विद्यार्थियों को जड़ों से जोड़ती हैं कार्यशालाएं : डॉ. मिठाई लाल

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विद्यार्थियों को जड़ों से जोड़ती हैं कार्यशालाएं : डॉ. मिठाई लाल


कानपुर, 23 फरवरी (हि.स.)। हमारी समृद्ध सांस्कृतिक विरासत और पारंपरिक कलाओं का संरक्षण एवं प्रसार करना हम सभी का दायित्व है। इस तरह की कार्यशालाएं विद्यार्थियों को अपनी जड़ों से जोड़ते हुए हुनर आधारित सीख प्रदान करती हैं। यह बातें सोमवार को इंस्टीट्यूट ऑफ फाइन आर्ट्स के निदेशक डॉ. मिठाई लाल ने कही।

छत्रपति शाहू जी महाराज विश्वविद्यालय (सीएसजेएमयू) के इंस्टीट्यूट ऑफ फाइन आर्ट्स द्वारा दो दिवसीय हस्तनिर्मित ब्लैक पॉटरी निर्माण कार्यशाला का सफल आयोजन किया गया। इस कार्यशाला का आयोजन रंजीत सिंह रोजी शिक्षा केंद्र, आईआईटी कानपुर की परियोजना कार्यपालक अधिकारी रीता सिंह तथा निजामाबाद के पारंपरिक कारीगरों के सहयोग से संपन्न हुआ।

कार्यशाला का उद्घाटन विश्वविद्यालय की रिसर्च डीन डॉ. स्वेता पाण्डेय द्वारा दीप प्रज्वलन कर किया गया। कार्यशाला का मुख्य विषय ‘निजामाबाद की ब्लैक पॉटरी’ रहा, जिसके माध्यम से भारतीय लोक कला परंपरा को आधुनिक कला शिक्षा में नवाचारी ढंग से समाहित करने का प्रयास किया गया। प्रतिभागियों को ब्लैक पॉटरी की तकनीक, मिट्टी की तैयारी, आकार देने और पारंपरिक विधि से पकाने की प्रक्रिया की व्यावहारिक जानकारी दी गई।

डॉ. मिठाई लाल ने बताया कि निजामाबाद की ब्लैक पॉटरी को आधुनिक कला शिक्षा से जोड़ने के उद्देश्य से दो दिवसीय हस्तनिर्मित ब्लैक पॉटरी निर्माण कार्यशाला का आयोजन किया गया।

कार्यशाला का सफल समन्वयन डॉ. राज कुमार सिंह एवं जेबी यादव द्वारा किया गया। कार्यक्रम के अंत में अतिथियों का धन्यवाद ज्ञापन प्रस्तुत किया गया।

हिन्दुस्थान समाचार / रोहित कश्यप

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