मुख्यमंत्री योगी से गुहार, श्री काशी विश्वनाथ मंदिर न्यास बोर्ड के ख़ाली पद भरे जाएं

WhatsApp Channel Join Now
मुख्यमंत्री योगी से गुहार, श्री काशी विश्वनाथ मंदिर न्यास बोर्ड के ख़ाली पद भरे जाएं


—अध्यक्ष समेत पांच पद खाली

वाराणसी, 04 जुलाई (हि.स.)। बनारस बार एसोसियेशन के पूर्व महामंत्री व वरिष्ठ अधिवक्ता नित्यानंद राय ने शनिवार को उत्तर प्रदेश के मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ को स्पीड पोस्ट से पत्र भेजकर श्री काशी विश्वनाथ मंदिर न्यास के खाली पदों को भरने की गुहार लगाई है।

न्यास में अध्यक्ष सहित 05 पद खाली है। पत्र में कहा गया है कि जनवरी 83 के अध्यादेश के अनुसार काशी विश्वनाथ मंदिर न्यास का गठन किया गया। सबसे पहले न्यास का अध्यक्ष पूर्व काशी नरेश अब स्मृतिशेष विभूति नारायण सिंह को बनाया गया । 25 दिसंबर 2000 को पूर्व काशी नरेश विभूति नारायण सिंह का निधन हो गया। अध्यादेश के मुताबिक़ राज्य सरकार को पाँच पद नामित करना था। श्री काशी विश्वनाथ मंदिर के वेबसाइट के मुताबिक़ अध्यक्ष सहित 04 पद ख़ाली हैं। इसको भरा जाना ज़रूरी व न्यासंगत है। न्यास के अध्यक्ष समेत 1 तिहाई पद ख़ाली होना एक गंभीर विषय है। यह सर्वोच्च न्यायालय के आदेश दिनांक 14 मार्च 97 के भी ख़िलाफ़ है । पत्र में प्रार्थना किया गया है कि सर्वोच्च न्यायालय के आदेश मार्च 97 श्री आदि विश्वेश्वर ऑफ़ काशी विश्वनाथ बनाम स्टेट ऑफ़ यूपी एंड अदर्स में पारित आदेश की मंशा के अनुरूप व अध्यादेश जनवरी 83 के अनुरूप अध्यक्ष समेत पाँच पद बोर्ड ऑफ़ ट्रस्टी के अविलंब भरे जाए।

गौरतलब हो कि श्री काशी विश्वनाथ मंदिर में सोना चोरी हो जाने के बाद तत्कालीन कांग्रेस सरकार ने मंदिर का अधिग्रहण कर लिया था। सरकार ने मंदिर के प्रबंधन के लिए बोर्ड ऑफ़ ट्रस्टी का गठन किया। पहले बोर्ड ऑफ़ ट्रस्टी के अध्यक्ष पूर्व काशी नरेश विभूति नारायण सिंह बनाए गए। जगत गुरू श्रृंगेरी शंकराचार्य भी पदेन सदस्य बनाये गये। इसके अलावा पाँच सचिव स्तर के पांच अधिकारियो को सदस्य बनाया गया। वाराणसी के जिलाधिकारी व कमिश्नर भी बोर्ड ऑफ़ ट्रस्टी के मेंबर बनाए गए। इसके अलावा मंदिर प्रबंधन और हिन्दू धर्म के मर्मज्ञ और विद्वान लोगों में से पाँच मेम्बर उत्तर प्रदेश सरकार को नामित करना था। लेकिन आश्चर्यजनक तरीक़े से सिर्फ़ एक व्यक्ति को मुख्य कार्यपालक अधिकारी बनाकर नामित कर दिया गया। अधिवक्ता के अनुसार यह सुप्रीम कोर्ट की मंशा के अनुरुप नही है। अधिवक्ता ने बताया कि मंदिर का प्रबंधन अध्यादेश के जरिये छीन लिये जाने पर मंदिर के महंत और पुजारी ने इसे हाइकोर्ट में चुनौती दी थी। लगभग चौदह साल की मुकदमेबाजी के बाद सर्वोच्च न्यायालय ने हाई प्रोफाइल ट्रस्टियों के स्तर को देखते हुए पुजारी व महंत के आशंका को निर्मूल करार देते हुये याचिका खारिज कर दी थी। और कहा कि जहा काशी नरेश अध्यक्ष हो, श्रृंगेरी के जगदगुरु शंकराचार्य सदस्य हो, सभी हिन्दु धर्म के मर्मज्ञ व विद्वान सदस्य हो वहां गड़बड़ी कैसे होगी।

हिन्दुस्थान समाचार / श्रीधर त्रिपाठी

Share this story