निकरा योजना में गेहूं प्रक्षेत्र दिवस आयोजित, केआरएल-283 से बढ़ेगी उपज : डॉ. खलील खान
कानपुर, 13 अप्रैल (हि.स.)। केआरएल-283 प्रजाति ऊसर भूमि में भी बेहतर उत्पादन देती है और बदलते जलवायु में तापमान वृद्धि को सहन करने में सक्षम है। इससे किसानों की उपज और आय में वृद्धि संभव है। वैज्ञानिक तरीके अपनाकर गेहूं उत्पादन को और बेहतर बनाया जा सकता है। यह बातें सोमवार को कृषि वैज्ञानिक डॉ. खलील खान ने कही।
निकरा योजना के अंतर्गत सहतावनपूर्वा गांव में गेहूं फसल के प्रक्षेत्र दिवस का आयोजन किया गया। कार्यक्रम में 30 से अधिक किसानों ने भाग लेकर उन्नत तकनीकों की जानकारी प्राप्त की। आयोजन चंद्रशेखर आजाद कृषि एवं प्रौद्योगिकी विश्वविद्यालय के अधीन कृषि विज्ञान केंद्र दलीप नगर द्वारा प्रगतिशील किसान छुन्ना लाल के खेत पर किया गया।
कार्यक्रम के दौरान कृषि वैज्ञानिकों ने बताया कि योजना के तहत किसानों के खेतों पर स्थानीय परिस्थितियों के अनुसार सूक्ष्म हस्तक्षेप कर तकनीकी सुधार किया जा रहा है। केआरएल-283 प्रजाति की उपज क्षमता 45 से 48 क्विंटल प्रति हेक्टेयर तक है और इसके दाने एक समान आकार के होते हैं।
किसानों को बीज उपचार, खेत की तैयारी और अंकुरण अवस्था में विशेष ध्यान देने की सलाह दी गई, जिससे कीट एवं रोगों पर प्रभावी नियंत्रण किया जा सके। साथ ही जिप्सम और ढैंचा की हरी खाद के उपयोग से मृदा सुधार पर भी जोर दिया गया। कार्यक्रम में उपस्थित किसानों ने नई तकनीकों को अपनाने की सहमति जताई।
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हिन्दुस्थान समाचार / मो0 महमूद

