सोनभद्र के समाजवादी पार्टी के सांसद को मंडलीय अपीलीय फोरम से मिली बड़ी राहत

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— जाति को लेकर दाखिल अपील को मंडलायुक्त एस.राजलिंगम ने किया खारिज

वाराणसी, 08 अप्रैल (हि.स.)। लोकसभा चुनाव में अनुचित लाभ लेने के लिए अपनी जाति को अनुसूचित जाति का बताकर गलत हलफनामा दाखिल करने के मामले में बुधवार को राबर्ट्सगंज (सोनभद्र) सुरक्षित सीट से समाजवादी पार्टी के सांसद छोटेलाल खरवार को बड़ी राहत मिल गई। मंडलीय अपीलीय फोरम के अध्यक्ष मंडलायुक्त एस. राजलिंगम एवं सदस्य अपर जिलाधिकारी चंदौली राजेश कुमार, उप निदेशक समाज कल्याण विभाग वाराणसी मंडल विजय प्रताप यादव, उपनिदेशक पिछड़ा कल्याण विभाग वाराणसी मंडल शरद प्रकाश श्रीवास्तव, उपनिदेशक मत्स्य विभाग वाराणसी मंडल सुरेश कुमार ने अनपरा, सोनभद्र निवासी अपीलार्थी इंद्रजीत की अपील को बलहीन और आधारहीन पाते हुए खारिज कर दिया। अदालत में सपा सांसद की ओर से वरिष्ठ अधिवक्ता अनुज यादव, नरेश यादव, रोहित यादव व संदीप यादव ने पक्ष रखा।

प्रकरण के अनुसार इंद्रजीत ने मंडलीय अपीलीय फोरम में अपील दाखिल की थी। आरोप था कि लोकसभा निर्वाचन के समय सपा सांसद छोटेलाल खरवार ने अपने नामांकन पत्र के साथ दाखिल हलफनामे में अपना निवास स्थान सोनभद्र दर्शाया है। अतः ये खरवार बिरादरी और सोनभद्र निवासी होने के नाते अनुसूचित जाति नहीं, बल्कि अनुसूचित जनजाति के श्रेणी में आते हैं और चुनाव में अनुचित लाभ के लिए उन्होंने गलत हलफनामा दाखिल किया है।

यह भी उल्लेखनीय है कि सपा सांसद छोटेलाल पुत्र स्व० रामधनी कमकर, कहार बिरादरी से आते हैं। बताते चले चुनावी हलफनामे में तथ्यों को छिपाए जाने के मामले में इलाहाबाद हाईकोर्ट भी छोटेलाल खरवार को पहले ही नोटिस जारी कर जवाब तलब कर चुका है । फर्जी जाति प्रमाण के जरिये चुनाव लड़ने के आरोपों पर हाईकोर्ट ने चंदौली के जिलाधिकारी को दस हफ्ते में फैसला लेने को कहा था।

गौरतलब हो कि सांसद छोटेलाल खरवार मूल रूप से उत्तर प्रदेश के चंदौली जिले के निवासी है। जनपद चंदौली में खरवार जाति को अनुसूचित जाति की सूची में जगह दी गई है। छोटेलाल खरवार ने अपने सभी डाक्यूमेंट्स में स्थाई पता सोनभद्र जिला बताकर वहीं के मतदाता सूची में अपना नाम शामिल कराया है। सोनभद्र जिले के मतदाता इंद्रजीत ने लोकसभा चुनाव के दौरान मई महीने में ही इस पर आपत्ति जताते हुए निर्वाचन अधिकारी से शिकायत की थी और छोटेलाल खरवार का नामांकन रद्द किये जाने की मांग की थी।

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हिन्दुस्थान समाचार / श्रीधर त्रिपाठी

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