संगमनगरी के ऐतिहासिक किले के तोरण द्वार पर वंदे मातरम की धुन ने श्रद्धालुओं को किया आकर्षित

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संगमनगरी के ऐतिहासिक किले के तोरण द्वार पर वंदे मातरम की धुन ने श्रद्धालुओं को किया आकर्षित


प्रयागराज, 15 जनवरी (हि.स.)। संगमनगरी के ऐतिहासिक किले के तोरण द्वार पर वंदे मातरम की 150वीं वर्षगांठ के उपलक्ष्य मे पी ए सी की 42वीं वाहिनी ने वंदे मातरम की धुन पर संयुक्त बैंड वादन कर त्रिवेणी की तीन धाराओं के बीच देशभक्ति की चौथी मधुर धारा प्रवाहित कर मेले में आये श्रद्धालुओं का ध्यान अपनी ओर बरबस खींच लिया।

मकर संक्रांति के पावन पर्व पर संगम नहा कर अक्षयवट मार्ग से किले के रास्ते से होकर बड़े हनुमान जी की ओर बढ़ रहे श्रद्धालुओं के पांव बैंड पर वंदे मातरम की धुन सुन कर सहसा ठिठक गये। श्रद्धालुओं में शामिल नौजवानों ने जोरदार करतल ध्वनि तथा भारत माता की जय, वंदे मातरम का उद्घोष कर बैंड वादक जवानों का हौसला बढ़ाया।

कुहरा छंटते ही सबेरे लगभग 9 बजे यूनिफार्म में सजे धजे पंक्तिबद्ध नौजवानों की बैड विंग ने सेना दिवस के उपलक्ष्य में यह सार्वजनिक कार्यक्रम प्रस्तुत किया। नौजवानों ने वन्देमातरम के अतिरिक्त मेरी झोपड़ी के भाग आज खुल जाएंगे, है प्रीति जहाँ की रीत सदा मै गीत वहाँ के गाता हूं की धुन पर बैंड बजाया। वहां बड़ी संख्या में जुटे श्रद्धालुओं ने इस धुन के साथ धुन मिला कर पूरे वातावरण को देशभक्ति के रस से ओत-प्रोत कर दिया। भक्ति रस के साथ ही देशभक्ति की धारा फूट पड़ी। सेना के कैप्टन ने बैंड दल को उपहार प्रदान कर सम्मानित किया। दोपहर में श्रद्धालुओं के लिए एक विशाल भंडारा आयोजित किया गया।

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हिन्दुस्थान समाचार / रामबहादुर पाल

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