सेंट्रल स्टेशन पर तत्काल चाइल्ड हेल्पडेस्क बनाने की जरूरत : देवेंद्र प्रताप सिंह
कानपुर, 07 नवंबर (हि.स.)। त्योहारों के दौरान रेलवे स्टेशन पर यात्रियों की भीड़ बढ़ने से बच्चों के गुम होने की आशंका भी बढ़ जाती है। ऐसे में बच्चों की सुरक्षा के लिए रेलवे स्टेशन पर चाइल्ड हेल्पडेस्क की व्यवस्था तत्काल होनी चाहिए। पिछले तीन महीनों में रेलवे से बरामद बच्चों की संख्या में हुई बढ़ोतरी भी चिंता का विषय है। यह बातें शनिवार को सेंट्रल रेलवे स्टेशन के निरीक्षण के दौरान बाल कल्याण समिति (सीडब्ल्यूसी) न्यायपीठ के मजिस्ट्रेट देवेंद्र प्रताप सिंह ने कहीं।
उन्होंने स्टेशन परिसर में चाइल्ड हेल्पडेस्क नहीं होने पर नाराजगी जताई। साथ ही शासन को प्लेटफार्म नंबर एक और घंटाघर की तरफ चाइल्ड हेल्पडेस्क स्थापित करने के लिए तत्काल पत्र भेजने की बात कही। निरीक्षण के दौरान जीआरपी और आरपीएफ के जवानों के साथ स्टेशन अधीक्षक अवधेश द्विवेदी और चाइल्डलाइन की टीम मौजूद रही।
इसके बाद मजिस्ट्रेट ने जीआरपी, आरपीएफ प्रभारियों और स्टेशन अधीक्षक के साथ संयुक्त बैठक कर उनकी समस्याएं सुनीं। उन्होंने बताया कि पहले रेलवे चाइल्डलाइन की ओर से हर महीने औसतन तीन से चार बच्चों के मामले प्रस्तुत किए जाते थे, लेकिन पिछले तीन महीनों में यह संख्या बढ़कर 33 हो गई है। इनमें अधिकतर बच्चे बिहार के निवासी हैं। उन्होंने सूचना मिलने पर बच्चों की त्वरित बरामदगी करने के लिए जीआरपी और आरपीएफ की सराहना भी की।
मजिस्ट्रेट ने स्टेशन अधीक्षक अवधेश कुमार द्विवेदी को सभी प्लेटफार्मों पर महिला हेल्पडेस्क स्थापित करने और चाइल्ड हेल्पलाइन के फोन नंबर व हेल्पडेस्क के संकेतक लगाने के निर्देश दिए। उन्होंने दीपावली से छठ पूजा तक यात्रियों की अधिक आवाजाही को देखते हुए सुरक्षा बलों को सतर्क रहने और बच्चों की सुरक्षा पर विशेष ध्यान देने को कहा।
इसके बाद मजिस्ट्रेट ने सुरक्षा बलों के साथ मेट्रो स्टेशन का भी निरीक्षण किया। यहां मेट्रो प्रभारी को हेल्पडेस्क के संकेतक लगाने के निर्देश दिए, ताकि जरूरत पड़ने पर यात्रियों और बच्चों को सहायता प्राप्त करने में परेशानी न हो।
हिन्दुस्थान समाचार / रोहित कश्यप

