भारतीय संस्कृति की शक्ति उसके शाश्वत जीवन-मूल्यों और वसुधैव कुटुम्बकम में निहित : राज्यपाल आनंदी बेन पटेल

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भारतीय संस्कृति की शक्ति उसके शाश्वत जीवन-मूल्यों और वसुधैव कुटुम्बकम में निहित : राज्यपाल आनंदी बेन पटेल


भारतीय संस्कृति की शक्ति उसके शाश्वत जीवन-मूल्यों और वसुधैव कुटुम्बकम में निहित : राज्यपाल आनंदी बेन पटेल


—सम्पूर्णानन्द संस्कृत विश्वविद्यालय का 44वाँ दीक्षान्त महोत्सव सम्पन्न-संस्कृत एवं भारतीय ज्ञान-परम्परा के समन्वय से ही विकसित भारत का निर्माण संभव : पद्मश्री प्रो.आशुतोष शर्मा

वाराणसी, 29 जुलाई (हि.स.)। उत्तर प्रदेश की राज्यपाल एवं सम्पूर्णानन्द संस्कृत विश्वविद्यालय की कुलाधिपति आनंदीबेन पटेल ने कहा कि भारतीय संस्कृति की शक्ति उसके शाश्वत जीवन-मूल्यों और वसुधैव कुटुम्बकम में निहित है। शिक्षा का उद्देश्य केवल रोजगार नहीं, बल्कि चरित्र, विवेक, संस्कार और उत्तरदायी नागरिक का निर्माण है। राष्ट्रीय शिक्षा नीति-2020 के माध्यम से भारतीय ज्ञान प्रणाली को आधुनिक शिक्षा, विज्ञान, तकनीक और नवाचार से जोड़ा जा रहा है, जिससे भारत की प्राचीन ज्ञान-संपदा नई पीढ़ी तक प्रभावी रूप में पहुंच सके।

राज्यपाल सम्पूर्णानंद संस्कृत विश्वविद्यालय के 44वाँ दीक्षान्त महोत्सव को संबोधित कर रही थी। विश्वविद्यालय के ऐतिहासिक मुख्य भवन के सभागार में आयोजित महोत्सव की अध्यक्षता करते हुए राज्यपाल ने युवाओं से भारतीय भाषाओं, लोककलाओं, योग, आयुर्वेद, पाण्डुलिपियों तथा सांस्कृतिक विरासत के संरक्षण में सक्रिय भूमिका निभाने का आह्वान किया। महोत्सव में 11,959 विद्यार्थियों को उपाधियां प्रदान की गईं। तथा 29 मेधावी विद्यार्थियों को 51 स्वर्ण पदक दिया गया। जिसमें 17 छात्र एवं 12 छात्राएं शामिल रही।

समारोह में राज्यपाल ने कहा कि भारतीय परम्पराओं का प्रचार केवल गौरवगान तक सीमित न रहकर उनके वैज्ञानिक, सामाजिक और मानवीय पक्ष को शोध एवं प्रमाणों के साथ विश्व के समक्ष प्रस्तुत किया जाना चाहिए। उन्होंने ज्ञान भारत मिशन के अंतर्गत देशभर में पाण्डुलिपियों के सर्वेक्षण, संरक्षण, डिजिटलीकरण और प्रकाशन के व्यापक कार्यों का उल्लेख करते हुए कहा कि यह भारत की बौद्धिक विरासत को सुरक्षित रखने की ऐतिहासिक पहल है।

समारोह में राज्यपाल ने समाज में श्रम की गरिमा,स्वच्छता कर्मियों के सम्मान तथा 'नमस्ते योजना' के प्रभावी क्रियान्वयन पर बल दिया। आंगनबाड़ी कार्यकर्ताओं के योगदान की सराहना करते हुए राज्यपाल ने बालिकाओं के स्वास्थ्य, एचपीवी टीकाकरण, महिला सशक्तीकरण तथा जनसहभागिता आधारित सामाजिक अभियानों को व्यापक रूप से आगे बढ़ाने का आह्वान किया।

दीक्षांत समारोह में राज्यपाल ने कहा कि संस्कृत बोलना बहुत कठिन है, लेकिन सरकारी विद्यालय की बच्ची जिस तरह से संस्कृत बोल रही है वह बहुत अच्छी बात है। जिस अध्यापक ने संस्कृत का ज्ञान लेकर बच्ची को तैयार किया है वे बधाई के पात्र हैं। यह विश्वविद्यालय ऐसे 50 बच्चों को तैयार करें जो संस्कृत में बात करें, संस्कृत बोले।

राज्यपाल ने दिल्ली में पिछले दिनों हुए आंदोलन का जिक्र कर कहा कि जेन जी को देखिए और इनको देखिए, जेन-जी अपने संस्कार भूल रहे हैं। सही दिशा और देश के लिए काम करने वाले युवा होने चाहिए। उन्होंने कहा कि जेन जी की भाषा सही नहीं है। मुझे दुख होता है ये जेन जी 20 घंटे काम करने वाले प्रधानमंत्री के लिए गलत बोल रहे है।

धर्म नगरी काशी की सराहना कर राज्यपाल ने कहा कि काशी केवल एक नगर नहीं, बल्कि भारतीय संस्कृति, संस्कृत और आध्यात्मिक चेतना का शाश्वत केंद्र है। राज्यपाल ने उपाधि प्राप्त विद्यार्थियों से कहा कि वे ज्ञान, कौशल,संस्कार और सेवा-भाव को जीवन का आधार बनाकर राष्ट्रनिर्माण में सक्रिय योगदान दें।

