बीएचयू ने पीएचडी प्रवेश प्रक्रिया में किए बड़े बदलाव, साल में दो बार होगी परीक्षा

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बीएचयू ने पीएचडी प्रवेश प्रक्रिया में किए बड़े बदलाव, साल में दो बार होगी परीक्षा


—प्रवेश परीक्षा को अधिक सुगम व पारदर्शी बनाने के लिए विद्वत परिषद् ने पारित किए प्रस्ताव

वाराणसी, 21 मई (हि.स.)। काशी हिंदू विश्वविद्यालय (बीएचयू) की विद्वत परिषद ने पीएचडी प्रवेश प्रक्रिया को अधिक पारदर्शी, सरल और विद्यार्थी-हितैषी बनाने के उद्देश्य से कई महत्वपूर्ण प्रस्तावों को मंजूरी दी है। परिषद की बैठक कुलपति प्रो. अजित कुमार चतुर्वेदी की अध्यक्षता में संपन्न हुई।

नए प्रस्तावों के अनुसार अब विश्वविद्यालय के विभागों को यह अधिकार दिया जाएगा कि वे आवश्यकता पड़ने पर पीएचडी प्रवेश में साक्षात्कार से पहले स्क्रीनिंग टेस्ट आयोजित कर सकें। अभी तक सभी पात्र अभ्यर्थियों को सीधे साक्षात्कार के लिए बुलाया जाता था लेकिन नई व्यवस्था में स्क्रीनिंग परीक्षा के आधार पर चयनित अभ्यर्थियों को ही इंटरव्यू के लिए आमंत्रित किया जाएगा। स्क्रीनिंग टेस्ट की रूपरेखा और प्रक्रिया तय करने के लिए विश्वविद्यालय स्तर पर एक समिति गठित की जाएगी, जिसे विद्वत परिषद की स्वीकृति मिल चुकी है। इसके अलावा, पीएचडी प्रवेश में मुख्य विषय और संबद्ध विषय के लिए अलग-अलग प्रक्रिया की जटिलता को समाप्त करने हेतु अब एक समेकित मेरिट सूची तैयार की जाएगी। इसी सूची के आधार पर अभ्यर्थियों को संबंधित विभागों में प्रवेश दिया जाएगा। विश्वविद्यालय प्रशासन का मानना है कि इससे प्रवेश प्रक्रिया अधिक निष्पक्ष और पारदर्शी बनेगी तथा विद्यार्थियों का भरोसा भी मजबूत होगा। गुरूवार को यह जानकारी विश्वविद्यालय के जनसम्पर्क कार्यालय ने दी। विश्वविद्यालय के प्रवक्ता ने बताया कि आरक्षण व्यवस्था को लेकर भी परिषद ने अहम निर्णय लिया है। अब आरक्षित सीटों की गणना विभाग की कुल सीटों (जिसमें मुख्य परिसर, महिला महाविद्यालय, दक्षिणी परिसर और संबद्ध महाविद्यालय शामिल होंगे) के आधार पर की जाएगी। सभी श्रेणियों की सीटों की जानकारी प्रवेश प्रक्रिया शुरू होने से पहले ही सार्वजनिक कर दी जाएगी। ताकि अभ्यर्थियों को स्पष्टता मिल सके। विद्वत परिषद ने पीएचडी प्रवेश प्रक्रिया को वर्ष में दो बार आयोजित करने के प्रस्ताव को भी मंजूरी प्रदान की है। विश्वविद्यालय का कहना है कि इससे प्रवेश प्रक्रिया अधिक समयबद्ध होगी और देशभर के प्रतिभाशाली विद्यार्थियों को बेहतर अवसर मिल सकेंगे। कुलपति प्रो. अजित कुमार चतुर्वेदी ने कहा कि विश्वविद्यालय की प्राथमिकता पीएचडी प्रवेश प्रक्रिया को अधिक जवाबदेह, पारदर्शी और पेशेवर बनाना है। उनके अनुसार नए निर्णयों से न केवल मेधावी विद्यार्थियों का बीएचयू की ओर आकर्षण बढ़ेगा, बल्कि प्रवेश प्रक्रिया भी कम समय में प्रभावी ढंग से पूरी की जा सकेगी।

हिन्दुस्थान समाचार / श्रीधर त्रिपाठी

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