विश्वास और समर्पण मिलकर रचते हैं इतिहास : प्रमील पाण्डेय
वाराणसी, 05 मई (हि. स.)। काशी हिन्दू विश्वविद्यालय के महामना मालवीय मिशन के संगठन मंत्री प्रमील पाण्डेय ने मंगलवार को कहा कि कल का दृश्य केवल एक राजनीतिक जीत का जश्न नहीं था, बल्कि विश्वास, समर्पण और भावनाओं का जीवंत उत्सव था। बंगाल की जीत ने भाजपा कार्यकर्ताओं के भीतर जो उमंग जगाई, वह किसी साधारण खुशी का परिणाम नहीं थी। वह वर्षों की मेहनत, संघर्ष और अटूट आस्था का अविस्मरणीय भाव था। जब कार्यकर्ता झूमते हुए सड़कों पर उतरे, उनके कदमों की थिरकन में केवल संगीत नहीं था, बल्कि उनके दिलों की धड़कन शामिल थी। ऐसा प्रतीत हो रहा था, मानो हर कदम किसी अदृश्य ऊर्जा से संचालित हो रहा हो। एक ऐसी ऊर्जा, जो भीतर की अंतरात्मा से निकलकर वातावरण में घुल रही थी। वहां बजता हुआ संगीत केवल ध्वनि नहीं था, बल्कि एक लयबद्ध अनुभूति थी, जिसे केवल वही लोग समझ सकते थे जो उस क्षण का हिस्सा थे।
प्रमील पाण्डेय ने कहा कि इस पूरे दृश्य में सबसे खास बात थी, वह अटूट विश्वास, जो भाजपा कार्यकर्ताओं के चेहरे पर साफ झलक रहा था। यह विश्वास किसी व्यक्ति विशेष में नहीं, बल्कि उस नेतृत्व में था जिसने उन्हें दिशा दी, उद्देश्य दिया और एक सपना दिखाया। जब किसी नेतृत्व पर इस स्तर का भरोसा होता है, तो सभी सीमाएं स्वतः ही समाप्त हो जाती हैं। कार्यकर्ता केवल समर्थक नहीं रहते, बल्कि उस विचारधारा के जीवंत प्रतीक बन जाते हैं। यह क्षण केवल देखने का नहीं, बल्कि महसूस करने का था। शब्द इसकी गहराई को व्यक्त करने में असमर्थ हैं। जो वहां उपस्थित थे, उन्होंने इसे अपनी आंखों में कैद किया। एक ऐसे पल के रूप में, जो आने वाले समय में गवाही देगा कि विश्वास और समर्पण मिलकर किस तरह इतिहास रचते हैं। शायद यही लोकतंत्र की असली ताकत है, जब जनमानस केवल मतदान नहीं करता, बल्कि अपनी भावनाओं से एक नए अध्याय को जन्म देता है।
हिन्दुस्थान समाचार / शरद

