मां कूष्मांडा के दरबार में उमड़ा आस्था का सैलाब, जीवन की बाधाओं से मुक्ति के लिए श्रद्धालुओं ने टेका मत्था

WhatsApp Channel Join Now
मां कूष्मांडा के दरबार में उमड़ा आस्था का सैलाब, जीवन की बाधाओं से मुक्ति के लिए श्रद्धालुओं ने टेका मत्था


मां कूष्मांडा के दरबार में उमड़ा आस्था का सैलाब, जीवन की बाधाओं से मुक्ति के लिए श्रद्धालुओं ने टेका मत्था


शारदीय नवरात्र के चौथे दिन दुर्गाकुंड मंदिर में भक्तों की भीड़, भोर से गूंजते रहे जयकारे

वाराणसी, 14 अक्टूबर (हि.स.)। उत्तर प्रदेश की धार्मिक नगरी काशी शारदीय नवरात्र में पूरी तरह आदिशक्ति की आराधना में लीन है। नगर के प्रमुख देवी मंदिरों में श्रद्धालुओं की भारी भीड़ उमड़ रही है। नवरात्र के चौथे दिन बुधवार को मां दुर्गा के चतुर्थ स्वरूप मां कूष्मांडा के दर्शन-पूजन के लिए दुर्गाकुंड स्थित प्राचीन दुर्गा मंदिर में आधी रात के बाद से ही भक्तों का तांता लगा रहा। भोर होते-होते पूरा मंदिर परिसर ‘सच्चे दरबार की जय’ और ‘मां शेरावाली की जय’ के जयकारों से गूंज उठा। श्रद्धालुओं ने माता के चरणों में शीश नवाकर जीवन की बाधाओं, विघ्नों और दुखों से मुक्ति की कामना की।

मंदिर के मुख्य पुजारी की देखरेख में तड़के तीन बजे के बाद मां के विग्रह को पंचामृत स्नान कराया गया। इसके बाद देवी को नवीन वस्त्र धारण कराकर पुष्पमालाओं और आभूषणों से भव्य शृंगार किया गया। भोग अर्पित करने के बाद वैदिक मंत्रोच्चार के बीच मंगला आरती संपन्न हुई। आरती के उपरांत श्रद्धालुओं के दर्शन के लिए मंदिर के कपाट खोल दिए गए। कपाट खुलते ही भक्त कतारबद्ध होकर अपनी बारी का इंतजार करने लगे और मां के दर्शन कर आशीर्वाद प्राप्त किया।

श्रद्धालु महिलाओं ने माता रानी को नारियल, चुनरी और सिंदूर अर्पित कर संतान सुख, सुख-समृद्धि तथा अखंड सौभाग्य की कामना की। सुबह से ही दर्शनार्थियों की लंबी कतार मंदिर से निकलकर मुख्य सड़क तक पहुंच गई। श्रद्धालुओं की भारी आमद से मंदिर के आसपास मेले जैसा माहौल बना रहा। भक्तों की आस्था और उत्साह से पूरा क्षेत्र भक्तिमय नजर आया।

प्रमुख देवी मंदिरों में भी उमड़ी श्रद्धालुओं की भीड़

नवरात्र के चौथे दिन काशी के अन्य प्रमुख देवी मंदिरों में भी दर्शन-पूजन के लिए श्रद्धालुओं का जमावड़ा लगा रहा। शक्तिपीठ मां विशालाक्षी मंदिर, संकठा मंदिर, महिषासुर मर्दिनी मंदिर, अर्दली बाजार स्थित महावीर मंदिर के दुर्गा दरबार और भोजूबीर स्थित दक्षिणेश्वरी काली मंदिर में भक्तों ने विधि-विधान से पूजा-अर्चना की। सुबह से ही मंदिरों में श्रद्धालुओं की आवाजाही बनी रही और पूरा शहर देवी आराधना के रंग में रंगा दिखाई दिया।

मां कूष्मांडा की आराधना से दूर होती हैं जीवन की बाधाएं

सनातन धर्म की मान्यताओं के अनुसार, मां दुर्गा के चतुर्थ स्वरूप मां कूष्मांडा की उपासना से जीवन के कष्टों, विघ्नों और बाधाओं से मुक्ति मिलती है। भक्तों का विश्वास है कि माता की कृपा से सुख, समृद्धि और आध्यात्मिक उन्नति का मार्ग प्रशस्त होता है तथा साधक भवसागर के बंधनों से मुक्त होने की दिशा में अग्रसर होता है।

धार्मिक मान्यता के अनुसार, मां कूष्मांडा की आठ भुजाएं हैं। उनके हाथों में कमंडल, धनुष, बाण, कमल पुष्प, अमृत से भरा कलश, चक्र और गदा सहित विभिन्न दिव्य आयुध एवं वस्तुएं सुशोभित हैं। मान्यता है कि जब सृष्टि का अस्तित्व नहीं था और चारों ओर घना अंधकार व्याप्त था, तब मां ने अपनी मंद मुस्कान से ब्रह्मांड की रचना की। इसी कारण उन्हें सृष्टि की आदिशक्ति के रूप में पूजा जाता है।

दुर्गाकुंड स्थित प्राचीन दुर्गा मंदिर का उल्लेख काशीखंड में भी मिलता है। नागर स्थापत्य शैली में निर्मित इस मंदिर का गाढ़ा लाल रंग इसकी विशिष्ट पहचान है। धार्मिक आस्था के केंद्र के रूप में प्रसिद्ध इस मंदिर में देश-विदेश से श्रद्धालु दर्शन के लिए पहुंचते हैं। प्रधानमंत्री नरेन्द्र मोदी भी इस मंदिर में दर्शन-पूजन कर चुके हैं।

काशी नरेश की पुत्री शशिकला के स्वयंवर से जुड़ी है मान्यता

दुर्गाकुंड मंदिर को लेकर काशी में एक प्राचीन धार्मिक मान्यता प्रचलित है। इसके अनुसार, काशी नरेश सुबाहु की पुत्री शशिकला के स्वयंवर के दौरान सुदर्शन की रक्षा के लिए मां दुर्गा इसी स्थान पर प्रकट हुई थीं। मान्यता है कि देवी के दर्शन और कृपा से अभिभूत काशी नरेश सुबाहु ने उनसे यहीं विराजमान रहने की प्रार्थना की। राजा के अनुरोध पर मां ने इस स्थान को अपना धाम बनाया और तभी से यहां उनकी आराधना की जाती है।

धार्मिक विश्वास है कि मां कूष्मांडा की विधिवत उपासना से अष्ट सिद्धियों और नौ निधियों की प्राप्ति होती है। देवी ने देवताओं और ऋषियों को असुरों के अत्याचार से मुक्ति दिलाने के लिए कूष्मांडा स्वरूप धारण किया था, ऐसी भी मान्यता प्रचलित है।

शारदीय नवरात्र के अवसर पर काशी में उमड़ रही श्रद्धालुओं की भीड़ इस बात की साक्षी है कि मां दुर्गा के प्रति भक्तों की आस्था कितनी गहरी है। मां के दरबार में पहुंचकर श्रद्धालु सुख-शांति, समृद्धि और कल्याण की कामना कर रहे हैं।

हिन्दुस्थान समाचार / श्रीधर त्रिपाठी

Livevns.news Desk
Livevns.news Desk

760438 Articles

Share this story