विंध्याचल में साक्षात विराजमान हैं योगमाया : हेमलता शास्त्री

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विंध्याचल में साक्षात विराजमान हैं योगमाया : हेमलता शास्त्री


मीरजापुर, 21 मई (हि.स.)। मां विंध्यवासिनी मंदिर की छत पर गुरुवार से सात दिवसीय श्रीमद्भागवत कथा का शुभारंभ हुआ। कथा के प्रथम दिन उत्तराखंड के कैंची धाम से जुड़ी महामंडलेश्वर हेमलता शास्त्री ने मां विंध्यवासिनी की महिमा का विस्तार से वर्णन किया।

उन्होंने कहा कि श्रीमद्भागवत महापुराण में मां विंध्यवासिनी को योगमाया स्वरूप बताया गया है। जब कंस ने देवकी के आठवें गर्भ से जन्मी बालिका को मारने का प्रयास किया था, तब योगमाया उसके हाथ से छूटकर विंध्य पर्वत पर आ विराजी थीं। यही कारण है कि विंध्याचल में मां विंध्यवासिनी साक्षात पूर्ण स्वरूप में विराजमान मानी जाती हैं।

हेमलता शास्त्री ने कहा कि देशभर में जहां-जहां देवी के अंग गिरे, वहां शक्तिपीठ स्थापित हुए, लेकिन विंध्याचल वह पावन धाम है जहां मां स्वयं निवास करती हैं। उन्होंने कहा कि मां की कृपा से आयोजित इस कथा से श्रद्धालुओं को आध्यात्मिक ऊर्जा और भक्ति का अनुभव प्राप्त होगा।

सात दिवसीय कथा प्रतिदिन शाम छह बजे से रात नौ बजे तक आयोजित की जा रही है। कथा के दौरान 21 पुरोहितों द्वारा विधि-विधान से श्रीमद्भागवत पाठ, भजन-कीर्तन, आरती और प्रसाद वितरण किया जा रहा है। विंध्य कॉरिडोर के भव्य वातावरण में आयोजित कथा में बड़ी संख्या में श्रद्धालु उमड़ रहे हैं। कथा समापन पर विशेष हवन और महाआरती होगी। इस दौरान राजन पाठक समेत अन्य लोग मौजूद रहे।

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हिन्दुस्थान समाचार / गिरजा शंकर मिश्रा

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