के मार्गदर्शन में किया गया, जिसका उद्देश्य रंगमंच को रचनात्मक अभिव्यक्ति और सामाजिक सहभागिता के सशक्त माध्यम के रूप में स्थापित करना रहा।

कार्यक्रम की शुरुआत दीप प्रज्वलन एवं स्वागत उद्बोधन के साथ हुई। मुख्य अतिथि वरिष्ठ आयुर्वेदाचार्य डॉ. वंदना पाठक तथा विशिष्ट अतिथि प्रख्यात रंगकर्मी डॉ. मीत कमल ने अपने संबोधन में रंगमंच को विचार और संवेदना का प्रभावी माध्यम बताया।

सांस्कृतिक प्रस्तुतियों में सरस्वती वंदना, कथक नृत्य और संगीतमय कार्यक्रमों ने दर्शकों को आकर्षित किया। कार्यक्रम का मुख्य आकर्षण सर्वेश्वर दयाल सक्सेना के नाटक “हवालात” का मंचन रहा, जिसका निर्देशन विकेश बाजपेयी ने किया। कलाकारों के सशक्त अभिनय और सामाजिक व्यंग्य ने दर्शकों पर गहरी छाप छोड़ी।

कार्यक्रम का संचालन आशीष आत्रेय ने किया, जबकि अंत में धन्यवाद ज्ञापन के साथ आयोजन का समापन हुआ।

हिन्दुस्थान समाचार / रोहित कश्यप

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