मानसून सत्र : उप्र विधान सभा की कार्यवाही तीन दिन में दो घंटे 43 मिनट चली

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मानसून सत्र : उप्र विधान सभा की कार्यवाही तीन दिन में दो घंटे 43 मिनट चली


-कुल पांच घंटे 32 मिनट की कार्यवाही में दो घंटे 49 मिनट का स्थगन रहा

लखनऊ, 05 अगस्त (हि.स.)। उत्तर प्रदेश की अठारहवीं विधान सभा का वर्ष 2026 का तृतीय सत्र तीन अगस्त से पांच अगस्त तक संपन्न हुआ। तीन दिवसीय इस सत्र के दौरान सदन की कुल तीन बैठकें आयोजित हुईं। कुल पांच घंटे 32 मिनट की कार्यवाही में दो घंटे 49 मिनट का स्थगन रहा, जबकि दो घंटे 43 मिनट तक सदन की कार्यवाही प्रभावी रूप से संचालित हुई। सत्र के दौरान विभिन्न विधायी, संसदीय एवं प्रक्रियागत कार्यों का निष्पादन किया गया। इसके साथ ही विधान सभा की कार्यवाही अनिश्चितकाल के लिए स्थगित हो गयी।

विधान सभा सचिवालय की ओर से जारी विज्ञप्ति में बताया गया कि सत्र में विभिन्न विभागों से संबंधित कुल 12 महत्वपूर्ण विधेयकों को पुनःस्थापित कर पारित किया गया। इनमें उत्तर प्रदेश राजस्व संहिता (संशोधन) विधेयक 2026, उत्तर प्रदेश लोक सेवा (अधिकरण) (संशोधन) विधेयक 2026, उत्तर प्रदेश राजस्व संहिता (द्वितीय संशोधन) विधेयक 2026, उत्तर प्रदेश दंड विधि (अपराधों का शमन और विचारणों का उपशमन) विधेयक 2026, उत्तर प्रदेश निजी विश्वविद्यालय (संशोधन) विधेयक 2026, उत्तर प्रदेश निजी विश्वविद्यालय (द्वितीय संशोधन) विधेयक 2026, उत्तर प्रदेश निजी विश्वविद्यालय (तृतीय संशोधन) विधेयक 2026, उत्तर प्रदेश निजी विश्वविद्यालय (चतुर्थ संशोधन) विधेयक 2026, रजिस्ट्रीकरण (उत्तर प्रदेश संशोधन)विधेयक 2026, भारतीय स्टाम्प (उत्तर प्रदेश संशोधन) विधेयक 2026, उत्तर प्रदेश वानिकी और औद्यानिकी विश्वविद्यालय विधेयक 2026 तथा उत्तर प्रदेश विनियोग (2026-27 का अनुपूरक) विधेयक 2026 रहे। अधिकांश विधेयक चार अगस्त को तथा अनुपूरक विनियोग विधेयक पांच अगस्त को पुनःस्थापित कर पारित किया गया।

सत्र के दौरान विधानसभा सचिवालय की याचिका समिति को कुल 435 याचिकाएं प्राप्त हुईं। परीक्षण के उपरांत 282 याचिकाएं ग्राह्य, 49 अग्राह्य तथा निर्धारित समय-सीमा के उपरांत प्राप्त होने के कारण 104 याचिकाएं व्यपगत घोषित की गईं। चार अगस्त को रात्रि 8:00 बजे के बाद प्राप्त सभी याचिकाओं को व्यपगत की श्रेणी में रखा गया।

संसदीय कार्यवाही से संबंधित विभिन्न नियमों के अंतर्गत प्राप्त सूचनाओं एवं प्रस्तावों का भी निस्तारण किया गया। नियम-103 के अंतर्गत प्राप्त सभी सात प्रस्ताव ग्राह्य पाए गए। नियम-51 के अंतर्गत दो दिनों में कुल 233 सूचनाएँ प्राप्त हुईं, जिन्हें परीक्षण के उपरांत अस्वीकार कर दिया गया। नियम-301 के अंतर्गत प्राप्त 167 तथा नियम-300 के अंतर्गत प्राप्त चार सूचनाएँ भी निर्धारित मानकों के अनुरूप न पाए जाने के कारण अस्वीकृत की गईं। इसी प्रकार नियम-311 के अंतर्गत प्राप्त सभी तीन सूचनाएं भी अस्वीकार की गईं। नियम 56 के अंतर्गत कुल प्राप्त 17 सूचनाएं प्राप्त हुई।

प्रश्न व्यवस्था के अंतर्गत इस सत्र, 2026 में कुल 2,427 प्रश्न प्राप्त हुए, जिनमें 490 तारांकित तथा 1,466 अतारांकित प्रश्न स्वीकार किए गए। इनमें से 120 उत्तरित तारांकित एवं 838 उत्तरित अतारांकित प्रश्नों के उत्तर शासन द्वारा उपलब्ध कराए गए।

उल्लेखनीय है कि कुल प्रश्नों में से 95.67 प्रतिशत प्रश्न ऑनलाइन माध्यम से प्राप्त हुए तथा उनके उत्तर भी डिजिटल माध्यम से उपलब्ध कराए गए, जिससे विधानसभा की ई-विधान प्रणाली एवं डिजिटल संसदीय व्यवस्था को और अधिक सुदृढ़ता मिली।

सत्र के दौरान संसदीय कार्यों के कुशल संचालन, विधायी कार्यों के समयबद्ध निष्पादन तथा डिजिटल संसदीय प्रक्रियाओं के प्रभावी क्रियान्वयन ने विधानसभा की कार्यप्रणाली को और अधिक पारदर्शी, आधुनिक एवं उत्तरदायी बनाने की दिशा में महत्वपूर्ण योगदान दिया।

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हिन्दुस्थान समाचार / दिलीप शुक्ला

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