'भाक्काटे' के शोर से गुलजार हुई गंगा पार की रेती, महापौर ने काटा नगर आयुक्त की पतंग
—काशी की पुरातन परंपरा को धार देने के लिए नगर निगम की पहलदो दिवसीय पतंग प्रतियोगिता,अगले साल से राष्ट्रीय स्तर पर होगी प्रतियोगिता, 5 लाख होगा प्रथम पुरस्कार
वाराणसी, 12 जनवरी (हि.स.)। उत्तर प्रदेश की धार्मिक नगरी वाराणसी में मकर संक्रांति की दस्तक के साथ ही गंगा नदी के उस पार रेती में सोमवार को 'भाक्काटे...भाक्काटे' (पतंक कटने के बाद उत्साह में बाेला जाने वाला स्थानीय शब्द) का शोर गुंजायमान रहा। अवसर रहा नगर निगम की ओर से आयोजित दो दिवसीय पतंग प्रतियोगिता का। पहले दिन ही काशी की परंपरा, स्वाद और रोमांच का अद्भुत संगम देखने को मिला।
खिली धूप के बीच आसमान रंग-बिरंगी पतंगों से पट गया और रेती पर काशी के खान-पान की खुशबू भी बिखरी रही। इस प्रतियोगिता का औपचारिक शुभारंभ बेहद दिलचस्प रहा। महापौर अशोक कुमार तिवारी और नगर आयुक्त हिमांशु नागपाल ने खुद परेता पकड़ी और पतंग की डोर थामकर पेंच लड़ाने मैदान में उतरे। दोनों के बीच हुए मुकाबले में महापौर के दांव भारी पड़े और देखते ही देखते नगर आयुक्त की पतंग कटकर हवा में गोते खाने लगी। जैसे ही नगर आयुक्त का पेंच कटा, पूरी रेती 'भाक्काटे' की गूंज से सराबोर हो गई।
—कचौड़ी-जलेबी के नाश्ते ने बढ़ाया उत्साह
काशी की पतंगबाजी बिना जायके के अधूरी है। प्रतियोगिता के दौरान प्रतिभागियों और मेहमानों के लिए बनारसी कचौड़ी और गरमा-गरम जलेबी के नाश्ते का विशेष प्रबंध था। रेती पर एक ओर पेंच लड़ रहे थे, तो दूसरी ओर लोग कचौड़ी-जलेबी का आनंद लेते हुए अपनी टीम का उत्साह बढ़ा रहे थे।
——रील की दुनिया से निकलकर खेल के मैदान में आएं युवा: महापौर
इस अवसर पर महापौर अशोक कुमार तिवारी ने कहा कि काशी में पतंगबाजी सदियों पुरानी परंपरा है। एक दौर था जब मकर संक्रांति से एक माह पूर्व ही हर घर की छत से 'भाक्काटे' की आवाजें सुनाई देने लगती थीं। उन्होंने चिंता जताते हुए कहा, आजकल के युवा सोशल मीडिया और रील बनाने में इतने व्यस्त हो गए हैं कि वे अपने पारंपरिक खेलों को भूलते जा रहे हैं। उन्होंने कहा कि हम इस परंपरा को मरने नहीं देंगे। इस मौके पर महापौर ने घोषणा की कि अगले साल से इस प्रतियोगिता को राष्ट्रीय स्वरूप दिया जाएगा। इसमें देश भर के पतंगबाजों को ऑनलाइन रजिस्ट्रेशन के माध्यम से आमंत्रित किया जाएगा। अगले साल पुरस्कार राशि भी ऐतिहासिक होगी।।
इसमें प्रथम पुरस्कार: 5 लाख रुपये, द्वितीय पुरस्कार: 2.51 लाख रुपये, तृतीय पुरस्कार: 1.51 लाख रुपये होगी।
——रेती पर छिड़ा 'आसमानी युद्ध', क्वाटर फाइनल में पहुंची चार टीमें
प्रतियोगिता के पहले दौर में कुल आठ मैच खेले गए, जिसमें खिलाड़ियों ने हवा के रुख को भांपते हुए कड़े पेंच लड़ाए। शुरुआती भिड़ंत में फिफ्टी-फिफ्टी काशी काइट क्लब, बाजीगर काइट क्लब, फायर काइट क्लब, ट्रिपल ए काइट क्लब, वाराणसी काइट कल्चर, मां संकठा, इंटरनेशनल काइट क्लब और दीप काइट क्लब ने अपने-अपने मैच जीतकर अगले दौर में प्रवेश किया। क्वार्टर फाइनल के चरण में रोमांच दोगुना हो गया। यहां आठ टीमों के बीच चार नॉकआउट मुकाबले हुए। फिफ्टी-फिफ्टी काशी बनाम फायर काइट क्लब: 'फायर काइट क्लब' ने अपने आक्रामक तेवरों से विपक्षी पतंग को आसमान में ही काट दिया। इसी तरह फ्रीडम काइट क्लब बनाम स्काई लाइन काइट क्लब के बीच हुए मुकाबले मे तकनीकी श्रेष्ठता दिखाते हुए 'स्काई लाइन' ने मैच जीता।
बाजीगर काइट क्लब बनाम एयर लाइन्स काइट क्लब: हवा की गति का लाभ उठाते हुए 'एयर लाइन्स' ने बाजी मारी। बनारस काइट क्लब बनाम रॉयल काइट क्लब: मेजबान 'बनारस काइट क्लब' ने रॉयल टीम को मात देकर अंतिम चार में जगह बनाई।
—इनकी रहीं खास मौजूदगी
इस मौके पर पाषदों में सुरेश कुमार चौरसिया, प्रवीन राय, चंद्रनाथ मुखर्जी, राजेश यादव चल्लू, विवेक कुशवाहा, सिंधु सोनकर, संजय गुजराती, कनक लता मिश्रा, मदन मोहन दुबे ,सीमा वर्मा, विजय द्विवेदी सहित अन्य पार्षद,अपर नगर आयुक्त सविता यादव सहित निगम के अधिकारी भी रहे।
हिन्दुस्थान समाचार / श्रीधर त्रिपाठी

