स्वस्थ जीवन के लिए जीवनशैली प्रबंधन आवश्यक: प्रो.अजित कुमार चतुर्वेदी

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स्वस्थ जीवन के लिए जीवनशैली प्रबंधन आवश्यक: प्रो.अजित कुमार चतुर्वेदी


विश्व आईबीडी दिवस पर आईएमएस-बीएचयू में जनजागरूकता कार्यक्रम

वाराणसी,19 मई (हि.स.)। विश्व आईबीडी दिवस के अवसर पर मंगलवार को काशी हिन्दू विश्वविद्यालय चिकित्सा विज्ञान संस्थान के गैस्ट्रोएंटरोलॉजी विभाग की पहल पर सर सुन्दरलाल चिकित्सालय के डॉक्टर्स लाउंज में एक जनजागरूकता कार्यक्रम का आयोजन किया गया। कार्यक्रम में 300 से अधिक मरीजों एवं उनके परिजनों ने उत्साहपूर्वक सहभागिता की। इस कार्यक्रम का उद्देश्य समाज में इंफ्लेमेटरी बॉवेल डिजीज (आईबीडी) जैसी जटिल एवं दीर्घकालिक बीमारी के प्रति जागरूकता फैलाना, इसके समय पर निदान एवं आधुनिक उपचार पद्धतियों की जानकारी देना तथा मरीजों को संतुलित एवं स्वस्थ जीवनशैली अपनाने के लिए प्रेरित करना था।

कार्यक्रम में बतौर मुख्य अतिथि बीएचयू कुलपति प्रो. अजित कुमार चतुर्वेदी ने स्वस्थ जीवन के लिए जीवनशैली प्रबंधन पर खासा बल दिया। उन्होंने कहा कि यदि व्यक्ति अपनी जीवनशैली को संतुलित रखे, दैनिक दिनचर्या की गुणवत्ता में सुधार करे, संतुलित आहार अपनाए तथा अनुशासित जीवन व्यतीत करे, तो वह स्वस्थ जीवन की दिशा में पहला और सबसे महत्वपूर्ण कदम उठा सकता है। प्रो.चतुर्वेदी ने मधुमेह एवं उच्च रक्तचाप जैसी जीवनशैली संबंधी बीमारियों का उल्लेख करते हुए कहा कि बदलती जीवनशैली के कारण ये समस्याएं तेजी से बढ़ रही हैं, किन्तु संतुलित आहार, नियमित दिनचर्या, समय पर दवा एवं उचित जागरूकता के माध्यम से इन्हें प्रभावी रूप से नियंत्रित किया जा सकता है। विशिष्ट अतिथियों चिकित्सा विज्ञान संस्थान के निदेशक प्रो. एस. एन. संखवार, चिकित्सा संकाय के प्रमुख प्रो. संजय गुप्ता तथा चिकित्सा अधीक्षक, सर सुन्दरलाल चिकित्सालय,प्रो. के. के. गुप्ता ने गैस्ट्रोएंटरोलॉजी विभाग के प्रयासों की सराहना की। अन्य विशेषज्ञों ने बताया कि आईबीडी मुख्य रूप से आंतों में सूजन से संबंधित बीमारी है, जिसके कारण पेट दर्द, बार-बार दस्त होना, कमजोरी, वजन घटना एवं मल में रक्तस्राव जैसी समस्याएं हो सकती हैं। समय पर उपचार न मिलने पर यह बीमारी गंभीर एवं जानलेवा भी हो सकती है।

गैस्ट्रोएंटरोलॉजी विभागाध्यक्ष प्रो. देवेश प्रकाश यादव ने बताया कि पिछले कुछ वर्षों में आईबीडी मरीजों की संख्या लगातार बढ़ रही है, किन्तु समय पर निदान एवं उचित उपचार के माध्यम से मरीज सामान्य जीवन व्यतीत कर सकते हैं। उन्होंने जानकारी दी कि विभाग में वर्ष 2018 से संचालित समर्पित आईबीडी क्लीनिक में अब तक लगभग 2,000 मरीज पंजीकृत हो चुके हैं।

उन्होंने कहा कि आईबीडी जैसी बीमारियों के प्रति जागरूकता फैलाना अत्यंत आवश्यक है, क्योंकि प्रारंभिक अवस्था में पहचान होने पर इसका प्रभावी उपचार संभव हो जाता है। कार्यक्रम के दौरान डॉ. अंकिता ने उपस्थित लोगों को संबोधित करते हुए आईबीडी जैसी जटिल बीमारियों के प्रति जागरूकता बढ़ाने की आवश्यकता पर चर्चा की। कार्यक्रम में प्रो. एस. के. शुक्ला, प्रो. अनुराग कुमार तिवारी, प्रो. विनोद कुमार एवं प्रो. ब्रजेश कुमार सहित वरिष्ठ संकाय सदस्यों, वरिष्ठ रेजिडेंट्स, शोधार्थियों एवं स्वास्थ्यकर्मियों ने सक्रिय सहभागिता निभाई।

—मरीजों के लिए आहार एवं जीवनशैली प्रबंधन पर एक विशेष सत्र

विभाग की आहार विशेषज्ञ शिवानी त्रिपाठी ने मरीजों एवं उनके परिजनों को पोषण संबंधी देखभाल के बारे में विस्तृत जानकारी दी। उन्होंने मरीजों को हल्का, सुपाच्य एवं पौष्टिक भोजन लेने की सलाह दी। ताजे फल, उबली हुई सब्जियाँ, दही, पर्याप्त मात्रा में पानी एवं प्रोटीन युक्त भोजन को लाभकारी बताया गया, जबकि मसालेदार भोजन, जंक फूड, तले हुए खाद्य पदार्थ, धूम्रपान, मदिरापान एवं अत्यधिक कैफीन से बचने की सलाह दी गई, क्योंकि ये आंतों की सूजन को बढ़ा सकते हैं। कार्यक्रम में प्रश्नोत्तर सत्र एवं परामर्श शिविर का भी आयोजन किया गया, जिसमें मरीजों एवं उनके परिजनों ने सक्रिय सहभागिता करते हुए बीमारी से संबंधित अनेक प्रश्न पूछे। मरीजों के प्रश्नों का उत्तर प्रो. देवेश प्रकाश यादव, प्रो. विनोद कुमार एवं प्रो. अनुराग कुमार तिवारी ने दिया।

हिन्दुस्थान समाचार / श्रीधर त्रिपाठी

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