एआई को सेवक और सहायक के रूप में इस्तेमाल करें, मालिक न बनने दें : प्रो. वी. राम गोपाल राव

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एआई को सेवक और सहायक के रूप में इस्तेमाल करें, मालिक न बनने दें : प्रो. वी. राम गोपाल राव


एआई को सेवक और सहायक के रूप में इस्तेमाल करें, मालिक न बनने दें : प्रो. वी. राम गोपाल राव


कानपुर, 13 सितंबर (हि.स.)। एआई का इस्तेमाल शिक्षा, शोध और नवाचार में सेवक और सहायक के रूप में किया जाना चाहिए, उसे मनुष्य का मालिक नहीं बनने देना चाहिए। इसके साथ हार्डवेयर और साइबर सुरक्षा पर भी समान रूप से ध्यान देने की जरूरत है।

यह बातें रविवार को बिट्स पिलानी के प्रो. वी. राम गोपाल राव ने छत्रपति शाहूजी महाराज विश्वविद्यालय में एआई मंथन 2.0 के दूसरे दिन सामान्य सत्र में कही।

उन्होंने कहा कि उच्च शिक्षा में एआई का उपयोग सीखने की प्रक्रिया को अधिक प्रभावी बनाने के साथ आजीवन सीखने के अवसर बढ़ा सकता है। विद्यार्थियों का मूल्यांकन केवल अंतिम उत्तर के आधार पर नहीं, बल्कि उनकी सोच और समस्या समाधान की प्रक्रिया के आधार पर होना चाहिए। प्रयोगशालाओं, प्रोजेक्ट और वास्तविक समस्याओं से जोड़कर विद्यार्थियों में शोध को प्रोटोटाइप, उत्पाद और स्टार्टअप में बदलने की क्षमता विकसित की जा सकती है।

आईबीएम के विशाल चहल ने कहा कि एआई के बढ़ते उपयोग के बीच कुशल प्रतिभाओं की कमी बड़ी चुनौती है। उत्तर प्रदेश एआई स्किलिंग का प्रमुख केंद्र बन सकता है। इसके लिए मानव निर्णय क्षमता, जवाबदेही, विषय विशेषज्ञता, सुरक्षा और प्रभावी शासन व्यवस्था को साथ लेकर चलना होगा। उन्होंने स्थानीय प्रतिभा, डेटा, मॉडल, हार्डवेयर और सुरक्षित डिजिटल ढांचे के विकास पर जोर दिया।

आईआईटी कानपुर के प्रो. अमय करकरे ने ऑनलाइन शिक्षा और प्रतियोगी परीक्षाओं की तैयारी से जुड़े प्रोजेक्ट ‘साथी’ की जानकारी दी। उन्होंने कहा कि एआई ट्यूटर केवल उत्तर देने वाला नहीं, बल्कि विद्यार्थी को सवालों के जरिए सही दिशा में सोचने के लिए प्रेरित करने वाला होना चाहिए। मुफ्त कोचिंग को केवल प्रसारण तक सीमित नहीं किया जा सकता, उसमें संवाद और फीडबैक जरूरी है।

आईएआरआई नई दिल्ली के डॉ. बोड्डुपल्ली मारुति प्रसन्ना ने कृषि में एआई के उपयोग पर चर्चा की। उन्होंने जलवायु, पानी, पोषक तत्व, लागत और कीट जैसी चुनौतियों के समाधान में एआई आधारित डेटा, ड्रोन और इमेज प्रोसेसिंग की उपयोगिता बताई।

आईआईटी कानपुर के प्रो. सचिदानंद त्रिपाठी ने टिकाऊ शहरों के विकास में एआई के उपयोग पर जोर दिया। उन्होंने एकीकृत डेटा, जिम्मेदार एआई और निर्णय सहायता प्रणाली के जरिए वायु गुणवत्ता, यातायात और बाढ़ जैसी समस्याओं के समाधान की संभावनाएं बताईं।

हिन्दुस्थान समाचार / रोहित कश्यप

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