राष्ट्रीय हथकरघा दिवस पर लखनऊ में जुटेंगे प्रदेशभर के बुनकर, मुख्यमंत्री योगी करेंगे भव्य समारोह का शुभारंभ
लखनऊ। उत्तर प्रदेश की समृद्ध हथकरघा परंपरा को राष्ट्रीय स्तर पर नई पहचान देने के उद्देश्य से 7 अगस्त को राष्ट्रीय हथकरघा दिवस के अवसर पर राजधानी लखनऊ में भव्य समारोह आयोजित किया जाएगा। लोकभवन सचिवालय ऑडिटोरियम में सुबह 10 बजे होने वाले इस कार्यक्रम में मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ मुख्य अतिथि के रूप में शामिल होंगे। समारोह का मुख्य विषय "हथकरघा : हमारी विरासत, हमारी पहचान, हमारा अभिमान" रखा गया है। इस दौरान उत्कृष्ट बुनकरों को सम्मानित किया जाएगा और हथकरघा उत्पादों की विशेष प्रदर्शनी भी लगाई जाएगी।
बुनकरों के सम्मान और हस्तशिल्प को मिलेगा नया मंच
हथकरघा एवं वस्त्रोद्योग विभाग की ओर से आयोजित इस कार्यक्रम का उद्देश्य प्रदेश के बुनकरों की कला, मेहनत और पारंपरिक शिल्प को राष्ट्रीय स्तर पर पहचान दिलाना है। समारोह में विभिन्न जिलों से आए बुनकर अपनी उत्कृष्ट कृतियों का प्रदर्शन करेंगे। साथ ही उत्कृष्ट कार्य करने वाले बुनकरों को सम्मानित कर उनके योगदान को सराहा जाएगा।
प्रमुख सचिव, हथकरघा एवं वस्त्रोद्योग विभाग, अनिल कुमार सागर (आईएएस) की ओर से जारी निमंत्रण में सभी नागरिकों से इस आयोजन में शामिल होने और प्रदेश की समृद्ध हथकरघा विरासत का साक्षी बनने का आग्रह किया गया है।
स्वदेशी आंदोलन की याद दिलाता है राष्ट्रीय हथकरघा दिवस
राष्ट्रीय हथकरघा दिवस प्रत्येक वर्ष 7 अगस्त को मनाया जाता है। यह दिन वर्ष 1905 के स्वदेशी आंदोलन की ऐतिहासिक स्मृति से जुड़ा है, जब विदेशी वस्तुओं के बहिष्कार और स्वदेशी उत्पादों को अपनाने का आह्वान किया गया था। तभी से हथकरघा उद्योग भारत की आत्मनिर्भरता, स्वदेशी सोच और पारंपरिक शिल्प का महत्वपूर्ण प्रतीक माना जाता है।
बनारसी साड़ी बनी उत्तर प्रदेश की वैश्विक पहचान
उत्तर प्रदेश की हथकरघा परंपरा देश और दुनिया में अपनी अलग पहचान रखती है। इनमें बनारसी साड़ी सबसे प्रमुख है, जिसे भौगोलिक संकेतक (जीआई) का दर्जा प्राप्त है। वाराणसी, चंदौली, मिर्जापुर, भदोही, जौनपुर और आजमगढ़ के हजारों बुनकर परिवार पीढ़ियों से इस कला को जीवित रखे हुए हैं।
मुगल काल से विकसित हुई बनारसी बुनाई अपनी सोने-चांदी की जरी, बारीक बेल-बूटों और पारंपरिक डिजाइनों के लिए विश्वभर में प्रसिद्ध है। एक असली हथकरघा बनारसी साड़ी तैयार करने में कई दिन से लेकर कई महीने तक का समय लग सकता है। यही कारण है कि इसे केवल वस्त्र नहीं, बल्कि भारतीय सांस्कृतिक विरासत का जीवंत प्रतीक माना जाता है।
लाखों लोगों की आजीविका से जुड़ा है हथकरघा उद्योग
प्रदेश के हजारों बुनकर परिवार हथकरघा उद्योग पर निर्भर हैं। यह क्षेत्र न केवल रोजगार उपलब्ध कराता है, बल्कि भारत की पारंपरिक कला और सांस्कृतिक पहचान को भी संरक्षित करता है। बदलते समय और मशीन से बनने वाले कपड़ों की चुनौती के बावजूद हथकरघा बुनकर अपनी कला को जीवित रखे हुए हैं।
बुनकरों के कौशल को बढ़ावा देने पर सरकार का फोकस
मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ के नेतृत्व में प्रदेश सरकार हथकरघा क्षेत्र को मजबूत बनाने के लिए लगातार प्रयास कर रही है। सरकार बुनकरों के कौशल संरक्षण, उन्हें सम्मान दिलाने, आधुनिक बाजार उपलब्ध कराने और उनके उत्पादों को राष्ट्रीय एवं अंतरराष्ट्रीय स्तर तक पहुंचाने पर विशेष जोर दे रही है। राष्ट्रीय हथकरघा दिवस का यह आयोजन भी इसी दिशा में एक महत्वपूर्ण पहल माना जा रहा है।
'वोकल फॉर लोकल' को मिलेगा नया बल
सरकार ने प्रदेशवासियों से अपील की है कि वे हथकरघा उत्पादों को प्राथमिकता देकर स्थानीय बुनकरों का उत्साह बढ़ाएं। इससे न केवल पारंपरिक उद्योग को मजबूती मिलेगी, बल्कि 'वोकल फॉर लोकल' और आत्मनिर्भर भारत के संकल्प को भी नई गति मिलेगी। हथकरघा केवल रोजगार का माध्यम नहीं, बल्कि भारत की सांस्कृतिक विरासत, कौशल और गौरव का प्रतीक है।

