आंग्ल नववर्ष 2026 के पहले दिन श्री काशी विश्वनाथ और मां अन्नपूर्णा के दरबार में आस्था का सैलाब

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आंग्ल नववर्ष 2026 के पहले दिन श्री काशी विश्वनाथ और मां अन्नपूर्णा के दरबार में आस्था का सैलाब


—भगवान सूर्य देव ने अलसुबह उपस्थिति दर्ज करा दिन को खुशनुमा बनाया, मंदिरों में दर्शन पूजन के लिए लम्बी कतार, गंगा उस पार रेती में मेले जैसा नजारा

वाराणसी, 01 जनवरी (हि.स.)। आंग्ल नववर्ष 2026 के पहले दिन गुरूवार को उत्तर प्रदेश की धार्मिक नगरी काशी (वाराणसी) में श्री काशी विश्वनाथ और मां अन्नपूर्णा का दरबार लाखों श्रद्धालुओं से भरा रहा। अलसुबह धुंध और कोहरे को अर्दब में लेकर खिली धूप और सुहावने मौसम में युवाओं ने बाबा विश्वनाथ दरबार सहित विभिन्न मंदिरों में दर्शन पूजन कर जीवन में नए जोश—नई उम्मीद की शुरूआत की।

इस दौरान युवाओं और श्रद्धालुओं में बाबा विश्वनाथ, श्री संकटमोचन दरबार के प्रति आस्था गंगा की मौजों की तरह उफान मारती रही। दुर्गाकुण्ड स्थित मां कुष्मांडा दरबार, काशी हिन्दू विश्वविद्यालय स्थित विश्वनाथ मंदिर, लक्ष्मीकुंड स्थित लक्ष्मी मंदिर, सारनाथ स्थित सारंग महादेव दरबार, रोहनिया स्थित शूलटंकेश्वर महादेव, दुर्गाकुंड स्थित त्रिदेव मंदिर में युवाओं की भीड़ दर्शन पूजन के लिए भोर से ही कड़ाके की ठंड के बावजूद पहुंचने लगी। नव वर्ष के पहले दिन श्री काशी विश्वनाथ मंदिर में श्रद्धा और भक्ति उफान मारती रही। मंगलवार तड़के तीन बजे हुई बाबा की मंगला आरती के पहले लाखों श्रद्धालु दर्शन पूजन के लिए कतारबद्ध हो गए।

दिन चढ़ने के साथ कतार का दायरा बढ़ता चला गया। श्रद्धालु कतारबद्ध होकर अपनी बारी का इंतजार हर-हर महादेव के उद्घोष के साथ करते रहे। मंदिर परिक्षेत्र में भीड़ को देखते हुए मंदिर प्रशासन और जिला प्रशासन ने सुरक्षा और व्यवस्था का व्यापक प्रबंध किया है। उधर, नए साल का अलसुबह सूर्योदय की लालिमा के बीच गर्मजोशी से स्वागत के बाद युवाओं ने गंगाघाटों के साथ उस पार रेती में, सारनाथ, बीएचयू परिसर, माल्स और सार्वजनिक पार्को में जमकर मस्ती की। युवाओंं के भीड़ को देखते हुए नगर के सभी सार्वजनिक जगहोें पर सुरक्षा का व्यापक इंतजाम किया गया है।

सारनाथ में पुरातात्विक खंडहर परिसर, चौखंडी स्तूप, मुलगंधकुटी बौद्ध मंदिर परिसर, डियर पार्क, आशापुर चौराहा, हवेलिया चौराहा पर पुलिस कर्मी मुस्तैद नजर आये। गंगाघाटों पर लाखों की संख्या में जुटे लोगों ने नववर्ष के पहले दिन सजे—धजे बजड़ों, स्टीमर और नावों पर सवार होकर खिली धूप में नौकायन का आनन्द लिया। गंगा उस पार रेती में भी नव वर्ष मनाने के लिए लोग परिवार के साथ पहुंचते रहे। गंगा की रेती पर लोगों ने बच्चों के साथ घुड़सवारी का जमकर आनन्द उठाया। शहर में आटो चालक अपने वाहनों को सजाकर गुब्बारे लगा चल रहे थे। सड़कों पर भी चूने से लिखकर नववर्ष का स्वागत किया गया।

नए साल पर जमकर बिका गुलाब और फूलों का गुलदस्ता

नववर्ष के पहले दिन गुरूवार को नगर में जगह —जगह अस्थायी फूलों, गुलदस्तों की दुकान सजी थी। इंग्लिशिया लाइन और बांसफाटक स्थित फूल बाजार में फूलों के राजा गुलाब, बुके और गेंदा को खरीदने के लिए फुटकर विक्रेताओं का आना—जाना अलसुबह से ही लगा रहा। विदेशी फूल भी युवाओं ने जमकर खरीदा और इसे उपहार के रूप में दिया। न्यू कपल्स की पहली पसंद देसी गुलाब के साथ अमेरिकी गुलाब, इसके गुलदस्ते व बुके बनी रही। मलदहिया फूलमंडी में गुलाब का फूल और बुके बेच रहे अशोक सोनकर, पप्पू सोनकर, संदीप ने बताया कि नए साल पर गुलदस्ता व बुके देने का चलन वाराणसी में है। पहले लोग नए साल पर एक फूल देकर बधाई देते थे। अब युवा गुलदस्ते खरीद रहे हैं। खासकर प्रेमी युगल पैसे की परवाह नहीं कर रहे हैं। बस उन्हें बुके पसंद आना चाहिए। यही वजह है कि नए साल पर गली-मुहल्लों में भी बुके की दुकानें सज जाती हैं और इसकी खपत भी बढ़ जाती है। संदीप बताते हैं कि कार्यालयों में भी लोग बुके देकर बधाई देते हैं।

हिन्दुस्थान समाचार / श्रीधर त्रिपाठी

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