(लीड) उप्र कैबिनेट का फैसाल, शाहजहांपुर के जलालाबाद का नाम होगा 'परशुरामपुरी'
-यूपी के पशुपालकों को मिलेगा सुरक्षा कवच, मुख्यमंत्री जोखिम प्रबंधन एवं पशुधन बीमा योजना को कैबिनेट की मंजूरी
लखनऊ, 06 जुलाई (हि.स.)। मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ की अध्यक्षता में सोमवार को कैबिनेट बैठक में जनपद शाहजहांपुर की नगर पालिका परिषद जलालाबाद क्षेत्र के अंतर्गत कस्बा/नगर जलालाबाद का नाम परिवर्तित कर 'परशुरामपुरी' किए जाने के प्रस्ताव को मंजूरी प्रदान की गई। इस निर्णय के साथ राज्य सरकार ने नगर की ऐतिहासिक एवं सांस्कृतिक पहचान के अनुरूप उसका नाम परिवर्तित करने का निर्णय लिया है। कैबिनेट के इस निर्णय से जनपद शाहजहांपुर के नगर जलालाबाद को 'परशुरामपुरी' के रूप में नई आधिकारिक पहचान प्राप्त होगी। अधिसूचना जारी होने के बाद नाम परिवर्तन का निर्णय प्रभावी हो जाएगा।
वित्त मंत्री सुरेश कुमार खन्ना ने बताया कि कैबिनेट के समक्ष प्रस्तुत प्रस्ताव में जनपद शाहजहांपुर की नगर पालिका परिषद जलालाबाद क्षेत्र के अंतर्गत स्थित कस्बा जलालाबाद का नाम 'परशुरामपुरी' किए जाने का प्रस्ताव रखा गया था। प्रस्ताव पर विचार करने के उपरांत मंत्रिपरिषद ने इसे स्वीकृति प्रदान कर दी। इस निर्णय के बाद संबंधित विभाग द्वारा नाम परिवर्तन के संबंध में आवश्यक प्रशासनिक एवं विधिक औपचारिकताएं पूरी की जाएंगी। इसके बाद सभी शासकीय अभिलेखों, विभागीय दस्तावेजों तथा अन्य आधिकारिक अभिलेखों में नगर का नाम निर्धारित प्रक्रिया के अनुसार परिवर्तित किया जाएगा।
भगवान परशुराम की जन्मस्थली के रूप में प्रसिद्ध है जलालाबाद
जनपद शाहजहांपुर स्थित नगर पालिका परिषद जलालाबाद क्षेत्रान्तर्गत कस्बा जलालाबाद भगवान परशुराम की जन्मस्थली के रूप में प्रसिद्ध है। पौराणिक कथाओं एवं विभिन्न ग्रंथों में भी इस स्थान का प्रमुखता से उल्लेख मिलता है। इसी ऐतिहासिक एवं धार्मिक महत्व को देखते हुए जनप्रतिनिधियों तथा स्थानीय निवासियों द्वारा लंबे समय से नगर का नाम भगवान परशुराम के नाम पर 'परशुरामपुरी' किए जाने की मांग की जा रही थी। भारत सरकार द्वारा भी इस प्रस्ताव पर अनापत्ति प्रदान किए जाने के बाद राज्य सरकार ने नगर पालिका परिषद जलालाबाद क्षेत्रान्तर्गत नगर जलालाबाद का नाम परिवर्तित कर 'परशुरामपुरी' किए जाने के प्रस्ताव को मंजूरी प्रदान की है।
अंतरराष्ट्रीय पदक विजेता खिलाड़ियों को सीधी भर्ती में मिलेंगे अधिक अवसर
कैबिनेट बैठक में उत्तर प्रदेश अंतरराष्ट्रीय पदक विजेता सीधी भर्ती नियमावली-2022 में विभागों के चिह्नित पदों को नियमावली में शामिल किया जाएगा, जिससे अंतरराष्ट्रीय पदक विजेता खिलाड़ियों के सेवायोजन के लिए अधिक अवसर उपलब्ध हो सकेंगे। मंत्री गिरीश चंद्र यादव ने बताया कैबिनेट के निर्णय के अनुसार संशोधित नियमावली के अंतर्गत अंतरराष्ट्रीय पदक विजेता खिलाड़ियों को विभिन्न विभागों के चिह्नित पदों पर नियुक्ति प्रदान की जाएगी। ये नियुक्तियां लोक सेवा आयोग की परिधि से बाहर रहेंगी। इससे प्रदेश के खिलाड़ियों को रोजगार के बेहतर अवसर प्राप्त होंगे तथा उत्कृष्ट प्रदर्शन करने वाले खिलाड़ियों को उनकी उपलब्धियों के अनुरूप सेवायोजन उपलब्ध कराया जा सकेगा।
मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ की अध्यक्षता में सोमवार को कैबिनेट बैठक में मुख्यमंत्री जोखिम प्रबंधन एवं पशुधन बीमा योजना (राज्य योजना) की कार्ययोजना एवं वित्तीय प्रावधान को मंजूरी दे दी गई। इस योजना का उद्देश्य प्रदेश के किसानों, पशुपालकों और डेयरी संचालकों को पशुओं की मृत्यु या दुर्घटना से होने वाले आर्थिक नुकसान से बचाना और उन्हें वित्तीय सुरक्षा प्रदान करना है। वित्तीय वर्ष 2026-27 में इस योजना के संचालन के लिए 60 करोड़ रुपये का बजट प्रावधान किया गया है। बीमा प्रीमियम का 85 प्रतिशत हिस्सा राज्य सरकार वहन करेगी।
गोरखपुर नगर निगम 80 करोड़ और मुरादाबाद नगर निगम 50 करोड़ का जारी करेंगे म्युनिसिपल बॉण्ड
कैबिनेट बैठक में नगर निगम गोरखपुर एवं मुरादाबाद द्वारा म्युनिसिपल बॉण्ड जारी किए जाने तथा अवस्थापना विकास निधि (इन्फ्रास्ट्रक्चर डेवलपमेंट फंड) से क्रेडिट रेटिंग बढ़ाने के लिए धनराशि उपलब्ध कराए जाने के प्रस्ताव को मंजूरी प्रदान की गई। इस निर्णय से दोनों नगर निगमों को शहरी अवसंरचना विकास के लिए बाजार से संसाधन जुटाने में सहायता मिलेगी।
वित्तमंत्री सुरेश कुमार खन्ना ने बताया कि प्रदेश सरकार का उद्देश्य नगर निकायों को वित्तीय रूप से अधिक सक्षम और आत्मनिर्भर बनाना है। म्युनिसिपल बॉण्ड के माध्यम से बाजार से धन जुटाने पर भारत सरकार द्वारा प्रोत्साहन राशि उपलब्ध कराई जाएगी। इसके अंतर्गत 100 करोड़ रुपये तक के बॉण्ड निर्गम पर 13 करोड़ रुपये तथा 200 करोड़ रुपये तक के बॉण्ड निर्गम पर अधिकतम 26 करोड़ रुपये का अनुदान प्रदान किए जाने का प्रावधान है। म्युनिसिपल बॉण्ड जारी करने के लिए सभी नगर निगम भारतीय प्रतिभूति एवं विनिमय बोर्ड (सेबी) के निर्धारित प्रावधानों का अनुपालन करेंगे।
गोरखपुर और मुरादाबाद में बनेंगे 100-100 बेड के आधुनिक ईएसआई अस्पताल
कैबिनेट बैठक में प्रदेश के श्रमिकों और उनके परिवारों के लिए स्वास्थ्य सुविधाओं को और अधिक मजबूत करने के लिए अहम प्रस्तावों को मंजूरी दी गई। कैबिनेट ने गोरखपुर और मुरादाबाद में 100-100 बेड के कर्मचारी राज्य बीमा निगम (ईएसआईसी) अस्पतालों तथा वाराणसी में ईएसआईसी मेडिकल कॉलेज की स्थापना के लिए भूमि आवंटन को स्वीकृति प्रदान की। योगी सरकार की ओर से इन परियोजनाओं के लिए भारत सरकार को निःशुल्क और रियायती दरों पर भूमि उपलब्ध कराई जाएगी।
मुरादाबाद में अस्पताल निर्माण के लिए ग्राम हरथला, तहसील एवं जनपद मुरादाबाद स्थित गाटा संख्या-1336/9.984 हेक्टेयर में से 2.025 हेक्टेयर राज्य सरकार की भूमि ईएसआईसी, श्रम एवं रोजगार विभाग, भारत सरकार को निःशुल्क आवंटित की जाएगी।
इसी प्रकार गोरखपुर में गीडा सेक्टर-09 स्थित संस्थागत भूखंड संख्या एएल-7, क्षेत्रफल 21,427 वर्ग मीटर (करीब 5.249 एकड़) भूमि पर 100 बेड का ईएसआईसी अस्पताल बनाया जाएगा। परियोजना को प्रोत्साहन देने के लिए भूमि की दर 8720 रुपये प्रति वर्ग मीटर के स्थान पर रियायती 2000 रुपये प्रति वर्ग मीटर निर्धारित की गई है।
