उत्तर प्रदेश में कांवड यात्रा का उत्साह, कांवड़ यात्रा मार्ग पर उमड़े शिव भक्त

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उत्तर प्रदेश में कांवड यात्रा का उत्साह, कांवड़ यात्रा मार्ग पर उमड़े शिव भक्त


कांवड़ यात्रा भगवान शिव के प्रति भक्ति और समर्पण का है प्रतीक

लखनऊ,30 जुलाई (हि.स.)। उत्तर प्रदेश में पवित्र श्रावण मास के पहले दिन गुरुवार 30 जुलाई से कांवड़ यात्रा आधिकारिक रूप से शुरू हो चुकी है। अगले कुछ दिन कांवड़िया सैकड़ों किलोमीटर की यात्रा कर विभिन्न तीर्थ स्थलों से गंगा जल भरकर लाएंगे और 11 अगस्त सावन शिवरात्रि को अपने भोले का जलाभिषेक करेंगे।

उत्तर प्रदेश में कांवड़ यात्रा की बहुत मान्यता है यहां पूर्व से लेकर पश्चिम तक कई प्रमुख शिव मंदिर हैं जहां कांवड़ यात्रा में लाए गए पवित्र जल से शिवलिंग का जलाभिषेक किया जाता है। योगी सरकार ने शिव भक्तों (कांवड़ियों) की सुरक्षा, सुविधा और सुगमता के लिए राज्यभर में कड़े इंतजाम किए हैं।

कांवड़ यात्रा का महत्व

वैदिक विद्वान पंडित अवद्येश मिश्र शास्त्री के अनुसार, कांवड़ यात्रा भगवान शिव के प्रति भक्ति और समर्पण का प्रतीक है। कांवड़ यात्रा में भक्त (कांवड़िया) श्रद्धा-भक्ति और विभिन्न प्रकार के नियमों का पालन करते हुए हरिद्वार, ऋषिकेश, गंगोत्री, गौमुख, प्रयागराज जैसे प्रमुख तीर्थ स्थलों से पवित्र गंगा जल लाकर प्रमुख शिव मंदिरों में शिवलिंग पर चढ़ाते हैं।

यूपी के किन जिलों में निकलती कांवड़ यात्रा

पश्चिमी यूपी और दिल्ली एनसीआर के कांवड़िये हरिद्वार और गौमुख जैसे धार्मिक स्थलों से गंगा जल भरते हैं और ये मेरठ के औघड़नाथ, बागपत के पुरा महादेव और गाजियाबाद के दूधेश्वर नाथ जैसे मंदिरों में जलाभिषेक करते हैं।

मेरठ और एनसीआर वालों के लिए कांवड़ रूट

मेरठ और एनसीआर (दिल्ली, गाजियाबाद, नोएडा, गुड़गांव, फरीदाबाद) के रहने वाले कांवड़िया मोदीनगर, मेरठ, खतौली, मुजफ्फरनगर और रुड़की होते हुए हरिद्वार पहुंचते हैं और जलाभिषेक के लिए गंगा जल लाते हैं। गौमुख और गंगौत्री से जल लाने वाले कांवड़िया थोड़ा और लंबा सफर तय करते हैं।

अलग-अलग जिलों के लिए विभिन्न कांवड़ मार्ग

अलग-अलग जिलों से कांवड़ यात्रा के विभिन्न मार्ग होते हैं क्योंकि ज्यादातर कांवड़ यात्री पैदल ही यह मार्ग तय करते हैं इसलिए कोशिश यह रहती है कि मार्ग छोटे से छोटा और सुरक्षित हो सके। उदाहरण के तौर पर आगरा अलीगड़ या एटा वाले कांवड़ यात्री,बुलंदशहर के नरौरा और राजघाट से कांवड़ भरते हैं।

मध्य यूपी की कांवड़ यात्रा

वहीं अगर मध्य यूपी की बात करें तो राजधानी लखनऊ के कई शिव मंदिरों, काली जी मंदिर और मनकामेश्वर महादेव मंदिर में कांवड़ का जल अर्पित किया जाता है। इसके अलावा बाराबंकी में लोधेश्वर महादेव और देवा महादेव मंदिर कांवड़ियों का प्रमुख केंद्र है।

पर्वांचल में कांवड़ यात्रा मार्ग

पूर्वांचल में काशी विश्वनाथ और महामृत्युंजय मंदिर में जलाभिषेक किया जाता है। गोरखपुर में कालेश्वर महादेव मंदिर और बलिया में नागेश्वर महादेव मंदिर है। इसके अलावा जौनपुर, आजमगढ़, मऊ और भदोही के ग्रामीण क्षेत्रों कांवड़िया वाराणसी से जल भरते हैं।

