महिलाओं की भागीदारी से ही संभव है सतत जल प्रबंधन : डॉ. कौशल कुमार
कानपुर, 22 मार्च (हि.स.)। जल संरक्षण और सतत विकास के लिए महिलाओं की भागीदारी बेहद जरूरी है, सीमित संसाधनों के बीच विवेकपूर्ण जल उपयोग ही भविष्य की सबसे बड़ी आवश्यकता है।” यह बातें रविवार को चन्द्रशेखर आज़ाद कृषि एवं प्रौद्योगिक विश्वविद्यालय (सीएसए) में विश्व जल दिवस के अवसर पर आयोजित सेमिनार में कृषि एवं वानिकी महाविद्यालय के अधिष्ठाता डॉ. कौशल कुमार ने कहीं।
गोल्डन जुबली वर्ष के तहत आयोजित इस कार्यक्रम का विषय “हार्नेस द पावर ऑफ वाटर एंड जेंडर फॉर सस्टेनेबल फ्यूचर” रहा। डॉ. कौशल कुमार ने कहा कि भारत के पास विश्व के मात्र चार प्रतिशत जल संसाधन हैं, जबकि यहां 16-17 प्रतिशत मानव और 17-18 प्रतिशत पशु आबादी निवास करती है। ऐसे में जल की बढ़ती चुनौतियों से निपटने के लिए कुशल प्रबंधन और महिलाओं की सक्रिय भागीदारी अनिवार्य है।
मुख्य अतिथि उपनिदेशक मृदा संरक्षण कमल कटियार और विशिष्ट अतिथि प्रीति गंगवार ने कृषि स्थिरता के लिए मृदा एवं जल संरक्षण को अत्यंत महत्वपूर्ण बताया। उन्होंने खेत और सामुदायिक स्तर पर जल संरक्षण के लिए समेकित प्रयासों पर जोर दिया।
अतिथि वक्ता डॉ. वीके कनौजिया और वर्ल्ड वाइल्डलाइफ फंड के राजेश बाजपेयी ने जल संरक्षण, कुशल सिंचाई तकनीकों और प्राकृतिक संसाधन प्रबंधन में सामुदायिक सहभागिता के व्यावहारिक पहलुओं को साझा किया। वहीं डॉ. मुनीश कुमार और डॉ. सर्वेश कुमार ने जलवायु परिवर्तन के प्रभाव और युवाओं की भूमिका पर प्रकाश डालते हुए विद्यार्थियों को सतत जीवनशैली अपनाने के लिए प्रेरित किया।
कार्यक्रम में डॉ. रामजी गुप्ता ने पशुपालन क्षेत्र में जल प्रबंधन के लाभ बताए। संचालन डॉ. रजत मिश्रा ने किया और अंत में धन्यवाद ज्ञापन के साथ कार्यक्रम का समापन हुआ।
हिन्दुस्थान समाचार / रोहित कश्यप