उन्होंने विकसित भारत-2047 के संकल्प को साकार करने के लिए युवाओं से भारतीय संस्कृति, ज्ञान-विज्ञान और मानवीय मूल्यों को आत्मसात करने का आह्वान करते हुए कहा कि जब युवा अपनी जड़ों से जुड़े रहकर आधुनिकता के साथ आगे बढ़ेंगे, तभी भारत विश्वगुरु के रूप में अपनी गौरवपूर्ण पहचान को और अधिक सुदृढ़ करेगा।

दीक्षांत समारोह के मुख्य अतिथि भारतीय प्रौद्योगिकी संस्थान (आईआईटी), कानपुर के बोर्ड ऑफ गवर्नर्स के अध्यक्ष, वैज्ञानिक पद्मश्री प्रो. आशुतोष शर्मा ने कहा कि काशी भारत की सनातन ज्ञान-परम्परा का केंद्र है। यह विश्वविद्यालय उसका सशक्त संवाहक है। उन्होंने कहा कि दीक्षान्त समारोह केवल उपाधि प्राप्त करने का अवसर नहीं, बल्कि राष्ट्र और समाज के प्रति उत्तरदायित्व ग्रहण करने का पावन क्षण है। सा विद्या या विमुक्तये तथा विद्या ददाति विनयं, विनयाद् याति पात्रताम् का उल्लेख करते हुए उन्होंने कहा कि आज कृत्रिम बुद्धिमत्ता, क्वांटम प्रौद्योगिकी और आधुनिक विज्ञान के युग में भारतीय ज्ञान-परम्परा और विज्ञान परस्पर पूरक हैं। विज्ञान नवाचार की शक्ति देता है, जबकि भारतीय दर्शन विवेक, नैतिकता और मानवीय मूल्यों का मार्ग प्रशस्त करता है।

उन्होंने कहा कि भविष्य की सबसे बड़ी आवश्यकता बुद्धिमान मशीनें नहीं, बल्कि संस्कारित, संवेदनशील और प्रज्ञावान मनुष्य हैं। उन्होंने कहा कि विकसित भारत का अर्थ केवल आर्थिक समृद्धि नहीं, बल्कि ज्ञान, विज्ञान, संस्कृति और मानवीय मूल्यों में विश्व का नेतृत्व करना है।

समारोह में उत्तर प्रदेश के उच्च शिक्षा मंत्री योगेन्द्र उपाध्याय ने कहा कि दीक्षान्त समारोह में पदक प्राप्त करने वाले विद्यार्थियों की यह उपलब्धि उनकी लगन, परिश्रम और समर्पण का परिणाम है। उन्होंने कहा कि इस सम्मान को जीवनभर स्मरण रखें तथा अपने माता-पिता के त्याग और योगदान को कभी विस्मृत न करें। भारतीय संस्कृति के 'मातृ देवो भव, पितृ देवो भव, आचार्य देवो भव' के आदर्शों को आत्मसात करते हुए शिक्षा ग्रहण करना ही उसका वास्तविक उद्देश्य है। स्वामी विवेकानन्द का उल्लेख करते हुए उन्होंने कहा कि वास्तविक शिक्षा वही है जो मनुष्य में संस्कार, चरित्र और श्रेष्ठ आचरण का विकास करे। संस्कारयुक्त शिक्षा से ही सुदृढ़ परिवार, सशक्त समाज और विकसित राष्ट्र का निर्माण संभव है। इसके पहले समारोह का शुभारम्भ दीप प्रज्वलन, शैक्षणिक शिष्ट शोभायात्रा,राष्ट्रगान, वैदिक एवं पौराणिक मंगलाचरण तथा विश्वविद्यालय कुलगीत से हुई। कुलपति प्रो. बिहारी लाल शर्मा ने अतिथियों का स्वागत कर विश्वविद्यालय में शिक्षा, शोध, अधोसंरचना, गुणवत्ता, नवाचार तथा भारतीय ज्ञान-परम्परा के संवर्धन के क्षेत्र में उल्लेखनीय उपलब्धियाँ को बताया।

—महोत्सव में डिजी लॉकर का प्रदर्शन

दीक्षान्त महोत्सव में शैक्षणिक सत्र 2025–26 के विद्यार्थियों को डिजिलॉकर के माध्यम से उपाधियाँ उपलब्ध कराई गईं। कुलाधिपति ने 29 मेधावी स्नातकों को 51 स्वर्ण पदक प्रदान किए गए। साथ ही 44वें दीक्षान्त महोत्सव में कुल 11,959 उपाधियाँ एवं प्रमाणपत्र प्रदान किए गए। पीएच.डी. उपाधिधारियों को उपाधि एवं मेधावियों स्वर्ण पदक से सम्मानित किया गया। इस दौरान कुलाधिपति ने विश्वविद्यालय से एक एवं महाविद्यालय से तीन चयनित अध्यापकों पुरस्कार देकर सम्मानित किया।

समारोह के दौरान विश्वविद्यालय की उपलब्धियों पर आधारित लघु चलचित्र का प्रदर्शन किया गया। गोद लिए गए पाँच ग्रामों के 10 बच्चों ने पर्यावरण संरक्षण, राष्ट्रभक्ति एवं भारतीय लोक-संस्कृति पर आधारित सांस्कृतिक प्रस्तुतियाँ देकर उपस्थित जनसमुदाय को भाव-विभोर कर दिया।

इस अवसर पर गोद लिए गए पांच गांवों की भाषण, चित्रकला एवं कहानी वाचन प्रतियोगिताओं के विजेता विद्यार्थियों को सम्मानित किया गया।

हिन्दुस्थान समाचार / श्रीधर त्रिपाठी

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