श्रम एवं सेवायोजन मंत्री अनिल राजभर ने बताया कि वाराणसी में बनने वाले ईएसआईसी मेडिकल कॉलेज के लिए पिंडरा तहसील के ग्राम पिंडरा में लगभग 13 एकड़ भूमि शिक्षण संकाय के लिए भारत सरकार को निशुल्क दी जाएगी। प्रस्तावित मेडिकल कॉलेज की स्थापना में लगभग 800 करोड़ रुपये का व्यय होने का अनुमान है, जिससे बड़े पैमाने पर चिकित्सकों, पैरामेडिकल तथा संविदा स्टाफ के लिए रोजगार अवसर सृजित होंगे। कॉलेज में एमबीबीएस की अधिसंख्य सीटें उत्तर प्रदेश के अभ्यर्थियों को उपलब्ध होंगी। 50 प्रतिशत एमबीबीएस सीटें बीमित श्रमिकों के बच्चों के लिए आरक्षित रहेंगी। इसके अलावा 18 प्रतिशत सीटों पर राज्य सरकार व 7 प्रतिशत सीटों पर केंद्र सरकार के माध्यम से प्रवेश दिया जाएगा। इससे वाराणसी एवं आसपास के जनपदों के संगठित क्षेत्र के 1.45 लाख ईएसआई कार्डधारक श्रमिकों तथा उनके 5.50 लाख परिजनों को बेहतर चिकित्सा एवं चिकित्सा शिक्षा मिलेगी।
उत्तर प्रदेश स्टार्टअप नीति-2026 में प्रोत्साहन की बौछार
कैबिनेट बैठक में उत्तर प्रदेश स्टार्टअप नीति-2026 के साथ उत्तर प्रदेश प्रदेश स्टार्टअप मिशन को भी मंजूरी दे दी गई। नई नीति का उद्देश्य प्रदेश में नवाचार, उद्यमिता और निवेश को बढ़ावा देना, युवाओं के लिए नए रोजगार और स्वरोजगार के अवसर सृजित करना तथा उत्तर प्रदेश को वैश्विक स्तर का मजबूत, समावेशी स्टार्टअप इकोसिस्टम उपलब्ध कराना है।
आईटी एवं इलेक्ट्रॉनिक्स विभाग के मंत्री सुनील शर्मा ने बताया कि राज्य सरकार ने नई नीति के तहत स्टार्टअप्स को शुरुआती चरण से लेकर विस्तार (स्केल-अप) तक व्यापक वित्तीय और संस्थागत सहायता देने का प्रावधान किया है। इसके तहत सस्टेनेंस अलाउंस (भरण-पोषण भत्ता) 17,500 रुपये प्रतिमाह (एक वर्ष) से बढ़ाकर 20,000 रुपये प्रतिमाह (दो वर्ष) कर दिया गया है। वहीं प्रोटोटाइप अनुदान 5 लाख रुपये से बढ़ाकर 10 लाख रुपये और सीड फंडिंग 7.5 लाख रुपये से बढ़ाकर 15 लाख रुपये कर दी गई है। विशेष परिस्थितियों में यह सहायता 50 लाख रुपये तक बढ़ाई जा सकेगी।
उत्तर प्रदेश स्टार्टअप मिशन को कैबिनेट की मंजूरी
कैबिनेट बैठक में ‘उत्तर प्रदेश स्टार्टअप मिशन’ की स्थापना को मंजूरी दे दी गई। सोसायटी पंजीकरण अधिनियम के तहत गठित होने वाला यह मिशन आईटी एवं इलेक्ट्रॉनिक्स विभाग के प्रशासनिक नियंत्रण में स्टार्टअप और नवाचार गतिविधियों की नोडल संस्था के रूप में कार्य करेगा। मिशन का उद्देश्य वर्ष 2030 तक उत्तर प्रदेश को वन ट्रिलियन डॉलर अर्थव्यवस्था बनाने के लक्ष्य को गति देना, उद्यमिता और स्टार्टअप संस्कृति को बढ़ावा देना तथा इन्क्यूबेटर, नवाचार केंद्र, डीप-टेक इकोसिस्टम, मेंटरशिप और एक्सेलेरेशन कार्यक्रमों को मजबूत करना है।
योगी कैबिनेट ने डेटा सेंटर नीति-2026 को मंजूरी प्रदान कर दी है। इसका उद्देश्य प्रदेश को ग्रीन, एआई-रेडी और वैश्विक प्रतिस्पर्धी डेटा सेंटर हब के रूप में विकसित करना है। नीति के दो गीगावाट अतिरिक्त क्षमता विकसित करने और दो लाख करोड़ रुपये अधिक निवेश आकर्षित करने का लक्ष्य रखा गया है। इससे 50 हजार लोगों को अल्पकालीन प्रत्यक्ष रोजगार मिलने की संभावन है।
हिन्दुस्थान समाचार / दिलीप शुक्ला

