भगवान श्रीकृष्ण और प्रभु श्रीराम के आदर्शों पर चलकर ही होगा राष्ट्र गौरव का पुनर्स्थापन : नितिन भारत

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भगवान श्रीकृष्ण और प्रभु श्रीराम के आदर्शों पर चलकर ही होगा राष्ट्र गौरव का पुनर्स्थापन : नितिन भारत


प्रयागराज, 09 जून (हि.स.)। भगवान श्रीकृष्ण और प्रभु श्रीराम का जीवन राष्ट्र, धर्म, संस्कृति और समाज के लिए समर्पण का सर्वोच्च उदाहरण है। उक्त बातें मंगलवार को विश्व हिंदू परिषद काशी प्रांत के कार्यकर्ता प्रशिक्षण शिविर में प्रांत संगठन मंत्री नितिन भारत ने कहीं।

उन्होंने कहा कि धर्म की स्थापना, सामाजिक समरसता और राष्ट्रीय एकात्मता के लिए दोनों महापुरुषों के आदर्श आज भी प्रासंगिक हैं तथा विश्व हिंदू परिषद इन्हीं आदर्शों को समाज में स्थापित करने का कार्य कर रही है।

विश्व हिंदू परिषद काशी प्रांत के कार्यकर्ता प्रशिक्षण शिविर में कार्यकर्ताओं को संबोधित करते हुए प्रांत संगठन मंत्री नितिन भारत ने कहा कि योगेश्वर भगवान श्रीकृष्ण सभी कलाओं के ज्ञाता, कुशल मार्गदर्शक तथा विश्व के आध्यात्मिक गुरु रहे हैं। उनके जीवन से प्रेम, करुणा, ज्ञान और धर्म के मार्ग पर चलने की प्रेरणा मिलती है।

उन्होंने कहा कि श्रीमद्भगवद्गीता में भगवान श्रीकृष्ण ने कर्मयोग, राष्ट्र रक्षा और कर्तव्य पालन का जो संदेश दिया है, वह मानव जीवन के परम लक्ष्य की प्राप्ति का मार्ग प्रशस्त करता है।

उन्होंने कहा कि भगवान श्रीकृष्ण ने धर्म की स्थापना और अधर्म के विनाश के लिए अपना संपूर्ण जीवन समर्पित किया। सामाजिक, सांस्कृतिक और आध्यात्मिक रूप से समाज को एक सूत्र में बांधने का कार्य किया, जो आज भी समाज के लिए प्रेरणास्रोत है।

नितिन भारत ने कहा कि मर्यादा पुरुषोत्तम भगवान श्रीराम का जीवन संघर्ष, त्याग, मर्यादा और आदर्शों का प्रतीक है। विपरीत परिस्थितियों में धैर्य और साहस बनाए रखने की प्रेरणा उनके जीवन से मिलती है। उन्होंने समाज के वंचित, वनवासी और आदिवासी वर्गों को सम्मान देते हुए निषादराज, शबरी और केवट जैसे पात्रों को अपने जीवन में महत्वपूर्ण स्थान दिया, जो सामाजिक समरसता और राष्ट्रीय एकात्मता का उत्कृष्ट उदाहरण है।

उन्होंने कहा कि विश्व हिंदू परिषद का उद्देश्य राष्ट्रीय गौरव और स्वाभिमान की पुनर्स्थापना करना है। वर्तमान समय में धर्मांतरण और लव जिहाद जैसी चुनौतियां हिंदू समाज के सामने गंभीर विषय हैं। संगठन स्थापना काल से ही सनातन धर्म और उसके मान-बिंदुओं की रक्षा के लिए संघर्ष करता रहा है। समाज के सहयोग और संतों के मार्गदर्शन में 500 वर्षों के संघर्ष के बाद भगवान श्रीराम जन्मभूमि पर गुलामी के प्रतीक का अंत हुआ, जो हिंदू समाज की एकता और संकल्प का परिणाम है।

उन्होंने कार्यकर्ताओं का आह्वान करते हुए कहा कि भगवान श्रीराम और भगवान श्रीकृष्ण के जीवन से प्रेरणा लेकर धर्म, संस्कृति और संस्कारों की रक्षा के लिए निरंतर कार्य करना चाहिए। समाज जागरण और संगठन विस्तार के माध्यम से राष्ट्र निर्माण में अपनी सक्रिय भूमिका निभानी चाहिए।

शिविर में कार्यकर्ताओं के लिए प्रातः जागरण, योग, प्राणायाम, व्यायाम, गीत, लेखन-पठन तथा समाचार पत्र अध्ययन सहित विभिन्न विषयों पर प्रशिक्षण सत्र आयोजित किए जा रहे हैं।

इस अवसर पर प्रांत उपाध्यक्ष सुरेश अग्रवाल, प्रांत सह मंत्री प्रभुति कांत, आद्या शंकर मिश्रा, भूपेंद्र सिंह, बृजभूषण महेश सिंह, विनेक त्रिपाठी, पवन पांडे, आशुतोष, शांतनु, शुभांगी सिंह, डॉ. दीपा यादव, रचना सिंह सहित बड़ी संख्या में कार्यकर्ता उपस्थित रहे।

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हिन्दुस्थान समाचार / रामबहादुर पाल

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