काशी से शंकराचार्य अविमुक्तेश्वरानंद की रामपाल को शास्त्रार्थ की खुली चुनौती

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काशी से शंकराचार्य अविमुक्तेश्वरानंद की रामपाल को शास्त्रार्थ की खुली चुनौती


—श्री विद्यामठ में ‘रामपाल का रसातल गमन’ ग्रंथ का विमोचन, सनातन धर्म पर लगाए गए आरोपों का शास्त्रसम्मत खंडन करने की घोषणा

वाराणसी,19 अक्टूबर (हि.स.)। ज्योतिषपीठाधीश्वर शंकराचार्य स्वामी अविमुक्तेश्वरानंद सरस्वती ने रामपाल को खुले मंच पर शास्त्रार्थ की चुनौती दी है। सोमवार को शंकराचार्य घाट स्थित श्री विद्यामठ में आयोजित पत्रकार वार्ता में उन्होंने सनातन धर्म, वेद-पुराणों और हिंदू देवी-देवताओं के संबंध में रामपाल की पुस्तकों एवं प्रचारित विचारों पर सवाल उठाए। उन्होंने कहा कि सनातन धर्म के विरुद्ध किए जा रहे दुष्प्रचार और शास्त्रों की कथित भ्रामक व्याख्याओं का जवाब शास्त्रीय प्रमाणों, तर्क और युक्ति के आधार पर दिया जाना चाहिए।

शंकराचार्य स्वामी अविमुक्तेश्वरानंद ने रामपाल की पुस्तकों ‘ज्ञान गंगा’ और ‘जीने की राह’ सहित अन्य सामग्री में हिंदू देवी-देवताओं तथा धर्मशास्त्रों के संबंध में की गई टिप्पणियों पर आपत्ति जताई। उन्होंने आरोप लगाया कि वेद, पुराण और अन्य धर्मग्रंथों के संदर्भों को तोड़-मरोड़कर प्रस्तुत कर लोगों के मन में अपनी धार्मिक परंपराओं के प्रति भ्रम और अनास्था पैदा करने का प्रयास किया जा रहा है। उन्होंने हिंदू पर्वों, धार्मिक परंपराओं, प्रतीकों और वैदिक विवाह संस्कार को लेकर प्रचारित विचारों की शास्त्रीय कसौटी पर समीक्षा किए जाने की आवश्यकता भी बताई।

18 प्रमुख बिंदुओं पर रखे विचार

पत्रकार वार्ता में शंकराचार्य ने रामपाल के प्रचार से जुड़े 18 प्रमुख बिंदुओं का उल्लेख किया। उन्होंने उसकी पुस्तकों के मुद्रण, मुद्रक के पते, प्रकाशन और वितरण व्यवस्था को लेकर भी सवाल उठाए। इसके साथ ही उन्होंने रामपाल के विरुद्ध लखनऊ में की गई कानूनी कार्रवाई, प्राथमिकी, न्यायालय में प्रस्तुत याचिकाओं और संबंधित घटनाक्रम की जानकारी दी।

शंकराचार्य ने कहा कि धार्मिक विषयों पर किसी भी प्रकार के दावे की समीक्षा शास्त्रीय प्रमाणों और तार्किक विवेचना के आधार पर होनी चाहिए। उन्होंने रामपाल को शास्त्रार्थ की चुनौती देते हुए कहा कि यदि उन्हें अपने ज्ञान और प्रस्तुत किए जा रहे शास्त्रीय प्रमाणों पर विश्वास है, तो उन्हें किसी तटस्थ स्थान पर आमने-सामने बैठकर शास्त्रार्थ के लिए आगे आना चाहिए।

शास्त्रीय खंडन के लिए शिवांश नारायण द्विवेदी को बनाया प्रतिनिधि

शंकराचार्य स्वामी अविमुक्तेश्वरानंद ने सनातन धर्म के विरुद्ध किए जा रहे कथित दुष्प्रचार का शास्त्रसम्मत खंडन समाज के सामने रखने के लिए शिवांश नारायण द्विवेदी को अपना प्रतिनिधि नियुक्त करने की घोषणा की। उन्होंने कहा कि संबंधित विषयों पर शास्त्र, प्रमाण और युक्ति के आधार पर पक्ष रखा जाएगा, ताकि लोगों के सामने धार्मिक मान्यताओं और धर्मग्रंथों से जुड़े तथ्यों को स्पष्ट किया जा सके।

‘रामपाल का रसातल गमन’ ग्रंथ का विमोचन

पत्रकार वार्ता के दौरान शिवांश नारायण द्विवेदी द्वारा संकलित ग्रंथ ‘रामपाल का रसातल गमन’ का विमोचन भी किया गया। आयोजकों के अनुसार, इस ग्रंथ में रामपाल द्वारा सनातन धर्म और धर्मशास्त्रों पर लगाए गए विभिन्न आरोपों तथा प्रचारित विचारों का शास्त्रीय आधार पर उत्तर प्रस्तुत करने का प्रयास किया गया है। संकलन में प्रामाणिक आचार्यों के विचारों और शास्त्रीय संदर्भों को आधार बनाया गया है।

शंकराचार्य ने कहा कि सनातन धर्म से जुड़े विषयों पर उठाए जाने वाले सवालों का उत्तर तथ्यों, शास्त्रीय प्रमाणों और तर्कपूर्ण विवेचना के माध्यम से दिया जाना चाहिए। उन्होंने दोहराया कि यदि रामपाल शास्त्रार्थ के लिए तैयार होते हैं, तो सनातन धर्म के संबंध में किए गए उनके दावों की चर्चा आमने-सामने शास्त्रीय आधार पर की जा सकती है।

हिन्दुस्थान समाचार / श्रीधर त्रिपाठी

Livevns.news Desk
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