वाराणसी : गुजरात स्थापना दिवस पर सम्पूर्णानन्द संस्कृत विश्वविद्यालय में डांडिया–गरबा की रंगारंग प्रस्तुति
—भारतीय संस्कृति की विविधता हमारी शक्ति : प्रो.बिहारी लाल शर्मा
वाराणसी, 04 मई (हि.स.)। गुजरात स्थापना दिवस के उपलक्ष्य में उत्तर प्रदेश के वाराणसी स्थित सम्पूर्णानन्द संस्कृत विश्वविद्यालय के मुख्य भवन में सोमवार को डांडिया एवं गरबा नृत्य कार्यक्रम का आयोजन उल्लासपूर्ण माहौल में किया गया। कार्यक्रम में महिला शिक्षकों के साथ विद्यार्थियों ने भी पूरे उत्साह से भागीदारी की।
इस अवसर पर कुलपति प्रो. बिहारीलाल शर्मा ने कहा कि भारत की सांस्कृतिक विविधता हमारी सबसे बड़ी धरोहर है। उन्होंने कहा कि डांडिया और गरबा जैसे लोकनृत्य केवल मनोरंजन के साधन नहीं, बल्कि हमारी सांस्कृतिक चेतना और परंपराओं के जीवंत प्रतीक हैं। ऐसे आयोजनों से विद्यार्थियों में राष्ट्रीय एकता एवं सांस्कृतिक जागरूकता की भावना सुदृढ़ होती है।
कार्यक्रम की समन्वयक प्रो. विद्या कुमारी चंद्रा ने डांडिया एवं गरबा की ऐतिहासिक एवं आध्यात्मिक महत्ता पर प्रकाश डालते हुए कहा कि यह नृत्य परंपराएं भक्ति, ऊर्जा और सामूहिकता का अद्वितीय संगम प्रस्तुत करती हैं। उन्होंने युवाओं से आह्वान किया कि वे अपनी सांस्कृतिक जड़ों से जुड़े रहें और इस प्रकार के आयोजनों में सक्रिय सहभागिता करें।
कार्यक्रम के दौरान छात्र-छात्राओं ने पारंपरिक गुजराती वेशभूषा में मनमोहक प्रस्तुतियाँ दीं, जिनकी लय, ताल और समन्वय ने उपस्थित जनसमूह को मंत्रमुग्ध कर दिया। उत्कृष्ट प्रदर्शन करने वाले प्रतिभागियों को पुरस्कार एवं सम्मान प्रदान किया गया। कार्यक्रम में प्रो. विधु द्विवेदी, डॉ विशाखा शुक्ला, डॉ विजय कुमार शर्मा,डॉ.रानी द्विवेदी आदि की भी मौजूदगी रही।
हिन्दुस्थान समाचार / श्रीधर त्रिपाठी