अयोध्या और प्रयागराज से भी भरी जाती है कांवड़

प्रयागराज के त्रिवेणी संगम और अयोध्या से भी कांवड़ भरी जाती है। प्रयागराज से जल लेकर गोला गोकर्ण नाथ मंदिर में चढ़ाया जाता है तो वहीं अयोध्या के सरयू से लिया गया जल बस्ती के बाबा भद्रेश्वरनाथ मंदिर में अर्पित किया जाता है।

सभी तैयारियां पूरी

निर्विघ्न कांवड़ यात्रा के लिए योगी सरकार ने सभी तैयारियां पूरी कर ली हैं। सड़कों की मरम्मत, बिजली-पानी की सुचारु व्यवस्था, चिकित्सा शिविरों की तैनाती, इन सबके पीछे यह भाव है कि किसी श्रद्धालु के पांवों में छाले न पड़ें। मार्ग पर सीसीटीवी और ड्रोन निगरानी, संवेदनशील स्थानों पर अतिरिक्त पुलिस बल, महिला श्रद्धालुओं के लिए विशेष सुरक्षा घेरा, गंगा घाटों पर गोताखोरों और जल पुलिस की तैनाती, ये सब उस भावना का विस्तार हैं जिसमें राज्य स्वयं को श्रद्धालु के सेवक के रूप में पाता है। एंटी वेनम और एंटी रेबीज इंजेक्शन की उपलब्धता, जगह-जगह शिविरों में विश्राम और पेयजल की व्यवस्था, शौचालयों की नियमित सफाई और मार्ग की रोशनी, इन सबका उद्धेश्य यही है कि भक्त किसी कष्ट में न पड़े। मार्ग पर मांस और मदिरा की दुकानें बंद रखने और दुकानों पर संचालक का नाम प्रदर्शित करने के निर्देश जारी किये गये हैं।

फुलप्रूफ तैयारियों के निर्देश

उत्तर प्रदेश सरकार ने सभी जिलों के प्रशासनिक और पुलिस अधिकारियों को कांवड़ यात्रा की फुलप्रूफ तैयारियों के निर्देश दिए हैं। जहां-जहां से कांवड़ यात्रा निकलनी है, वहां पुलिस-प्रशासन अलर्ट मोड पर है। जिलाधिकारी से लेकर विभिन्न अधिकारियों ने तैयारियों का जायजा लिया है। कई जिलों में रूट डायवर्जन किए गए हैं। जिले को सेक्टर में बांटकर सुरक्षा-व्यवस्था पुख्ता की गई है।

रूट डायवर्जन लागू

मेरठ के एसएसपी अविनाश पांडेय ने मीडिया को बताया कि पवित्र श्रावण मास प्रारंभ हो चुका है। ऐसे में पड़ोसी राज्यों उत्तराखंड, दिल्ली, हरियाणा, राजस्थान और मध्य प्रदेश से आने वाले वाहनों के लिए ट्रैफिक डायवर्जन प्लान तैयार किया गया है। यह डायवर्जन गुरुवार रात 12 बजे से लेकर 12 अगस्त 2026 की रात 12 बजे तक लागू रहेगा। उन्होंने बताया कि दूसरे प्लान के मुताबिक,चौधरी चरण सिंह पटरी कांवड़ मार्ग पर रात से हीं भारी वाहनों की आवाजाही बंद कर दी गई है। वहीं, एनएच-58 पर भी एक दिशा के सभी वाहनों का डायवर्जन शुरू कर दिया गया है। सभी वाहनों का आवागमन 4 अगस्त तक बंद कर दिया गया है। रात 12 बजे से दिल्ली-मेरठ एक्सप्रेस-वे की तरफ से जो भी वाहन मुजफ्फरनगर की ओर जाएंगे, उनको भी बंद कर दिया गया है।

गंगा एक्सप्रेस-वे से जो वाहन मेरठ के बिजौली कट पर नीचे उतरेंगे, वह यू टर्न लेते हुए बाईं लेन से मेरठ की तरफ जाएंगे। दाहिने हाथ पर वाहनों का आवागमन बंद रहेगा। यह मार्ग पूरी तरह से कावड़ यात्रियों के लिए बहाल रहेगा। मोदीपुरम में पुलिस की तरफ से वॉच टावर लगाया गया है। यहां पर जो कांवड़ शहर की तरफ आते हैं, उन पर नजर रखी जाएगी, ताकि कोई दुर्घटना न होने पाए।---------------

हिन्दुस्थान समाचार / Dr. Ashish Vashisht

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