नारी शक्ति सिर्फ एक नारा नहीं, बल्कि नए भारत की सबसे बड़ी ताकत : अल्पना रितेश गुप्ता

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नारी शक्ति सिर्फ एक नारा नहीं, बल्कि नए भारत की सबसे बड़ी ताकत : अल्पना रितेश गुप्ता


मुरादाबाद, 13 अप्रैल (हि.स.)। नारी शक्ति वंदन अधिनियम अभियान के तहत सोमवार को सिविल लाइन स्थित पीडब्ल्यूडी गेस्ट हाउस में समाज की प्रभावशाली, प्रबुद्ध, शिक्षाविद, समाजसेवी, चिकित्सा क्षेत्र से जुड़ी महिलाओं ने प्रेस वार्ता की। जिसमें बेटी बचाओ बेटी पढाओ अभियान की महानगर संयोजिका अल्पना रितेश गुप्ता ने नारी शक्ति वंदन अधिनियम पर कहा कि महिलाओं की बढ़ती भागीदारी से नीति निर्माण की दिशा अधिक संवेदनशील और समावेशी बनेगी। नारी शक्ति सिर्फ एक नारा नहीं, बल्कि नए भारत की सबसे बड़ी ताकत है।

कल्पना रितेश गुप्ता ने कहा कि नारी शक्ति वंदन अधिनियम, 2023 देश के लोकतांत्रिक इतिहास का ऐतिहासिक निर्णय है। यह कानून महिलाओं को भागीदार से निर्णयकर्ता बनाने की दिशा में बड़ा कदम है। नारी शक्ति वंदन अधिनियम के प्रमुख लाभ में लोकसभा और विधानसभाओं में 33 प्रतिशत आरक्षण होगा। नीति निर्माण अधिक संवेदनशील और जन-केंद्रित होगा। महिलाओं को लाभार्थी से नीति निर्माता बनाया जाएगा। संसद/विधानसभाओं में महिलाओं की संख्य कम हैं, इस अधिनियम के लागू होने के बाद इस अंतर यह कानून खत्म करेगा।

सुप्रसिद्ध सीएल गुप्ता आई इंस्टीट्यूट की ट्रस्टी शिखा गुप्ता ने नारी शक्ति वंदन अधिनियम पर बताया कि जब नारी सशक्त होती है, तो समाज सशक्त होता है, और जब समाज सशक्त होता है, तो राष्ट्र मजबूत होता है। नारी शक्ति वंदन अधिनियम भारत के उज्ज्वल, समावेशी और सशक्त भविष्य की आधारशिला है। आज महिलाएँ वोटिंग में पुरुषों से आगे निकल रही हैं कई चुनावों में महिलाओं का मतदान प्रतिशत पुरुषों से अधिक रहा। पंचायतों में 46 प्रतिशत महिला प्रतिनिधित्व (14.5 लाख महिलाएं) कर रही हैं।

राष्ट्रीय स्वयंसेवक संघ मेरठ प्रांत में महिला समन्वय की प्रांत सह संयोजिका मेजर डॉ मीनू मेहरोत्रा ने कहा कि प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी एवं एनडीए सरकार द्वारा लाया गया नारी शक्ति वंदन अधिनियम-2023 भारत के लोकतांत्रिक यात्रा में एक ऐतिहासिक मील का पत्थर है। संसद और विधानसभा में महिलाओं के लिए 33 प्रतिशत आरक्षण सुनिश्चित करने वाला यह संवैधानिक संशोधन केवल एक कानून नहीं बल्कि देश की करोड़ों माता बहनों और बेटियों के सम्मान का राष्ट्रीय संकल्प है।

महिला रोग विशेषज्ञ डा नीतू रस्तोगी ने कहा कि विकसित भारत 2047 का सपना, महिला नेतृत्व के बिना अधूरा है। भारत में महिलाएं वोटिंग और समाज के हर क्षेत्र में आगे बढ़ रही हैं, लेकिन राजनीति में प्रतिनिधित्व अभी भी कम है। भागीदारी बढ़ी है, लेकिन प्रतिनिधित्व अभी भी संतुलित नहीं है। इस अंतर को खत्म करने के लिए यह कानून आवश्यक है। महिलाओं के नेतृत्व का प्रभाव (वैश्विक व भारतीय संदर्भ) जब महिलाएं नेतृत्व करती हैं अर्थव्यवस्था तेजी से बढ़ती है। नीतियाँ अधिक समावेशी और संवेदनशील बनती हैं शिक्षा, स्वास्थ्य, पोषण पर अधिक ध्यान जाता है। शोध बताते हैं कि जेंडर गैप कम होने पर वैश्विक अर्थव्यवस्था में 7 ट्रिलियन डॉलर तक की वृद्धि संभव है।

आर्ट आफ लिविंग से जुड़ी योग प्रशिक्षिका रितु नारंग ने कहा कि यह कानून सिर्फ आरक्षण नहीं, सिस्टम सुधार है। यह सामाजिक न्याय, समान अवसर और सशक्त लोकतंत्र का प्रतीक है। उन्होंने बताया कि पिछले 10 वर्षों में महिला सशक्तिकरण के ठोस परिणाम सामने आए है। 32 करोड़ से अधिक महिलाओं के बैंक खाते खुले। मुद्रा योजना लगभग 68 प्रतिशत लाभार्थी महिलाएं । 10 करोड़ महिलाएँ स्वयं सहायता समूहों से जुड़ीं। पीएमएवाई (PMAY) में बड़ी संख्या में घर महिलाओं के नाम है । एसटीईएम (STEM) में 43 प्रतिशत महिला भागीदारी बढ़ गई है। इस अवसर पर भाजपा प्रांतीय परिषद सदस्य निमित जायसवाल, भाजपा महानगर महामंत्री विशाल त्यागी, जिला महामंत्री नवीन चौधरी, मीडिया प्रभारी अर्चित गुप्ता, जिला उपाध्यक्ष मयूर भाटिया आदि उपस्थित रहे।

हिन्दुस्थान समाचार / निमित कुमार जायसवाल

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