काशी में जुटे देश-विदेश के चित्रकार, राम-कृष्ण-शिव की सांस्कृतिक विरासत को कैनवास पर उकेर रहे

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काशी में जुटे देश-विदेश के चित्रकार, राम-कृष्ण-शिव की सांस्कृतिक विरासत को कैनवास पर उकेर रहे


—पद्मश्री सम्मानित दुलारी देवी, पद्मश्री श्याम शर्मा एवं पद्मश्री अद्वैत गणनायक भी चित्रकला प्रदर्शनी में शामिल

वाराणसी, 31 अक्टूबर (हि.स.)। उत्तर प्रदेश की धार्मिक नगरी काशी में भारतीय कला एवं सांस्कृतिक विरासत के संरक्षण और संवर्धन के उद्देश्य से तीन दिवसीय अंतरराष्ट्रीय चित्रकला एवं छायाचित्र शिविर की शुरूआत शनिवार से हुई। गंगा महासभा एवं ललित कला अकादमी के संयुक्त तत्वावधान में आयोजित इस शिविर में देश के विभिन्न राज्यों के साथ मॉरीशस, श्रीलंका और बांग्लादेश के कलाकारों सहित कुल 50 चित्रकार प्रतिभाग कर रहे है। इस अंतरराष्ट्रीय कला शिविर का विषय “राम, कृष्ण और शिव की पावन भूमि उत्तर प्रदेश : धरोहर संरक्षण एवं संवर्धन” रखा गया है। इसके अंतर्गत देश-विदेश से आए कलाकार तीन दिनों तक काशी की सांस्कृतिक चेतना, उत्तर प्रदेश की ऐतिहासिक एवं आध्यात्मिक विरासत, भारतीय परंपराओं और लोकजीवन के विविध आयामों को अपनी कलात्मक अभिव्यक्ति के माध्यम से कैनवास पर उकेरेंगे।

आयोजक संस्था के अनुसार, शिविर में तैयार की जाने वाली सभी कलाकृतियों की भव्य प्रदर्शनी तीन नवंबर से पांच नवंबर 2026 तक रुद्राक्ष अंतरराष्ट्रीय सहयोग एवं सम्मेलन केंद्र की शिंजो आबे कला दीर्घा में आयोजित की जाएगी। इस प्रदर्शनी में दर्शकों को देश-विदेश के कलाकारों की रचनात्मक दृष्टि से उत्तर प्रदेश की धार्मिक, आध्यात्मिक, ऐतिहासिक एवं सांस्कृतिक विरासत को देखने और समझने का अवसर मिलेगा। इस आयोजन का उद्देश्य केवल चित्रों का सृजन करना नहीं, बल्कि कला के माध्यम से भारतीय सभ्यता की उन सांस्कृतिक जड़ों को अभिव्यक्त करना है, जिनका आधार भगवान श्रीराम, श्रीकृष्ण और भगवान शिव की परंपराओं में निहित है। उत्तर प्रदेश की धरती इन तीनों आध्यात्मिक धाराओं की समृद्ध विरासत को अपने भीतर समेटे हुए हैं। कलाकारों की कृतियों के माध्यम से इस विरासत को राष्ट्रीय एवं अंतरराष्ट्रीय स्तर पर प्रस्तुत करने का प्रयास किया जाएगा। यह आयोजन कलाकारों के बीच अंतरराष्ट्रीय सांस्कृतिक संवाद, कला के आदान-प्रदान तथा भारतीय कला परंपरा के वैश्विक प्रचार-प्रसार का भी महत्वपूर्ण माध्यम बनेगा। विशेष रूप से मॉरीशस और बांग्लादेश के कलाकारों की सहभागिता इसे अंतरराष्ट्रीय स्वरूप प्रदान कर रही है। आयोजकों के अनुसार, काशी की पावन धरती पर आयोजित यह अंतरराष्ट्रीय कला शिविर और उसके बाद होने वाली प्रदर्शनी संस्कृति संसद 2026 के सांस्कृतिक आयोजनों की श्रृंखला का महत्वपूर्ण हिस्सा है।

हिन्दुस्थान समाचार / श्रीधर त्रिपाठी

Livevns.news Desk
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